ममता बनर्जी की उद्दंड और हैवानियत की राजनीति; IPAC ममता के भ्रष्टाचार का जीता जागता स्मारक है

सुभाष चन्द्र

ममता बनर्जी के IPAC ऑफिस में ED की रेड के वक्त आचरण को देख कर बहुत से लोग कहेंगे कि केंद्र को बंगाल में अब राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए एक वरिष्ठ पत्रकार अपने यूट्यूब चैनल पर आज मोदी सरकार को चुनौती दे रहे थे कि अब भी उसकी सरकार को बर्खास्त नहीं करेंगे क्या लेकिन थोड़ी ही देर में खुद ही बोले कि अगर बर्खास्त कर दिया गया तो ममता के खिलाफ सभी मुद्दे खत्म हो जाएंगे, बस एक ही ढोल पीटेगी कि मेरी सरकार भंग कर दी और जनता की सहानुभूति उसे आसानी से मिल जाएगी

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चर्चित YouTuber 
यही सत्य है। ममता हर बात पर केंद्र को उकसाती है कि किसी तरह मोदी उसकी सरकार को बर्खास्त कर दे क्योंकि उसे पता है कि उसके पास 215 विधायकों का समर्थन होते हुए राष्ट्रपति शासन लगाना आसान नहीं है कल को सुप्रीम कोर्ट ही पूछेगा कि जिस पार्टी के पास लगभग तीन चौथाई बहुमत है, उसे कैसे बर्खास्त कर सकते हो- कितना भी उत्पात मचाने पर भी संख्या बल देख कर कोर्ट उसका ही पक्ष लेगा

बंगाल में 2016 और 2021 में ममता और भाजपा को मिली सीट और वोट ये थी -

ममता 

2016 - 211 सीट (44.91%)

2021 -215 सीट (48.02 %)

भाजपा 

2016 - 03 सीट (10.16%)

2021 - 77 सीट (38.15%)

2011 से 2016 तक ममता के राज में आतंक की कोई कमी नहीं थी लेकिन फिर भी जनता ने भरपूर वोट दिया- 48% वोट कुछ कम नहीं होता इसमें सारे मुसलमान नहीं थे

ममता बनर्जी और उसके सभी साथी हुड़दंग मचाने में आगे रहते हैं। IPAC के ऑफिस में ED की रेड के समय घुसकर ED अधिकारियों से फाइलें और अन्य दस्तावेज़/लैपटॉप छीन कर भागना किसी छंटे हुए गुंडे की हरकत हो सकती है जो ममता ने की अब कह रही कि वो पार्टी अध्यक्ष के नाते गई थी CM के नाते नहीं तो क्या पार्टी अध्यक्ष को गुंडागर्दी करने का अधिकार है? हाई कोर्ट में उसके लोगों ने हंगामा कर दिया और ये न्यायपालिका को चुनौती है

ममता बनर्जी शिष्टाचार भूल कर अमित शाह और मोदी के खिलाफ बयानबाजी करती है, उसने खुद विधानसभा में नारे लगाए थे “मोदी चोर, बीजेपी चोर” जबकि उसके खुद के मंत्री जेल में हैं भ्रष्टाचार के आरोप में -

और अमित शाह के लिए कहा कि 

“गृह मंत्री खतरनाक है, तुम उसकी आंखों में नहीं देख सकते,

उसकी एक आंख में दुर्योधन और दूसरी में दुशासन है,

हमारी कृपा से अमित शाह होटल में सलामत हैं हम चाहे तो शाह को होटल से न निकलने दें”

मतलब एक चीफ मिनिस्टर की इतनी हिम्मत हो सकती है कि केंद्र के गृह मंत्री को होटल में कैद कर सकती है ये राजनीति किसी सड़कछाप राजनीति से कम नहीं है

लेकिन ममता के लिए मुस्लिम वोट प्राथमिकता हैं बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के नरसंहार पर Hindu Solidarity के लिए कोलकाता में 5 लाख हिंदुओं के गीता पाठ पर ममता ने कहा कि “ गीता पाठ के लिए पब्लिक मीटिंग क्यों,गीता घर में पढ़ी जा सकती है”

गीता तो घर में पढ़नी चाहिए लेकिन नमाज़ सड़कों पर पढ़ना जरूरी है यही उसका मुस्लिम प्रेम है और हिंदुओं से नफरत -

ममता कहती है -

“धर्म का मतलब सहारा देना 

धर्म का मतलब है पवित्रता, शांति 

धर्म का मतलब भेदभाव, हिंसा नहीं 

धर्म का मतलब बंटवारा नहीं” 

मगर ममता किस धर्म की बात कर रही है शायद वो हिंदू धर्म के लिए कह रही है क्योंकि ये सिद्धांत को हिंदुओं के ही हैं लेकिन वह तो उस मज़हब की वकालत करती है जो इन बातों में यकीन नहीं करता पवित्रता, हिंसा की जगह सर तन से जुदा और गाय समेत अन्य जानवरों की बलि की बात करता है

ममता बनर्जी को चुनाव में शराफत से मात देना संभव नहीं है वो खुद CPM के गुंडा राज को गुंडागर्दी से ख़त्म करके सत्ता में आई थी और उसे हटाने के लिए भी गुंडागर्दी का सहारा लेना पड़ेगा जनता पर पूर्ण भरोसा नहीं किया जा सकता 

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