अब ‘अवैध’ हीरों पर लगेगी लगाम, भारत को मिली UN समर्थित Kimberley Process की अध्यक्षता: वैश्विक बाजार को कंट्रोल कर खूनी संघर्षों को रोकेगा हिंदुस्तान

भारत 2026 में बनेगा किम्बर्ली प्रोसेस का अध्यक्ष (साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)
भारत के लिए वर्ष 2026 केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत के नए अध्याय की शुरुआत है। इसकी बुनियाद उस फैसले से पड़ी है, जिसके तहत भारत को संयुक्त राष्ट्र समर्थित किम्बर्ली प्रोसेस (Kimberley Process – KP) का अध्यक्ष चुना गया है।

यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब वैश्विक हीरा व्यापार भूराजनैतिक तनावों, प्रतिबंधों और नैतिक व्यापार की बढ़ती माँग के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में भारत का नेतृत्व सँभालना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे और भारत की साख का स्पष्ट संकेत है।

किम्बर्ली प्रोसेस के अध्यक्ष के रूप में भारत का चयन क्यों है खास?

किम्बर्ली प्रोसेस की प्लेनरी बैठक में यह तय किया गया कि भारत 1 जनवरी 2026 से इस वैश्विक मंच का अध्यक्ष बनेगा, जबकि गुरुवार (25 दिसंबर 2025) से वह उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएगा। यह भारत के लिए तीसरा अवसर है, जब उसे किम्बर्ली प्रोसेस की अध्यक्षता सौंपी जा रही है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत केवल एक बड़ा हीरा प्रोसेसिंग केंद्र नहीं, बल्कि नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला जिम्मेदार देश भी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार में भारत की नेतृत्व क्षमता का प्रमाण बताया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह चयन वैश्विक स्तर पर मोदी सरकार की पारदर्शी और ईमानदार व्यापार नीति पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। भारत की यह भूमिका इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग भारत में होती है, जिससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।

आखिर क्या है किम्बर्ली प्रोसेस और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

किम्बर्ली प्रोसेस एक अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय पहल है, जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग और सिविल सोसाइटी एक साथ मिलकर काम करती हैं। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य ‘संघर्ष हीरों’ (Conflict Diamonds) यानी अवैध हीरों के व्यापार पर रोक लगाना है। संघर्ष हीरे (Conflict Diamonds) वे कच्चे हीरे होते हैं, जिनका इस्तेमाल विद्रोही समूह या सशस्त्र संगठन युद्ध, हिंसा और अस्थिरता को वित्तपोषित करने के लिए करते हैं।

1990 के दशक में अफ्रीका के कई देशों में गृहयुद्ध और विद्रोह के पीछे हीरों से होने वाली अवैध कमाई एक बड़ी वजह बनी। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से किम्बर्ली प्रोसेस की नींव रखी गई, ताकि हीरों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित किया जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि हीरा हिंसा और रक्तपात का माध्यम न बने।

किम्बर्ली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम की भूमिका और प्रभाव

किम्बर्ली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम यानी KPCS को 1 जनवरी 2003 से लागू किया गया। इसके तहत यह अनिवार्य किया गया कि किसी भी देश से दूसरे देश में निर्यात या आयात होने वाले कच्चे हीरों के साथ प्रमाणपत्र होना चाहिए, जो यह साबित करे कि वे संघर्ष-रहित हैं। समय के साथ यह व्यवस्था इतनी प्रभावी हो गई कि आज यह दुनिया के 99 प्रतिशत से अधिक कच्चे हीरा व्यापार को नियंत्रित करती है।

वर्तमान में किम्बर्ली प्रोसेस में 60 प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों को एक इकाई के रूप में गिना जाता है। यह व्यवस्था हीरा उद्योग के लिए सबसे व्यापक और संगठित अंतरराष्ट्रीय नियामक ढाँचा बन चुकी है, जिसने अवैध हीरों की बाजार में एंट्री को काफी हद तक रोका है।

हीरा उद्योग के लिए किम्बर्ली प्रोसेस क्यों है इतना जरूरी?

हीरा उद्योग केवल लग्जरी या गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई देशों की अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा हुआ है। यदि संघर्ष हीरे खुले बाजार में प्रवेश कर जाते हैं, तो इससे न केवल युद्ध और हिंसा को आर्थिक मदद मिलती है, बल्कि उपभोक्ताओं का भरोसा भी टूटता है। किम्बर्ली प्रोसेस ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्राहक जो हीरा खरीद रहा है, वह खून और हिंसा से सना हुआ न हो।

किम्बर्ली प्रोसेस के प्रयासों के चलते सिएरा लियोन, अंगोला, लाइबेरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और कोट डी’वोआर जैसे देशों में संघर्ष हीरों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हुई है। KP के अनुसार, आज संघर्ष हीरे वैश्विक उत्पादन का 0.1 प्रतिशत से भी कम रह गए हैं, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

2026 में भारत की अध्यक्षता से क्या बदल सकता है?

2026 में अध्यक्ष बनने के बाद भारत का फोकस किम्बर्ली प्रोसेस को और आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर रहेगा। भारत शासन और नियमों के सख्त अनुपालन के साथ-साथ डिजिटल सर्टिफिकेशन और हीरों की ट्रेसबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा। डेटा आधारित निगरानी तंत्र के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हीरों की सप्लाई चेन में किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सके।

इसके साथ ही भारत उपभोक्ताओं के बीच संघर्ष-रहित हीरों को लेकर भरोसा और मजबूत करने पर जोर देगा। भारत यह भी प्रयास करेगा कि किम्बर्ली प्रोसेस को अधिक समावेशी बहुपक्षीय मंच बनाया जाए, जहाँ सभी प्रतिभागियों और पर्यवेक्षकों की आवाज सुनी जाए और निर्णय प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बने।

वैश्विक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की परीक्षा

भारत की अध्यक्षता ऐसे दौर में आने वाली है, जब वैश्विक हीरा व्यापार कई संवेदनशील मुद्दों से घिरा हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी हीरों पर G7 और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन श्रम और पर्यावरणीय नुकसान जैसे मुद्दों ने किम्बर्ली प्रोसेस की भूमिका को और जटिल बना दिया है।

रूसी कच्चे हीरे वैश्विक आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि उनकी कटिंग-पॉलिशिंग का बड़ा केंद्र भारत है। ऐसे में भारत से अपेक्षा की जा रही है कि वह संतुलित और निष्पक्ष नेतृत्व के जरिए नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करे और किम्बर्ली प्रोसेस की साख को बनाए रखे।

भारत का किम्बर्ली प्रोसेस का अध्यक्ष बनना केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नियम बनाने और दिशा तय करने की स्थिति में है। 2026 में भारत की भूमिका यह तय करेगी कि आने वाले समय में हीरा उद्योग कितना पारदर्शी, नैतिक और भरोसेमंद बनता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजरें भारत के नेतृत्व पर टिकी होंगी।

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