रमना और चंद्रचूड़ एक तरह पगला गए थे राज द्रोह और देश द्रोह के कानून को ख़त्म करने के लिए। उनका कहना था कि वह अंग्रेजों का कानून था स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ और गांधी और तिलक के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। लेकिन ये दोनों महानुभाव भूल गए कि राजद्रोह तो किसी भी सरकार के खिलाफ बगावत हो सकती है और देश की संप्रभुता और एकता अखंडता को कभी भी चुनौती दी जा सकती है। गांधी को उस कानून में एक बार 6 साल की सजा हुई थी लेकिन वह 2 साल बाहर आ गए बीमारी की वजह से और नेहरू पर तो कभी वह कानून लगा ही नहीं।
आज के सन्दर्भ में राहुल गांधी, जनरल नरवणे और पेंगुइन हर किसी पर BNS की धारा 152 के तहत, अब 'राजद्रोह' के बजाय भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता (Sovereignty, Unity, and Integrity) को खतरे में डालने वाले कार्य के लिए देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो सकता है। में अपने कल के लेख में इन तीनों पर The Official Secrets Act (OSA), 1923 का उल्लंघन का आरोप लग सकता है क्योंकि शक की सुई इनके इर्द गिर्द घूमती है जनरल की पुस्तक लीक करने के लिए जो अभी तक सरकार के अनुसार छपी नहीं।
राहुल गांधी ने 2 फरवरी को किताब को लोकसभा में लहरा का उसके अंश पढ़ने की कोशिश की थी जबकि उसे सदन के नियमों का हवाला देते हुए स्पीकर ने पढ़ने से मना किया था। पेंगुइन का बयान गूगल पर कई दिन पहले आ गया था लेकिन कंपनी X पर कल 8 दिन बाद बोली, और जनरल नरवणे भी 8 दिन तक खामोश रहे - जब FIR दर्ज होने के बाद जांच तेज हो गई, तब ये डर से बाहर आए। क्योंकि यह तो जांच का विषय होगा कि किताब बिना प्रकाशित हुए किसने लीक की। राहुल गांधी ने वह पुस्तक संसद के बाहर The Wire के अनुसार 4 फरवरी को जनता को दिखाई थी। इसलिए वो संसद में अपने कृत्य के बचाव में बहाना नहीं कर सकता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
उसी दिन कांग्रेस की 8 महिलाओं ने घोर पाप किया जो प्रधानमंत्री मोदी को कलंकित करने के लिए। बड़ा घटिया और चरित्रहीनता का परिचय दिया उन 8 महिलाओं ने और उस पर सबने और प्रियंका वाड्रा ने तोहमत लगाई कि प्रधानमंत्री महिलाओं से डर कर नहीं आए। “नंग बड़े परमेश्वर से”। अपनी इज़्ज़त अपने हाथ होती है। कांग्रेस की महिलाएं अगर हिज़डों की तरह प्रधानमंत्री की सीट पर उन्हें घेर कर अपने कपड़े उतार लेती तो वह बेशर्मी देखने से तो बेहतर था कि ऐसी बदनाम गली में जाया ही न जाए। कांग्रेस की गिरावट की कोई सीमा नहीं है। उससे और फर्जी गांधी परिवार से कुछ भी उम्मीद की जा सकती है।
लेकिन राहुल गांधी कानून से बचने की कला जानता है और तभी उसके मुक़दमे 12 - 14 साल से चल रहे है जो ख़त्म ही नहीं होते। नरवणे और पेंगुइन को भी वकील लोग बता देंगे कैसे बचना है।
पुलिस जांच में शामिल ही नहीं होगा राहुल गांधी। पुलिस फिर हो सकता है कोर्ट में शिकायत दर्ज कर उसे जांच में शामिल होने की मांग करे। कोर्ट आदेश दे देगा लेकिन उसे लेकर वह हाई कोर्ट चला जायेगा। साल दो साल मामला हाई कोर्ट में लटक जाएगा। फिर सुप्रीम कोर्ट अगर हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ फैसला दे दिया तो सुप्रीम कोर्ट 6-6 महीने सुनवाई नहीं करेगा। हेराल्ड हाउस को खाली करने का मामला सुप्रीम कोर्ट ने 5 अप्रैल, 2019 को स्टे किया था और तब से अब तक 7 साल से मामला दबा हुआ है।
लेकिन अब मोदी/अमित शाह को राहुल गांधी और उसकी मंडली के लोगों पर कोई रहम नहीं बरतना चाहिए। अटल जी बहुत भारी गलती की उसे बोस्टन में छुड़ा कर जिसका सिला वह ऐसे दे रहा है। बेहतर होता बोस्टन की जेल में सड़ता रहता और अब अगर कोई ऐसा मौका आता है तो रगड़ देना चाहिए।

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