महाराष्ट्र निकायों के चुनावों में बुरी तरह पिछड़ने के बाद भी उद्धव और राज ठाकरे ने कोई सबक नहीं सीखा। उसके पहले कई महीने तक हिंदी बोलने वालों को सड़कों पर उद्धव (शिवसेना) और मनसे के लोगों ने जमकर पीटा। आज फिर राज ठाकरे कह रहा है कि महाराष्ट्र को यू पी और बिहार जैसा बनाया जा रहा है जिसका मतलब साफ़ है यू पी और बिहार वालों को BMC अगर जीते तो फिर खदेड़ा जाएगा जैसे कोरोना काल में हुआ था।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
-पहले बीजेपी ने हमारा दुरुपयोग किया और फिर कांग्रेस ने भी किया - उद्धव ठाकरे;
-नगर निकाय चुनावों में फडणवीस, शिंदे और अजित पवार ने 15 हजार करोड़ रुपए पानी की तरह बहा कर चुनाव जीता - संजय राउत;
-2019 से पहले ही कांग्रेस डूब रही थी, हमने उन्हें अपनी नाव में जगह दी और उन्हें बचाया; जैसे ही वे संभले, उन्होंने हमारी ही नाव छीन ली और भाग गए - और राहुल की यात्रा से भाजपा का वोटर जाग गया, कांग्रेस का नहीं - आनंद दुबे;
-मुंबई में जय श्री राम का नारा नहीं चलेगा, यहां जय महाराष्ट्र, जय भवानी और जय शिवाजी का नारा चलेगा - संजय राउत;
-मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक में उद्धव ने कहा, 1992 के दंगों में शामिल होना गलती थी, माफ़ करो;
- शिवसेना के अख़बार “सामना” में हाल ही में उद्धव ठाकरे ने लिखा “हिंदू संगठन, हिंदू तालिबान” हैं।
यह सब बातें प्रमाणित करती है कि उद्धव ठाकरे अपनी जड़ों से अलग हो चुका है। 1992 के राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बनना बालासाहेब ठाकरे का निर्णय था। इन्होने ताल ठोक कर कहा था कि अगर बाबरी मस्जिद को शिव सैनिकों ने गिराया है वो मुझे उन पर गर्व है। आज उद्धव अपने पिता के कार्यों के लिए कैसे माफ़ी मांग सकता है मुस्लिम नेताओं से जिनमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सज्जाद नोमानी और अन्य शामिल थे।
उद्धव और MVA को चुनावों में मुस्लिम फैक्टर ने कोई मदद न मिलने के बाद भी उद्धव अपने सामने एक मुस्लिम महिला द्वारा रामायण का मजाक उड़ाते हुए सुनता रहा। ऐसा लगता है उद्धव और संजय राउत ने पार्टी को कांग्रेस की तरह मुस्लिमों की पार्टी बना दिया है। और इसलिए आज जय श्री राम का नारा भी त्याग दिया। एक बार सज्जाद नोमानी से जय भवानी और जय शिवाजी का नारा लगवा कर दिखाओ संजय राउत।
उद्धव कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस ने शिवसेना का दुरुपयोग किया लेकिन सच्चाई यह है कि उद्धव अपने को भाजपा का बड़ा भाई मानता था और जैसे बालासाहेब से मिलने मातोश्री में अटल जी और अडवाणी जी जाते थे, वैसे ही उद्धव चाहते थे कि मोदी और अमित शाह भी उसे मिलने मातोश्री आया करें। भाजपा के साथ सरकार में रह कर भी शिवसेना ही आए दिन गठबंधन में कलेश करती थी लेकिन जब पिछले BMC चुनाव भाजपा शिवसेना के बराबर सीट लेकर जीती, तब उद्धव का नशा उतरने की बजाय, उसने भाजपा से पूरी तरह नाता तोड़ लिया।
कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे) आज उद्धव को भाव नहीं देती। तहसीन पूनावाला कहता है कि “संजय राउत जी चुनावों में EVM हैक नहीं हुई, आपके कानों के बीच का खोखलापन हैक हुआ है। इस आदमी और इसके अहंकार ने शिवसेना (उद्धव) को Rout कर दिया। कितनी बुरी तरह गिरी”।
इसी तरह शिंदे शिवसेना के संजय निरुपम ने कहा “ठाकरे बंधुओं को खान-पठान चलता है लेकिन उन्हें हम “भैय्या” लोगों से नफरत है। आज अगर शिवसेना प्रमुख होते, तो पूछते क्या दोनों ने खतना करा लिया”।
उद्धव/राज ठाकरे और संजय राउत जैसे नेताओं का मुस्लिम प्रेम और उत्तर भारतीयों से नफरत ने उन्हें डुबोया है और ये आगे भी डूबेंगे।

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