जो मोदी के नहीं काम का, वो अर्णब किस काम का; रिपब्लिक इंडिया ग्रुप के चैनलों का बहिष्कार करें?

सुभाष चन्द्र

पिछले कुछ दिनों से मुझे लग रहा था कि अर्णब गोस्वामी के चैनलों के सुर मोदी सरकार के लिए कुछ बिगड़ रहे हैं जैसे मोदी को सीधे चुनौती दे रहे है। एक इंटरव्यू में उसको पूछा भी गया तो उसने मना भी नहीं किया

एक यूट्यूब चैनल पर सुना कि अर्नब ने मोदी/शाह से पंगा ले लिया है और उसके चैनलों ने अरावली हिल्स और कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को दबा कर उछाल कर सारा दोष मोदी सरकार के मत्थे मढ़ दिया। जब सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स पर अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और सेंगर की जमानत भी रद्द कर दी तो अर्नब के चैनल्स ने अपनी पीठ थपथपा दी कि हमने मामले उठाए, तब ही ये जीत मिली

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चर्चित YouTuber 
मोदी ने अर्नब को पिछले डेढ़ साल से कोई इंटरव्यू नहीं दिया और अमित शाह ने शायद ही कभी कोई इंटरव्यू दिया है। मोदी-शाह की जोड़ी से सीधा टकराव ले लिया जिसकी वजह तो अर्नब ही जाने लेकिन उसे अहंकार तो हो गया कि मोदी की सरकार बनने में उसका योगदान रहा है। मैं बहुत दिनों से इसका चैनल रिपब्लिक भारत देख रहा हूँ क्योंकि ऐसा लगा कि यह एक राष्ट्रवादी हिंदुत्व के साथ खड़ा हुआ चैनल है। 

लेकिन अर्नब को असली समस्या शायद तब हुई जब पुतिन के दिसंबर में भारत आने पर उसका इंटरव्यू आज तक की अंजना ओम कश्यप और इंडिया टुडे ग्रुप के ही गीता मोहन और गौरव सावंत ने ले लिया। यह वजह कम नहीं है अर्नब के पलटवार के लिए क्योंकि आज तक वह चैनल है जिसकी TRP को लेकर रिपब्लिक मज़ाक उड़ाता है कि हम से बहुत पीछे है “तक”

क्या चाहता है अर्णब गोस्वामी, मोदी को हटा कर क्या अराजक तत्वों को सरकार में बैठा देखना चाहता है? उसके मीडिया हाउस में कुछ तो गड़बड़ चल रही है। प्रदीप भंडारी छोड़ गया था। जब भंडारी गिरफ्तार हुआ तो अर्नब ने उसे अकेला छोड़ दिया। सईद सुहैल News-18 में चले गए और सुचेरिता कुकरेती NDTV में चली गई। ये तीनो दिग्गज थे लेकिन अर्नब इन्हे साथ रखने में विफल रहा। जाहिर है कुछ अंदरूनी कलह है उसके मीडिया हाउस में

अर्नब को पता होना चाहिए कि जब उसे शरद पवार ने साजिश के तहत जेल में डाला था तब जनता ने उसे भरपूर समर्थन दिया था लेकिन मोदी का विरोध अगर वो करेगा तो वही दर्शक उसका साथ नहीं देंगे। वक्त का क्या पता कि कल को अर्नब को भी रविश कुमार पुण्य प्रसून वाजपेयी, अजित अंजुम अंजुम, अभिसार शर्मा की तरह अपना यूट्यूब चैनल चलाना पड़ जाए और पता चला उसका चैनल टाटा संस ले गए क्योंकि अंबानी के पास न्यूज़ 18 है और अडानी के पास NDTV

अरावली हिल्स से मोदी सरकार का कोई लेना देना नहीं था क्योंकि अरावली का 80% राजस्थान में है जहां लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही है। अरावली पर अर्नब ने हाय तौबा मचाते हुए यह भी नहीं समझा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 5 साल तक निर्णय नहीं किया तो वो खनन से जुड़े 3 लाख कामगार भूखे मर जाएंगे

सेंगर की जमानत को मुद्दा बना दिया अर्नब के चैनलों ने लेकिन बिशप मुलक्कल के केरल चर्च की नन के लगातार रेप के मामले को उठाया तक नहीं और उसके बरी होने को मुद्दा नहीं बनाया अर्नब गोस्वामी ने Father Edwin Pigarez की दोहरी उम्र कैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट से निलंबित करने के खिलाफ भी आवाज़ नहीं उठाई जिसने अनेक नाबालिग लड़कियों का बलात्कार किया लेकिन अर्नब सेंगर के पूर्व में भाजपा में होने की वजह से Selective हो गया और इसलिए सेंगर की बेटी को चैनल पर नहीं लाता

अर्णब की TRP में अधिकांश मोदी समर्थकों का हिस्सा है जो मोदी से टकराव के चलते उसके चैनलों का बहिष्कार शुरू कर देंगे, कम से कम मैं तो कर ही दूंगा क्योंकि जो अर्णब मोदी का नहीं वो हमारे भी किसी काम का नहीं

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