“वोट चोरी” हुई बंगाल में, जितने मतों के अंतर से ममता और उनके विधायक जीते, उससे ज्यादा वोट कटे है; वोट न काटने के निर्देश देने वाले दोनों CEC 2010 में कांग्रेस के नियुक्त किए हुए थे

सुभाष चन्द्र

अमित शाह ने चुनाव सुधारों पर बहस का उत्तर देते हुए लोकसभा में 10 दिसंबर को कहा था कि 2010 में चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि किसी भी रिटर्निंग ऑफिसर को मतदाता सूची से  किसी भी मतदाता का नाम काटने का अधिकार नहीं होगा 2010 में किस CEC ने आदेश दिया, यह कहीं नहीं मिला, लेकिन 2010 में 2 CEC थे और दोनों कांग्रेस के नियुक्त किये हुए थे और वो थे। 

-नवीन बी चावला (21 अप्रैल, 2009 से 30 जुलाई 2010 तक);

-एस वाई कुरैशी (30 जुलाई, 2010 से 10 जून 2012 तक)

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यह कारण हो सकता है जो मरे हुए लोगों और घुसपैठियों के भी वोट पड़ते रहे और उसकी जिम्मेदारी कांग्रेस की साबित होती है कांग्रेस इतना गोलमाल करने के बाद भी 2014 में लोकसभा में सबसे कम सीट जीती मात्र 44 और राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 2013 में और उसके बाद भी कई राज्यों की चुनाव हारी

अब बंगाल में चुनाव आयोग की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार ममता और उसके कुछ विधायकों की सीटों पर उनके जीत के मार्जिन से ज्यादा वोट काटे गए है जो नीचे दिए आंकड़ों से साफ़ होता है -

उम्मीदवार का नाम (सीट का नाम) (जीत का मार्जिन) ( वोट कटे )

-बाबुल सुप्रियो (बॉलीगंज) (20228) (65171)

- नयना बंदोपाध्याय (चौरंगी) (45344 ) (74553)

- शशि पांजा (श्यामपुकुर) (22520 ) (72900);

-ममता बनर्जी  (भवानीपुर) (58832 ) (44,757);

-ब्रात्य बसु (दमदम) (26731) (33862);

-चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम -उत्तर) (28499) (33912);

-फिरहाद हाकिम (कोलकाता पोर्ट ) (68554) (63730) दोनों का अंतर बहुत करीब है

चुनाव आयोग की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार 25 विधानसभा सीटों पर अभी तक 11.5 लाख वोट कटने का अनुमान है मतलब विधानसभा की कुल 294 में 25 सीटों (यानी करीब 12% सीटों) पर अगर 11.5 लाख वोट कट रहे हैं तो औसतन करीब कुल डेढ़ करोड़ लोगो के नाम वोटर लिस्ट से कटने चाहिए लेकिन आयोग की ड्राफ्ट लिस्ट में केवल 58 लाख नाम कटे हैं

फिर क्या कारण है जो ममता बनर्जी की बौखलाहट चरम पर है जो महिलाओं को उकसा रही थी कि कोई अपना फॉर्म BLO को भर कर न दे और उस पर अपनी “किचन के हथियारों” से हमला कर दो और पुरुष उनका साथ दें ममता ने प्रतिज्ञा ली कि वो भी अपना SIR का फॉर्म नहीं भरेंगी लेकिन कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उसने गुपचुप अपना फॉर्म जमा करा दिया है लेकिन गूगल सर्च पर आपको कोई सूचना नहीं मिलेगी

मजे की बात है राहुल गांधी और विपक्षी दल बंगाल में ममता की जीत का श्रेय “वोट चोरी” को नहीं दे रहे जबकि पीछे केवल मोदी, भाजपा और चुनाव आयोग के पड़े हैं

चुनाव आयोग के इन आंकड़ों से लगता है कि यह चुनाव ममता पर बहुत भारी पड़ने वाला है जैसे उसने सी.पी.एम. के 35 साल के गुंडा राज का अंत किया था अब उसके खुद के गुंडा राज का अंत होने का समय आ गया है 

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