यह बात ध्यान देने की है कि कांग्रेस का जन्म एक अंग्रेज़ के हाथों 28 दिसंबर, 1885 को हुआ और तकनीकी तौर पर पार्टी शुरू से ही अंग्रेज़ो की हाथ में रही जो आज भी है। अंग्रेजों द्वारा कांग्रेस स्थापित करने माँ उद्देश्य भारत सेवा नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से जनता को भटकाना था। वैसे इस पार्टी को 140 साल पुरानी पार्टी नहीं कह सकते क्योंकि 1969 में इंदिरा गांधी ने इसका विभाजन कर दिया था और अब ये केवल 56 साल पुरानी पार्टी कही जा सकती है। लेकिन अगर 140 साल पुरानी भी मान लिया जाए तो इसका पतन इस कदर हुआ कि 140 साल बाद इसे 140 करोड़ जनता ने 140 सांसद भी लोकसभा में नहीं भेजे हुए हैं।
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दूसरी तरफ 34 साल बंगाल में एकछत्र राज करने वाली CPM और CPI पूरी तरह लगभग समाप्त हो चली है। पहली लोकसभा में CPI के 16 सदस्य थे और अधिकतम सदस्य तीसरी लोकसभा में 29 थे लेकिन आज CPI के सदस्यों की संख्या मात्र 2 रह गई है। इसी तरह CPI के विभाजन के बाद CPM के 4th लोकसभा में 19 सदस्य थे और 14th लोकसभा में अधिकतम 43 सदस्य थे लेकिन आज वर्तमान लोकसभा में मात्र 4 सदस्य हैं।
वामपंथियों ने देश के इतिहास को नष्ट करके असली गद्दारी की जिसके लिए कांग्रेस पूरी तरह दोषी है क्योंकि नेहरू समय से ही वामपंथियों को शिक्षा क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा मान दिया गया और उन्होंने स्कूली शिक्षा को प्रदूषित कर भारत की पौध ही नष्ट कर दी।
एक तरफ वामपंथियों का रक्तरंजित काल देश को देखने को मिला तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने घोर सांप्रदायिक नीति से देश भर में हिंदू मुस्लिम दंगे करा कर RSS को बदनाम किया। कांग्रेस का लक्ष्य मुस्लिम तुष्टिकरण था और अब वह तुष्टिकरण, आतंकवाद और पाकिस्तान का साथ देते हुए देश विरोध के षड़यंत्र में परिवर्तित हो चुका है।
CPI/कांग्रेस से अलग RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई और वह विश्व का ऐसा संगठन है जो मात्र 5 स्वयंसेवकों से आरम्भ हुआ और 100 वर्ष से देश की सेवा में समर्पित आज ऐसा वट वृक्ष बन चुका है जिसमें कोई विभाजन नहीं हुआ। संघ का ध्येय भारत माता को परम वैभव पर ले जाने का रहा है लेकिन कांग्रेस और कम्युनिस्टों ने, जिसका आरंभ ही विदेशी सोच से हुआ, देश को अपना माना ही नहीं। एक बार नहीं तीन बार संघ को समाप्त करने के लिए उस पर कांग्रेस ने प्रतिबंध लगाए लेकिन हर बार कोर्ट ने उन्हें गैर कानूनी घोषित किया लेकिन संघ ने कभी कोई हिंसा नहीं की और अपना मार्ग नहीं छोड़ा।
संघ ने समाज के हर क्षेत्र में अपना योगदान दिया और अनेक संगठनों की स्थापना की चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र हो या मजदूर एकता के लिए काम करने का हो। संघ ने कभी अपने काम का प्रचार नहीं चाहा।
संघ ने सदा भारत भूमि को मातृभूमि माना जबकि कम्युनिस्टों के लिए तो भारत मातृभूमि हो ही नहीं सकती थी और कांग्रेस मुस्लिम प्रेम में इस कदर अंधी थी कि न तो खुद अपनी मातृभूमि माना और मुसलमानों को भी न मानने के लिए प्रेरित किया।
यह फर्क हैं 100 वर्ष और उससे ज्यादा आयु की तीन संस्थाओं में। कांग्रेस और कम्युनिस्ट ख़त्म हो रहे हैं लेकिन संघ अपने लक्ष्य की तरफ मजबूती से बढ़ रहा है।

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