जब गली के आवारा कुत्ते भौंकना बंद नहीं करते तो कभी कभी उन्हें गोली भी मार दी जाती है क्योंकि पागल कुत्ता अत्यंत खतरनाक हो सकता है। आज के राजनीतिक वातावरण में भी बहुत से कुत्ते भौंकना बंद करने का नाम ही नहीं ले रहे है और क्योंकि वो राजनीतिक कुत्ते हैं, इसलिए उन पर अब बर्बरता से कार्रवाई करने का समय आ गया है।
पहले श्रीलंका में हंगामा हुआ, कांग्रेस और अन्य विपक्ष के लोग भौंकने लगे कि अब मोदी के घर में लोगों को घुसना चाहिए। फिर बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ तो भारत में भी तख्तापलट की बातें करने लगे। उसके बाद नेपाल में
Gen Z आंदोलन से सरकार गिराई गई तो भारत में भी शोर मचाने लगे कि अब भारत का नंबर है और राहुल गांधी ने तो खुल कर कहा कि भारत का Gen Z अब खामोश नहीं रहेगा, उसको भी उठना चाहिए।
वेनेजुएला के बाद तो इन लोगों में अलग ही आग लगी हुई है कि ट्रंप किसी तरह मोदी को उठा कर ले जाए। इन हरामखोर की औलादों को पता नहीं है कि मादुरो और मोदी में कोई मुकाबला ही नहीं है। वो निकम्मा बुढऊ पृथ्वीराज राज चव्हाण बक रहा है “क्या ट्रंप हमारे प्रधानमंत्री मोदी को किडनैप करके ले जाएंगे, बस अब इतना देखना रह गया है”। पिछले महीने ये और संजय राउत दोनों 19 दिसंबर को मोदी की कुर्सी खाली करवा रहे थे।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
एक चैनल पर दो पत्रकार भी तबियत से भौंक रहे थे। पहली थी Journalist Neelu Vyas is currently associated with The Federal and HW News English. She also hosts her own YouTube channel called Jana Gana Mana 24/7 और दूसरा था journalist Mohsin Raza Khan (often listed as Mohsin Raza KHAN) has been associated with several media groups, including Such TV, 92 News HD(पाकिस्तान), ARY News, Deutsche Welle (DW), AP, AFP, and recently worked as an Executive Director at SuchTV (as of late 2024/early 2025), bringing extensive experience in Pakistani and international news.
ये दोनों कह रहे थे कि अब भारत पर भी अमेरिका को कब्ज़ा कर लेना चाहिए और मोदी को उठा कर ले जाना चाहिए।
5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने खालिद उमर और शरजील इमाम की जमानत याचिका ख़ारिज की और अगले दिन JNU के वामपंथी कुत्ते भौंकने लगे। “मोदी शाह तेरी कब्र खुदेगी, JNU की छाती पर”। क्या तमाशा हो गया? ये तो मोदी शाह के साथ साथ, सुप्रीम कोर्ट भी गाली देना हो गया और सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। ये गुंडे कैसे मांग कर सकते हैं दोनों की रिहाई की जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दे दिया। मोदी शाह की कब्र खोदेंगे, क्या बाप का राज है?
JNU ने FIR कराई है। कोई फायदा नहीं। इन लोगों को और ऊपर जो भी नाम लिए हैं, उन्हें उठा कर BNS के धारा 150 में अंदर किया जाए और साथ में UAPA भी लगा कर summary trial एक महीने में पूरा किया जाना चाहिए वरना साधारण तरीके से तो निकलने के रास्ते निकाल लेते हैं जैसे 2016 के JNU की नारेबाजी के मामलों का अभी तक ट्रायल कोर्ट में शुरू नहीं हुआ है। ये गुंडे पहले तो मामला लटका देते है कि वीडियो में हमारी आवाज़ नहीं है फिर उसकी फोरेंसिक जांच होती है और मामला लटकता जाता है। अभिषेक मनु सिंघवी के बिस्तर से जज बनाने वाली वीडियो की तो कोई फॉरेंसिक जांच नहीं हुई और उसका मामला बंद कर दिया हाई कोर्ट ने।
विपक्ष कहता है कि मोदी ने अघोषित इमरजेंसी लगा रखी है, तो अब अघोषित इमरजेंसी लगा ही देनी चाहिए। जहां ऐसे कुत्ते भौंकते दिखाई दें तुरंत पकड़ कर अंदर कर देना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को सख्त लहजे में समझा देना चाहिए कि बस बहुत हो गया “अभिव्यक्ति की स्वत्रंत्रता” का नंगा नाच। अब कोई भी कोर्ट इस मामले में दखल न दे वरना सबके काले कारनामे जगजाहिर कर दिए जाएंगे। ये सारे जज न्यायपालिका के हमाम में नंगे ही मिलेंगे।

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