ऐसे लटकते है मुक़दमे अनंत समय तक, केजरीवाल और संजय सिंह की याचिका सत्र न्यायलय ने ख़ारिज की सारा फसाद CIC के एक Illegal Order से 2016 में शुरू हुआ

सुभाष चन्द्र

अभी 4 दिन पहले गुजरात के एडिशनल सत्र न्यायाधीश ने केजरीवाल और संजय सिंह की याचिका ख़ारिज कर दी जिसमें उन्होंने मांग की थी कि उन दोनों के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का केस अलग अलग चलाया जाए। पहले इसके बारे में याचिका ट्रायल कोर्ट ने खारिज की थी। 

मामले अप्रैल 2023 का है - तब  31 मार्च को गुजरात हाई कोर्ट ने CIC (मुख्य सूचना अधिकारी) के अप्रैल, 2016 के आदेश को रद्द कर दिया था और उसके बाद केजरीवाल और संजय सिंह गुजरात ने विश्वविद्यालय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थी और उसके लिए विश्वविद्यालय ने आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था

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सूचना आयोग के तत्कालीन  CIC, M. Sridhar Acharyulu ने केजरीवाल के एक पत्र के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक डिग्री प्रकाशित करने के लिए कहा जो उन्हें करने का अधिकार नहीं था क्योंकि वह कोई आदेश सीधे किसी के पत्र पर नहीं दे सकते M. Sridhar Acharyulu भी खुद को संविधान का निर्माता समझ बैठे जो एक गैर कानूनी आदेश दे दिया जिसकी वजह से दिल्ली सरकार का लाखों रुपया बर्बाद किया केजरीवाल ने वकीलों की फीस देने के लिए कुछ दिन पहले CJI सूर्यकांत ने कहा था कि अलग अलग कोर्ट एक ही विषय पर अपने हिसाब से निर्णय देते है और इसलिए एक यूनिफार्म तरीका अपनाना होगा सच्चाई यह है कि हर जज अपने को खुदा समझ लेता है और कानून की विवेचना अपने दिमाग से करके नया कानून बना देता है जिसे फिर लोग लड़ते रहते हैं अपीलों में

दिल्ली हाई कोर्ट की single judge bench भी उस आदेश को रद्द कर चुकी है लेकिन 2016 से उसके खिलाफ अपील दिल्ली हाई कोर्ट की खंड पीठ में लंबित पड़ी है (9 साल से)

अब एडिशनल सत्र न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील हो सकती है अगर एकल पीठ के पास गई और खारिज हो गई तो खंडपीठ में जाएगा और वहां भी खारिज हो गई तो सुप्रीम कोर्ट में और इस तरह 5-7 साल और निकल जाएंगे सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने उसकी ED द्वारा गिरफ़्तारी की वैधता का मामला पहले ही बरफ में लगा दिया जो 12 जुलाई 2024 के बाद अभी तक 5 जजों की बेंच गठित नहीं हुई जबकि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या पूरी है अभिषेक मनु सिंघवी पहले ही सेटिंग कर गया और अब बेंच भी गठित इसलिए न हो रही हो कि सिंघवी की फीस केजरीवाल कहां से देगा क्योंकि सरकार तो रही नहीं दिल्ली में जहां से सिंघवी को करोड़ों की कमाई हुई थी

परसों जो objection ED की चार्जशीट पर दिल्ली कोर्ट ने लगाया, वह राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी लगा सकते थे जब ED ने उन्हें summon किया था पूछताछ के लिए और इसलिए मैं कहता हूं technical grounds पर कोई केस रद्द करना उचित नहीं है

आपको याद होगा Newsclick के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ़्तारी को भी जस्टिस बीआर गवई ने एक Technical Ground पर अवैध करार दे दिया था कि अभियोजन पक्ष ने उसे गिरफ़्तारी के कारण नहीं बताए ये तो बाद में भी बताए जा सकते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे छोड़ते हुए यह भी नहीं सोचा कि  जिस मजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेजा, क्या यह देखना उसका काम नहीं था कि जबकि पुरकायथ पर विदेश से 115 करोड़ रुपए लेने का आरोप था 

केजरीवाल ने 2014 चुनाव में कहा था "The one who votes for Congress, I would believe, will be betraying the country... The one who votes for BJP, even God will not forgive him, he will be betraying the country". सुल्तानपुर कोर्ट के केस पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2023  रोक लगा दी जो अभी जारी है और ट्रायल शुरू भी नहीं हो सका सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी खड़ा था उसके लिए 

ये तो तकनीकी आधार को छोड़िये, लालू यादव तो बिना किसी कारण 12 साल से जमानत लिए मौज कर रहा है और केस एक इंच भी नहीं चले

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