राहुल गांधी और उसका इकोसिस्टम माहिर है सरकार और हर किसी सामने वाले को “बचाव की मुद्रा” में डालने के लिए; भारत से बाहर जाकर तो भारत को नीचा ही दिखा देता है

सुभाष चन्द्र

हार की मानसिकता से ग्रसित राहुल गांधी एक नाकाम नेता है। खुद हारा हुआ है और देश को आगे बढ़ता नहीं देख सकता अक्टूबर में जब कोलंबिया सैर सपाटे के लिए गया था तो वहां कहा कि:  

“"I don’t think India sees itself as taking leadership in the world," 

I think that is not our model

"We are a large country, and we believe in having a partnership. We are not arrogant enough to believe that we should lead the world". He contrasted this with China, suggesting that "maybe China thinks of itself this way".

Rahul Gandhi said  during an interaction at EIA University in Medellín, Colombia”.

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यही कारण है कि कांग्रेस को इंडी गठबंधन में साथी दलों ने कांग्रेस और राहुल गांधी को अपना नेता नहीं माना क्योंकि जो व्यक्ति खुद नेतृत्व संभालने को तैयार नहीं है, वो न तो गठबंधन का नेतृत्व संभाल सकता है और न देश को दुनिया का लीडर बनते देख सकता है चीन के लिए उसे भरोसा है वो विश्व का नेता बन सकता है

वैसे तो हर मुद्दे को कुटिलता से उठा कर  भाजपा, सरकार या संवैधानिक संस्थाओं को Defensive Mode में खड़ा कर देता लेकिन उसके मुद्दों की हवा बड़ी जल्दी निकल जाती है वोट चोरी के लिए चुनाव आयोग को बार बार स्पष्टीकरण देना पड़ा और उसकी बातों को काटने के लिए पूरी रिसर्च करनी पड़ी लेकिन सारी हेंकड़ी अमित शाह ने लोकसभा में निकाल दी जो राहुल गांधी को पूरे विपक्ष के साथ सदन छोड़ कर भागना पड़ा

अब जर्मनी में BMW की फैक्ट्री में जाकर ऐसा बोला जैसे मुंह से गोबर कर दिया हो गूगल पर लिखा है -

“During his recent visit to a BMW facility in Munich, Germany, Rahul Gandhi stated that India's overall manufacturing is declining and needs to increase, but he did not specifically say that production in the BMW factory itself was very low”. 

अब भारत सरकार और भाजपा बचाव की मुद्रा में खड़ा कर दिया अगर कुछ नहीं बोलते तो उसका भारत को विदेश में बदनाम करने का मिशन पूरा हो जाता है और बोलते हैं तो उसे वो सुनेगा नहीं क्योंकि उसका टेप रिकॉर्डर तब तक चलेगा जब तक कोई दूसरा मुद्दा हाथ में न आ जाए

छोटी सी बात है जिसे राहुल गांधी और उसके चापलूसों का गैंग समझना ही नहीं चाहता कि उत्पादन के अनुरूप ही जीडीपी बढ़ती है पहले की बात छोड़िये, इस वर्ष की ही पहली दो तिमाही में ही जीडीपी 8% बढ़ी है कुछ क्षेत्रों का उत्पादन देखिए : 

Electronic Production 

2014 - 15 : 1.9 लाख करोड़ 

2024 - 25 : 11.3 लाख करोड़ 

Electronic Exports 

2014 - 15 : 38,000 करोड़ 

2024 - 25 : 3.27 लाख करोड़ 

Mobile Manufacturing Units 

2014 - 15 : 2 यूनिट 

2024 - 25 : 300 यूनिट्स 

Mobile Phone Production 

2014 - 15 : 18,000 करोड़ 

2024 - 25 :  5. 45 लाख करोड़ 

Mobile Phone Exports 

2014 - 15 : 1,500 करोड़ 

2024 - 25 :  2 लाख करोड़ 

Defence Production 

2014 - 15 : 46,429 करोड़ 

2024 - 25 : 1.54 लाख करोड़ 

जर्मनी की जीडीपी भी देख ले राहुल गांधी -

जर्मनी की जीडीपी 

2023 : -0.3 to -0.4% (characterised by negative growth in manufacturing and failing House spending-

2024 : -0.2% to -0.5% (Price-adjusted annual growth) - (Continued struggles in manufacturing and construction, with the economy contracting again  

2025 (Forecast) : Around 0.3% (German government forecast)

भारत का जीडीपी कांग्रेस के समय में 2014 में इतनी कम थी कि भारत Fragile Economy बन कर 11 नंबर पर था अब भारत आर्थिक तौर पर विश्व में चौथे नंबर पर है -

2023 - 24 में जीडीपी - 8.2%

2024 - 25 में जीडीपी - 6.5%

2025 -26 में जीडीपी - 8% (पहली दो तिमाही में)

लेकिन कांग्रेस का कुछ नहीं हो सकता बस राहुल गांधी को GenZ को खड़ा करने से मतलब है और शायद एक और कोशिश करेगा जर्मनी में सोरोस के गिरोह से मिलकर अब शहजादा जर्मनी के बाद कहां गया, किसी को कुछ नहीं पता चमचे और कांग्रेस चुप है

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