तुर्कमान गेट की मस्जिद के बाहर पुलिस वालों पर एक बार फिर हमला; पुलिस वाले इंसान हैं, केवल पत्थर खाने के लिए नहीं बने; पत्थरबाजों पर पुलिस को Shoot at Sight के आदेश मिलने चाहिये

सुभाष चन्द्र

दिल्ली हाई कोर्ट के आर्डर के अनुसार MCD ने तुर्कमान गेट की फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आस पास के इलाके के अतिक्रमण को हटा कर लगभग 38000 वर्ग फुट भूमि खाली कराई लेकिन एक सुनियोजित तरीके से मस्जिद तोड़े जाने की अफवाह फैला कर करीब 4-5 सौ मुस्लिमों की भीड़ जुटाई गई जिसने पुलिस बल पर पत्थरबाजी की और कई पुलिस कर्मियों को गंभीर चोटें पहुंची

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दिल्ली नगर निगम की कार्रवाई के बाद सेकुलर भांड उसके विरोध में विधवा विलाप करने लगे। आरोप लगाए गए कि बिना किसी नोटिस दिए निगम ने तोड़फोड़ की जबकि हाई कोर्ट में कई महीने से मामला चल रहा था और मस्जिद कमिटी भी उसमे पक्षधर थी सभी की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने निर्णय दिया, तो फिर बिना नोटिस तो कार्रवाई का मतलब ही नहीं था। 

इतनी भारी भीड़ ने पुलिस पर हमला किया लेकिन कुछ मीडिया में उनकी संख्या मात्र 25-30 बताई गई है केवल इतने लोग पुलिस पर हमला करने की हिम्मत नहीं कर सकते निगम की कार्रवाई से पहले जामा मस्जिद के इमाम ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिख कर कहा कि निगम को पुलिस की मदद न दी जाए और ऐसा हुआ तो निगम तोड़फोड़ नहीं कर सकेगा मतलब साफ था कि पुलिस को मत आने दो और मुस्लिम अपने आप संभाल लेंगे जिसका मतलब यह भी था कि फिर कोई निगम कर्मचारी जिंदा ही नहीं बचेगा

कैसी कैसी दलील दी जाती है मुस्लिम पक्ष की तरफ से बच्चे तो नादान हैं जिन्होंने पत्थरबाजी की, मतलब पत्थरबाजी भी करेंगे और बचने के लिए विक्टिम कार्ड खेलते हैं अरे नादान बच्चों में इतनी समझ कैसे आती है कि पुलिस पर पत्थरबाजी कर देते हैं। और कहा जा रहा है कि यह पत्थरबाजी “Action का reaction” है और यह दलील अक्सर दी जाती है कौन से एक्शन का रिएक्शन पत्थरबाजी से किया गया? क्या हाई कोर्ट के आर्डर पर Reaction दिया मुस्लिमों ने?

पत्थरबाजी करने वालों के अलावा, पत्थरबाजी के लिए समाजवादी पार्टी के सांसद नदवी जैसे माहौल तैयार करने वालों को भी जेल में डालना चाहिए

मुस्लिम समुदाय भूल जाता है कि अगर हिंदू पक्ष भी मुस्लिमों की शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी के एक्शन का रिएक्शन से जवाब देने लगे तो कैसा लगेगा? कौन सी ऐसी शोभायात्रा होती है जिस पर मुस्लिम पत्थरबाजी न करते हो? अगर सर तन से जुदा का रिएक्शन भी सर तन से जुदा से होने लगा तो कैसे लगेगा? अरशद मदनी 20 करोड़ का गाना गाते हैं तो क्या 100 करोड़ नहीं हैं दूसरी तरफ और क्या उन 100 करोड़ के साथ पुलिस, पैरामिलिटरी और जरूरत पड़ने पर सेना नहीं हो सकती?

एक नहीं अनेक जगह पर मुस्लिमों ने पुलिस पर हमले किए हैं। मीरा रोड में राम मंदिर शोभायात्रा, हल्द्वानी अवैध निर्माण पर कार्रवाई में, मेदिनीपुर मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस पर, संभल में कोर्ट के आदेश पर ASI सर्वे के दौरान और न जाने कितनी जगह पत्थरबाजी हुई है एक्शन का  रिएक्शन तो कश्मीर से हिंदुओं से की गई बर्बरता के बाद भी नहीं किया हिंदुओं ने तो क्या ऐसा करने का अधिकार केवल मुस्लिमों को है

पुलिस वाले भी इंसान हैं, उनके भी मानवाधिकार हैं और इसलिए पुलिसवालों पर निर्ममता से पत्थरबाजी सहन नहीं की जानी चाहिए ऐसे दंगाइयों के लिए Shoot at Sight के आदेश होने चाहिए दंगे रोकने का यह उत्तम तरीका है शराफत की भाषा दंगाइयों को समझ नहीं आती सुप्रीम कोर्ट ने 5 दंगाइयों को जमानत दी तो उन्होंने जश्न मनाया घर जा कर जैसे बरी हो गए

ऐसी भाषा उनके लिए नहीं है

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