एक दिन में दो निर्णय भाजपा ने ले लिए। जहां आज पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया वहीं आज ही राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष 45 साल के नितिन नबिन को बनाया गया है।
अभी एक चैनल पर चर्चा में कहा जा रहा था कि नितिन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर मोदी और भाजपा ने अपनी सबसे ज्यादा risk taking capacity दिखाई है और नितिन की कुछ बातें सुनकर यह भी कहा गया कि भाजपा में बहुत लोग अब “मार्गदर्शक मंडल” में जाने वाले है।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
इस बात का मतलब तो यही हुआ कि वह कहना चाह रहे हैं कि ये योगी को कमजोर करने की साजिश है और परोक्ष मतलब है कि योगी को मोदी का उत्तराधिकारी बनने से रोका जाए। भाजपा में ऐसे महत्वपूर्ण पद संघ के परामर्श के बिना नहीं दिए जाते और हो सकता है समय आने पर योगी और अमित शाह में मोदी की जगह लेने की होड़ हो लेकिन मोदी, भाजपा और संघ अभी से योगी को कमजोर करने की कोशिश करेंगे जबकि मात्र एक साल बाद 2027 में उत्तर प्रदेश के चुनाव सिर पर हैं। ऐसी बातो से भाजपा का नुकसान तो होगा ही लेकिन साथ में सपा और कांग्रेस को फायदा भी होगा।
सबसे ज्यादा risk taking capacity तो कांग्रेस में है जो 95 चुनाव हारने के बाद भी front foot पर राहुल गांधी को खिला रही है। नितिन नबिन का चुनाव कुछ सोच समझ कर ही किया गया होगा जबकि कई और नाम सामने आ रहे थे जिसमें शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव और सुधांशु त्रिवेदी भी थे।
नितिन नबिन की किसी भी बात से यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि भाजपा के और कई नेता “मार्गदर्शक मंडल” में जाएंगे। मोदी की कोशिश युवाओं को आगे लाने की है जिससे पार्टी में युवाओं और elderly नेताओं का मिश्रण साथ मिलकर काम कर सके। किसी को अपनी समझ लगा कर फिजूल बातें नहीं करनी चाहिए। अभी उन्हें “कार्यकारी अध्यक्ष” बनाया गया है और उचित समय आने पर ही नियमित अध्यक्ष का पद दिया जाएगा। हो सकता है ये वैसे ही किया गया है जैसे कार खरीदने से पहले उसकी Test Drive” की जाती है।
एक सज्जन ने न्यूयॉर्क में मुस्लिम मेयर बनने के बाद, मुझे लिखा था कि हमारे देश में कोई शक्तिशाली Hindu Organisation नहीं है, शंकराचार्यों को किनारे कर दिया गया है; हिंदू कमजोर हो रहे हैं लेकिन हमें उससे कोई मतलब नहीं है; विहिप को कमजोर करके ज़ीरो कर दिया गया है, तोगड़िया को ख़त्म कर दिया है और सबसे पहली सबसे मजबूत पार्टी शिव सेना को विभाजित करके हिंदुओं को कमजोर कर दिया गया है।
ये बातें लिखने से पहले उन्होंने स्थिति का ठीक से अवलोकन नहीं किया। शिवसेना का असली रूप उन्होंने नहीं देखा और न तोगड़िया को पहचाना जो मौका मिलते ही मोदी को खा सकता है।
वो भाजपा के समर्थक जरूर है लेकिन ऐसी बातें लिख कर उन्हें पता भी नहीं चला कि वो भाजपा का समर्थन करते करते कैसे और कब कांग्रेस के पक्ष में खड़े हो गए। ऐसे लोग बहुत है।

No comments:
Post a Comment