इस महीने 13 दिसंबर को ISIS ने सीरिया में 2 अमेरिकी सैनिकों और 1 नागरिक की हत्या पर ट्रंप के आदेश पर ISIS के 70 आतंकी ठिकानों पर बमबारी कर तबाह कर दिया। सीरिया की आज की सल्तनत वैसे ट्रंप के साथ है और अमेरिकी/ सीरियाई सुरक्षा अधिकारियों की बैठक के समय ISIS ने हमला किया था।
अब ट्रंप की सेना ने 25 दिसंबर को क्रिसमस पर नाइजीरिया में ईसाइयों की लगातार हत्याओं को देखते हुए ISIS आतंकियों पर भीषण प्रहार किया। ट्रंप ने ISIS को “आतंकी कचरा” बताते हुए कहा कि यह संगठन लंबे समय से निर्दोष ईसाइयों की हत्या कर रहा है और उस पर अमेरिकी सेना ने परफेक्ट स्ट्राइक की है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
“कट्टर इस्लामी आतंकवाद” को पनपने नहीं देंगे लेकिन “Father of Islamic terror” पाकिस्तान के असिम मुनीर के साथ ट्रंप ने प्यार की पींगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ दिन बाद अमेरिका अपने ही देश में इस्लामिक कट्टरवाद को पनपता देखेगा जैसा ब्रिटेन और यूरोपीय देश देख रहे हैं।
अमेरिका ईसाइयों की रक्षा करेगा और इज़रायल यहूदियों की रक्षा के लिए इस्लामिक कट्टर आतंकियों पर स्ट्राइक करने में पीछे नहीं रहता। फिर इसका मतलब तो साफ़ है भारत भी यदि हिंदुओं की रक्षा के लिए बांग्लादेश में हमला करे तो किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए लेकिन अमेरिका जैसे ही देशों को परेशानी होगी क्योंकि बांग्लादेश में अमेरिका ने ही तख्तापलट का तांडव किया और आज हिंदुओं की दुर्दशा के लिए भारतीय सेकुलरों से पहले अमेरिका जिम्मेदार है।
लोग कह रहे हैं कि भारत को बांग्लादेश को सभी सहायता देनी बंद कर देनी चाहिए, खासकर खाद्य सामग्री की सप्लाई सबसे पहले बंद करनी चाहिए। लेकिन ऐसा कहने वाले भूल जाते हैं कि बांग्लादेश में लगभग सवा करोड़ हिंदू भी रहते हैं और अगर हम खाद्य सामग्री की सप्लाई बंद करते हैं तो जिहादी मोहमद यूनुस हिंदुओं को भूखा मार देगा और भारत के इस कदम पर हिंदुओं पर और अत्याचार करेगा।
ऐसा नहीं है भारत कुछ नहीं कर रहा। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद कोई वित्तीय सहायता भारत ने नहीं दी है बल्कि इंटरनेट और बिजली सप्लाई में कटौती की है और समय देख कर उग्रवादियों के ठिकानों को ध्वस्त भी किया जायेगा। ये काम जल्दबाजी में नहीं हो सकते क्योंकि उनसे वहां रहने वाले हिंदू बड़े खतरे में आ सकते हैं।
मोदी ने क्रिसमस पर चर्च जाकर भारत समेत ट्रंप और अन्य ईसाई देशों को संदेश दिया है कि भारत में अल्पसंख्यक केवल मुसलमान ही नहीं, ईसाई समुदाय समेत और भी अल्पसंख्यक हैं और भारत सभी की रक्षा करता है।
अमेरिका की संस्था U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF): A U.S. government commission monitoring religious persecution globally, often impacting minority groups अपनी हर साल रिपोर्ट में केवल मुसलमानों को लेकर भारत सरकार पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाती रही है जबकि हिंदुओं पर अल्पसंख्यक होने के नाते बांग्लादेश और पाकिस्तान के अत्याचारों पर खामोश रहती है। मोदी का संदेश अमेरिकी संस्था जैसी दुनिया भर की संस्थाओं को भी था।
अगले वर्ष केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों को ध्यान में रख कर भी मोदी ने शायद चर्च में जाना उचित समझा हो। वैसे मुस्लिमों की तरह ईसाई भी मोदी को वोट नहीं करते।

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