ट्रंप खुद को तो अलग थलग करेंगे साथ अमेरिका भी वैश्विक स्तर पर शून्यता में खो जायेगा, बिल्कुल अकेला

सुभाष चन्द्र

डोनाल्ड ट्रंप का दंभ उन्हें विश्व में अलग थलग कर रहा है और साथ अमेरिका को भी वैश्विक स्तर पर अकेला कर देगा। ट्रंप 3 साल बाद चले जाएंगे लेकिन उसके बाद आने वाले राष्ट्रपतियों को वर्षों तक विश्व के विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाने के लिए पापड़ बेलने पड़ेंगे 

ट्रंप ने वेनेजुएला पर अपना आधिपत्य स्थापित करके स्वयं को एक तानाशाह साबित कर दिय, आगे और कर रहे हैं ग्रीन लैंड पर कब्ज़ा करने की तैयारी करके ग्रीन लैंड पर कब्जे के लिए ट्रंप का तर्क हो सकता है सही हो कि अगर अमेरिका उस पर कब्ज़ा नहीं करता तो रूस और चीन वहां खड़े होकर अमेरिका के लिए मुश्किल कर देंगे डेनमार्क जो केवल 60 लाख की आबादी वाला देश है वो अपने 57000 लोगों के ग्रीन लैंड को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहता और वहां की प्रधानमंत्री Mette Frederiksen ने सख्त लहजे में कहा है कि हम गोली से जवाब देंगे लेकिन छोटा सा मुल्क अमेरिका जैसी महाशक्ति से कैसे अपनी रक्षा कर पाएगा

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डेनमार्क यूरोप का हिस्सा है और अमेरिका के साथ साथ NATO का भी संस्थापक सदस्य है ट्रंप शुरू में NATO से अलग होने की इच्छा जता चुके है और ग्रीन लैंड पर कब्जे से NATO के टूटने की संभावना और बढ़ जाएगी जिससे लगता है ट्रंप को कोई आपत्ति नहीं है 

लेकिन अगर ट्रंप ग्रीन लैंड पर कब्ज़ा करते हैं तो NATO और EU के छोटे देशों को भी अपने अस्तित्व पर खतरा दिखाई देने लगेगा NATO के 32 सदस्य देशों में EU के 23 देश हैं। NATO  के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं जर्मनी (8.4 करोड़); तुर्की (8.77 करोड़); ब्रिटेन (6.95 करोड़); फ्रांस (6.66 करोड़) और इटली (5.91 करोड़) बाकि देश और भी छोटे देश है अगर 3 करोड़ की आबादी वाले वेनेजुएला पर ट्रंप कब्ज़ा कर सकता है तो यूरोप के छोटे देश भी ट्रंप के Soft Target हो सकते हैं क्योंकि ट्रंप किसी का दोस्त नहीं है, उसे बस अपना फायदा देखना है। वो कल को इज़रायल को भी छोड़ सकता है

ट्रंप को कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके एक्शन्स के बारे में कोई क्या बोलता है और वेनेजुएला पर कब्जे के बाद स्पष्ट हो गया है कि चीन और रूस कोई भी अमेरिका से कुछ बोलने की स्तिथि में नहीं है शायद इसलिए ही इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने कहा है कि लगता है अब पुतिन से बात करने का समय आ गया है और उनकी बात का समर्थन फ्रांस के राष्ट्रपति  Emmanuel Macron ने भी किया है यह बात उन्होंने शायद इसलिए कही है कि यूरोप के देशों को दोनों तरफ से खतरा है एक तरफ अमेरिका खा सकता है तो दूसरी तरफ रूस भी वही काम कर सकता है। इसलिए इसका मतलब यह भी निकलता है कि यूरोप के अग्रणी देश अब NATO छोड़ कर रूस के साथ Military Alliance बना सकते हैं

ट्रंप का अहंकार किस हद तक बढ़ा हुआ है जो उसने कहा है कि “NATO IS ZERO WITHOUT AMERICA. I DOUBT NATO WOULD BE THERE FOR US IF WE REALLY NEEDED THEM”. इसका मतलब साफ़ है ट्रंप अपनी तरफ से NATO को अर्थहीन समझ चुके हैं ट्रंप की बातों को गंभीरता से लेते हुए Giorgia Meloni ने प्रश्न खड़ा किया है कि  “Should we close American Military bases ? OR cut trade Relations? Should we Storm McDonalds? Don’t know what should we do”?

अमेरिका के एक नहीं कई NATO देशों में Military Bases हैं - अमेरिका के बेस हैं इन देशों में 

Germany, Italy, the UK, Spain, Belgium, Turkey, Poland, and Romania, Belgium, Greece, Portugal, Romania, Poland और Netherlands. इतना ही नहीं जिस डेनमार्क के ग्रीन लैंड पर कब्ज़ा करना चाहता है ट्रंप वह भी NATO सदस्य है

SCO शिखर वार्ता में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की तिकड़ी को देखकर ट्रंप ने कहा था कि शायद हमने भारत को चीन और रूस की तरफ जाने को मजबूर करके खो दिया है अब NATO देशों से टकराव कहीं उन्हें भी पुतिन के रूस के तरफ न धकेल दे और पुतिन के नेतृत्व में एक नया NATO न खड़ा हो जाए क्योंकि भू-राजनीति में कुछ भी हो सकता है

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