सनातन वो धर्म है जो प्राकृतिक या कहा जाए कि आयुर्वेद का भंडार है। यहां नदियां ही नहीं वृक्ष तक पूजनीय है, क्योकि पीपल, बरगद, नीम, कीकड़ और आम का वृक्ष आदि जनता के स्वास्थ्य के बहुत लाभकारी है। जिनकी तुलना नहीं की जा सकती। लेकिन पश्चिमी सभ्यता में शिक्षित होते हुए अशिक्षित होकर विदेशी पौधों और वृक्षों पालन-पोषण कर हरियाली का नाम देकर पागलों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जिस तरह मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली पाखंडी सेक्युलरिस्टों ने यूनानी को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद को दफ़न करने का असफल प्रयास किया।
यही पुरातन साँच- आज सब मान रहे हैं। भाग जाय प्रदूषण सभी अब जान रहे हैं।
विश्वताप मिट जाये होय हर जन मन गदगद। धरती पर त्रिदेव हैं- नीम पीपल और बरगद
आप को लगेगा अजीब बकवास है, किन्तु यह सत्य है
पिछले 70 सालों में पीपल, बरगद और नीम के पेडों को भारत विरोधी, हिन्दू विरोधी, हिन्दू धर्म विरोधी, सेना विरोधी, झंडा विरोधी, मंदिर विरोधी, राम सेतु विरोधी श्रीमहाकाल कारीडोर विरोधी, ज्ञानवापी विरोधी, मथुरा श्रीकृष्ण विरोधी, कांग्रेस और इंडी महा-ठग-बंधन में जितनी भी पार्टीयों ने सरकारी स्तर पर पीपल, बरगद, नीम,आंवला,जामुन, आम, महुआ, आदि बड़े बड़े पेड़ लगाना बंद कर दिए और खासकर पीपल बरगद लगाना बन्द किया गया है
पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एबजॉर्बर चौबीसो घंटे करता है। और दो घंटे में दो हजार लोगों की आक्सीजन देता है। और गौशालाओं में प्रति सौ फिट की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगा दिया जाय तो लोगो के साथ साथ गाय, भैंस बकरी कभी बीमार भी नहीं होगी। और पीपल के पत्ते और शुद्ध आक्सीजन लेकर स्वस्थ सभी लोग और पशु पक्षी सभी स्वस्थ रहेंगे । बरगद 80% और नीम 75 % शुद्ध आक्सीजन देते हैं। और जो व्यक्ति अपने पितरों के नाम पर संकल्प लेंकर एक सुपारी और एक सिक्का लेकर संकल्प बोलकर अपने अमुक पित्र का नाम लेकर एक पित्र के नाम लेकर एक पीपल, एक बरगद और एक बेल फल का पेड़ लगाकर उसकी बडे़ होने तक सुरक्षा भी करता है और उनके नाम से गाय माता का दान पूर्ण श्रद्धा भक्ति से करता है।और प्रतिदिन या पाच मिनट का समय मिलने पर श्रीगणेश जी सहित सभी देवि देवताओं का नाम लेकर सूर्य देव को उगलियो के ज ऊपर से जल गिराकर पूर्व दिशा में, सभी रिषियो का नाम लेकर हथेली के बीच भाग से जल गिरा कर उत्तर दिशा में, और अपने गौत्र का नाम लेकर सभी मात्र पित्र, पिता पित्र बोलकर अपने गुरु सहित गौत्र का नाम लेकर दक्षिण में अगूठे से जल पितरों को दे। और उनके नाम से एकादशी का व्रत करने पर जो पुन्य आप पितरों को दे सकते हो। वो करोड़ों अरवो रूपये के दान से भी बड़ा पुन्य अपने पितरों को फल मिल जाऐगा।
इसके बदले लोगो ने विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया , जो जमीन को जल विहीन कर देता है
आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ो ने ले ली है
अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही
और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही
हर 100 फिट की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगायें
तो आने वाले कुछ सालो बाद प्रदूषण मुक्त भारत होगा। और भविष्य में वर्षा पर्याप्त होंगी। गर्मी से निजात मिलती। और आक्सीजन को खरीदना नहीं पढ़ेगा।
वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए
पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं।
वैसे भी पीपल को वृक्षों का राजा कहते है। इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-
मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,
सखा शंकरमेवच।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,
वृक्षराज नमस्तुते।
अब करने योग्य कार्य
इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ायें
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