फतवा मतलब समानांतर संविधान, जो शरिया को संविधान से ऊपर माने; उसके लिए देश में जगह नहीं होनी चाहिए; नुसरत भरूचा बनी निशाना

सुभाष चन्द्र

एक समय था जब मुसलमान फतवे को इस्लामिक फरमान समझता था और आज भी समझता है। लेकिन जब से exMuslims की संख्या बढ़नी शुरू हुई है कट्टरपंथियों पर ये ग्रुप लगाम लगाने का प्रयास कर रहा है। 

नायिका नुसरत भरुचा द्वारा महाकाल मन्दिर जाना कट्टरपंथियों के दामन में ऐसी आग लगी कि फतवा दे डाला। टीवी परिचर्चा में exMuslim महिलाओं ने फतवे की धज्जियाँ ही उड़ा दी। उन्होंने मोहम्मद शहाबुद्दीन बरेलवी से पूछा कि नुसरत के खिलाफ फतवा देकर क्या महिलाओं को दबाने की कोशिश कर रहे हो? जब सलमान खान गणेशमहोत्सव के दिनों में जब घर में गणेश जी मूर्ति स्थापित करते हैं, शाहरुख़ खान, आमिर खान जब मन्दिर जाते हैं माथे पर टीका लगवा जाता है तब फतवा क्यों नहीं देते? क्या महिलाओं को गुलाम बनाए रखने के लिए महिलाओं के खिलाफ फतवे देने वाले तुम कौन? जितनी पाबंदियां तुम लोग महिलाओं पर लगाते हो मर्दों पर क्यों नहीं? आदि आदि           

AIMJ (All India Muslim Jamaat) के अध्यक्ष मोहम्मद शहाबुद्दीन बरेलवी ने फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा के महाकाल मंदिर में जाने पर गर्मी खाई है। फ़तवा तो नहीं दिया लेकिन जो नुसरत के खिलाफ बोला, वह किसी फतवे से कम भी नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर में दर्शन करना शरीयत की नज़र में गुनाह है, वह इस्लाम के खिलाफ है और अब नुसरत को कलमा पढ़ना चाहिए

दो दिन पहले मौलाना नए वर्ष के जश्न मनाने को भी “नाजायज” कह रहे थे

इस्लाम के जानने वाले एक मौलाना से नाज़िया इलाही खान ने एक टीवी शो में पूछा कि “हमारे प्यारे नबी का खतना कब हुआ था”। नाज़िया पूछती रही मगर वह उत्तर नहीं दे सका। ऐसे मौलाना कमजोर पर अपनी ताकत दिखाते हैं

ये लोग कभी इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ फतवा जारी क्यों नहीं करते और कभी फिलिस्तीन की जय बोलने वालों और पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने के खिलाफ फ़तवा क्यों नहीं करते

लेखक 
चर्चित YouTuber 
फतवा/शरिया एक तरह समानांतर संविधान चलाना है और जो भी व्यक्ति संविधान से ऊपर शरिया और और धर्म को समझे, तार्किक दृष्टि से उसके लिए देश में जगह नहीं होनी चाहिए। उसे किसी इस्लामिक देश में रहना चाहिए - ये शरिया के अनुसार चलने की हठधर्मिता इन मौलानाओं की Selective होती है। किसी पर भी थोप देते हैं और किसी की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखते। 

फारूक अब्दुल्ला कितनी ही बार मंदिर जा चुके हैं और महबूबा मुफ़्ती भी मंदिरों के चक्कर लगाती रही है। अभी हाल ही में उमर अब्दुल्ला खीर भवानी के मंदिर गए और पूजा की। बॉलीवुड की शाहरुख़ खान, सलमान खान और आमिर खान अनेक बार मंदिर गए हैं, सैफ अली खान की बेटी सारा अली भी मंदिर जाती है और इरफ़ान खान भी शंकर जी के मंदिर जाते थे। लेकिन फतवे की बात छोड़िए, किसी मौलाना ने जुबान तक नहीं खोली

लेकिन 2013 में Grand Mufti बशीरुद्दीन ने कश्मीर की एक नाबालिग मुस्लिम लड़की के खिलाफ गाना गाने को गैर इस्लामिक कहते हुए फतवे से उसे मजबूर कर दिया गाना छोड़ने के लिए। उसका  Kashmiri all-female rock band called Pragaash (meaning 'Light') था लेकिन एक शो के बाद कश्मीर के अनेक मौलाना उसके पीछे पड़ गए। अगर वह गाना जारी रखती तो आज बेहतरीन गायिका होती 

दूसरी तरफ बॉलीवुड पर मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों ने गीत लिखने, गाना गाने और अभिनय में कब्ज़ा किया हुआ है - अनेक ने तो अपने नाम ही बदल लिए लेकिन किसी पर कोई फतवा जारी नहीं हुआ - मंदिर जाने पर मुस्लिम के आपत्ति है लेकिन दिलीप कुमार, मीना कुमारी और अनेक कलाकारों को हिंदू नाम रखना जायज था इस्लाम के अनुसार - 

मुस्लिम होकर मूर्ति का विरोध करेंगे ,

लेकिन हिन्दू नाम रखकर मंदिर में रह लेंगे ;

हिन्दू नाम रखकर भीख माँगेंगे ;

हिन्दू नाम रखकर लव करेंगे ;

थूक-मूत के साथ खाना खिलाएंगे;

हिन्दू नाम रखकर फल, सब्जी बेचेंगे ;

हिन्दू नाम रखकर चोरी करेंगे ;

हिन्दू प्रतीक रखकर अपराध करेंगे!

लेकिन किसी पर किसी मौलाना को ऐतराज़ नहीं है। कोई फतवा नहीं जारी होता। किसी मुस्लिम पर फतवा जारी नहीं होता हिंदू त्योहारों पर पत्थरबाजी और दंगा करने पर; हिंदू लड़कियों को बहला फुसका कर लव जिहाद करने के लिए क्योंकि वह सब इस्लाम में जायज है। इस्लामिक देशों में मंदिर बन गए पर हमारे मौलाना अभी पिछड़े ही हैं

इन मौलानाओं को इस्लामिक तानाशाही पर चलते हुए यह समझना चाहिए कि आज लाखों मुसलमान इस्लाम छोड़ चुके हैं - ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ Gen Z खड़ा हो गया है  वहां की हजारों मस्जिदें वीरान हो चुकी है जहां कोई नमाज़ पढ़ने नहीं जाता इस्लामिक जगत अगर आग में झुलसेगा तो भारत का मुसलमान कैसे अछूता रहेगा?

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