जोहरान ममदानी ने एजेंडा साफ़ कर दिया; हिंदू और यहूदी निशाने पर रहेंगे; राहुल गाण्डी अगली बार ममदानी का मेहमान होगा

सुभाष चन्द्र 

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नज़र आते हैं यानि कट्टरपंथी जोहरान ममदानी अभी मेयर ही बना है और अपनी जहरीली सोंच सामने आ गयी जो अमेरिका के लिए खतरे की घंटी भी है। दूसरे, भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण और गंगा-जमुनी तहजीब का ढोल पीट   रहे हिन्दुओं को अपनी आंखें खोलनी चाहिए। जब मुसलमान बीजेपी को हराने एकजुट होकर बीजेपी विरोधियों को वोट करता है फिर महामूर्ख हिन्दू मुस्लिम तुष्टिकरण और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे पाखंडी नारे लगाने वालों के खिलाफ एकजुट होकर बीजेपी को वोट क्यों नहीं करता?    

जोहरान ममदानी एक हिंदू महिला और मुस्लिम पिता का पुत्र है जो नेहरू की “सेकुलर” नीतियों का समर्थन करता है लेकिन जब शपथ लेने का समय आया तो गंगा जमुना तहज़ीब याद नहीं आई और माँ के धर्म को भूल कर केवल पिता का धर्म याद रहा और एक नहीं तीन कुरानों की शपथ ली, अपने दादा, दादी के कुरान की और 18वीं सदी के मिनी कुरान की जहां तीन कुरान की शपथ ले रहा था तो माँ के हिंदू धर्म के नाम पर गीता की भी शपथ ले सकता था हो सकता है माँ अब हिंदू रही ही न हो जब कट्टर मुस्लिम पति और बेटा सामने हो तो हिंदुत्व को तो भूल जाना ही उचित समझा होगा मीरा नायर ने। 

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
ममदानी से अपेक्षा नहीं की जा सकती थी कि वो एक मुसलमान होने के नाते बाइबल पर हाथ रख कर शपथ ग्रहण करता और इसलिए कुरान पर हाथ रख कर शपथ लेना कुछ गलत नहीं था, लेकिन जो आचरण मुस्लिमों का यहूदियों और हिंदुओं के लिए, उसके अनुसार ही उसने कदम उठाने शुरू कर दिए यहूदियों के पक्ष में उसके पूर्ववर्ती मेयर के दिए गए आदेशों को ममदानी ने पहले ही दिन रद्द कर दिया और भारत के खालिद उमर के नाम 4 लाइन के पत्र में उसके लिए हमदर्दी जता कर उसने भारत में मुस्लिम Gen Z को इशारा कर दिया कि हरकत में आ सकते हो

ममदानी ने एक पुराने से कागज पर (जो हमारे यहां बच्चे स्कूल में उपयोग करते हैं) लिखा -

“Dear Umar, I think of your words on bitterness often, and the importance of not letting it consume one’s self. It was a pleasure to meet your parents, we all are thinking of you”

ममदानी दिल्ली दंगों के लिए कोर्ट के निर्णय से पहले खालिद उमर को निर्दोष कह गया एक तरह, जिसका मतलब साफ़ निकलता है कि वह भारत के मुसलमानों को भड़का कर दंगे कराना चाहता है और यही लक्ष्य सोरोस और राहुल गांधी का है ममदानी ने ही नहीं अमेरिका के 8 डेमोक्रैट सांसदों ने भी मिलकर भारतीय राजदूत को पत्र लिख कर खालिद उमर को जमानत देकर निष्पक्ष ट्रायल की मांग की है ऐसा कहकर ये लोग हमारे न्याय तंत्र पर उंगली उठा रहे हैं ऐसा करने के लिए भी उनको कपिल सिब्बल ने सलाह दी होगी मेरी नज़र में जब डेमोक्रेट्स का चुनाव चिन्ह ही “DONKEY” है तो उसके ही अनुसार वे आचरण कर रहे हैं और Democratic Party में भारत विरोधी भारतीय मूल के नेताओं की भरमार है ऐसे गधे भारतीय राजनीति में भी बेशुमार हैं

ममदानी की नफरत भारत से नई बात नहीं है वो मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी कहता है, कश्मीर पर भारत के रुख की निंदा करता है, भगवान राम और हिंदू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर चुका है

आगे आगे देखते है क्या होता है? ममदानी के रहते न्यूयॉर्क में हिंदू और यहूदियों के लिए खतरा बढ़ सकता है जो पूरे अमेरिका में फ़ैल सकता है और मुसलमानों के दम पर अगले राष्ट्रपति चुनाव में ममदानी Democratic Party का उम्मीदवार भी हो सकता है और तब गजवा-ए-अमेरिका शुरू होगा

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