डोनाल्ड ट्रंप का “अहंकार” और मोदी की नज़र में भारत की 140 करोड़ जनता का आत्मसम्मान

सुभाष चन्द्र

टैरिफ के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तलवार भले ही लटकी हुई है ट्रंप के ऊपर लेकिन अभी Mr Tariff पर कोई असर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 14 जनवरी को आना था लेकिन टाल दिया गया कोई नई तारीख़ भी नहीं दी है कोर्ट ने जिसमें 9 में से 6 जज  ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी द्वारा अनुमोदित हैं और 3 का अनुमोदन Democrats ने किया था और शायद इसलिए ही सुप्रीम कोर्ट ने फैसला स्थगित कर दिया यह भी हो सकता है ट्रंप ने दबाव डाल कर करा दिया हो 

ट्रंप सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर चिंता में तो है इसलिए  ट्रंप ने 12 जनवरी को कहा कि- 

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“अगर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाता है कि अमेरिका को इतना ज्यादा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, तो हमारे देश की हालत बहुत खराब हो जाएगी; 

सरकार को पहले से वसूले गए पैसे वापस करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी; टैरिफ चुकाते-चुकाते एक बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी और व्यापक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए इसकी लागत सैकड़ों अरब डॉलर या यहां तक कि खरबों डॉलर तक पहुंच सकती है;

हो सकता है हमारे पक्ष में फैसला नहीं आए, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो यह इतनी बड़ी रकम होगी कि यह पता लगाने में कई साल लग जाएंगे कि हमें कब, कहां और किसे कितना भुगतान करना पड़ेगा”

एक तरफ यह भय भी है तो दूसरी तरफ U.S. Senators  Lindsey Graham (Republican) and Richard Blumenthal (Democrat) ने जनवरी के पहले सप्ताह में रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन पर 500% टैरिफ लगाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में बिल पेश किया है और Lindsey Graham ने यह बात ट्रंप के सामने भी कही लेकिन ट्रंप ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जैसे मौन स्वीकृति दे रहे हैं

लेकिन भारत की ओमान और नूज़ीलैण्ड के साथ हुई ट्रेड डील और EU के साथ ट्रेड डील को अंतिम चरण तक लेजाने के लिए 8-9 जनवरी की बातचीत को देखते हुए अमेरिका के भारत में नए राजदूत Sergio Gor ने 14 जनवरी को कार्यभार संभालने से पहले ही दिल्ली में घोषण की कि अमेरिका और भारत के बीच रुकी हुई ट्रेड डील पर अगले दिन से फिर बातचीत शुरू होगी और वह बातचीत शुरू भी हो गई है लेकिन कृषि को भारत इस डील से दूर ही रखेगा जैसा वह अन्य देशों के साथ कर रहा है

ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीद और उसे लेकर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा कर अपने अहंकार की दीवार खड़ी कर दी जो इस बात से साफ इंगित होती है कि ट्रेड डील ट्रंप ने केवल इसलिए नहीं होने दी कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फ़ोन नहीं किया। एक तरफ ट्रंप ने अपना यह अहंकार आगे रखा तो दूसरी मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान के लिए झुकने से मना कर दिया कुछ मूर्ख लोग मोदी के लिए भारत में कह रहे हैं कि वह ममता से डर गए। ऐसे लोग सच में मूर्ख ही नहीं अंधे और अज्ञानी भी हैं जो समझ नहीं सकते कि जो मोदी ट्रंप जैसे व्यक्ति से नहीं डरे वो ममता से क्या डरेंगे

कल CNN का सर्वे प्रकाशित हुआ है जिसमें कहा गया है कि 58% लोगों का मानना है कि ट्रंप अपने पहले साल में असफल साबित हुए; 55% लोगों ने कहा कि ट्रंप की नीतियों ने आर्थिक हालात बहुत ख़राब किए हैं; 64% को लगता है महंगाई को काबू नहीं रख पाए ट्रंप; केवल 36% सोचते हैं कि ट्रंप की प्राथमिकताएं सही हैं और केवल 32% सोचते हैं कि ट्रंप को आम अमेरिकन की रोजाना के जीवन से कुछ सरोकार है

ट्रंप के बचपने की हद कर दी वेनेजुएला की Maria Corina Machado से उसका नोबेल प्राइज खुद लेकर कहा कि यह अवार्ड मुझे मिला है इस पर नोबेल प्राइज समिति को कहना पड़ा है कि नोबेल प्राइज किसी के पास भी हो, वह विजेता का ही माना जाएगा नाकि उसका जिसके Possession में है। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे कोई बच्चा किसी खिलौने को लेने के लिए जिद पकड़ चाहे वह खिलौना किसी का भी हो

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