सुप्रीम कोर्ट ने अंततः जस्टिस स्वामीनाथन के निर्णय पर मुहर लगा दी; तमिलनाडु DMK सरकार का लक्ष्य सम्पूर्ण सनातन धर्म को समाप्त करना है जिसमें सभी हिंदू शामिल हैं

सुभाष चन्द्र

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने सोमवार 9 फरवरी, 2026 को मद्रास हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सिकंदर बादशाह बुलिया दरगाह को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने नेल्ली थोपू इलाके में मुस्लिमों को रोजाना नमाज पढ़ने पर रोक लगाते हुए सिर्फ रमजान और बकरीद के मौकों पर ही नमाज की इजाजत दी थी साथ ही दरगाह परिसर में जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई थी।


यह निर्णय सबसे पहले जस्टिस स्वामीनाथन की एकल पीठ ने एक दिसंबर, 2025 को दिया था जिसे हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने चुनौती दी थे अपील पर जस्टिस G. Jayachandran and K.K. Ramakrishnan की खंडपीठ ने जस्टिस स्वामीनाथन के फैसले को उचित ठहराया जस्टिस स्वामीनाथन के आदेश पर स्टालिन सरकार ने अमल नहीं किया और वह अवमानना का केस झेल रही है विपक्ष के नेताओं को जस्टिस स्वामीनाथन के हिंदुओं के पक्ष में दिए गए निर्णय ने पागल कर दिया और उन्होंने जस्टिस स्वामीनाथन के विरुद्ध महाभियोग की कार्रवाई शुरू कर दी जो अभी तक सफल नहीं हुई 

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महाभियोग चलाना तो आजकल एक फैशन हो गया - कपिल सिब्बल इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ हिंदुओं के पक्ष में बोलने के लिए महाभियोग ले आए, स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग, 10 दिन पहले ममता बनर्जी CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की बात कर रही थी और एक दिन पहले कांग्रेस और समाजवादी ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए

अंग्रेजों के समय में उनकी अदालतों ने भी मस्जिद स्थल को छोड़ कर पहाड़ी का बाकी हिंदुओं की संपत्ति बताई थी

कुछ वर्षों से मुस्लिम पक्ष ने पहाड़ी पर रोजाना नमाज, कुर्बानी और नाम बदलने की कोशिश की, जिसका हिंदू संगठनों ने विरोध किया मुस्लिमों ने कार्तिगई दीपम प्रज्ज्वलित करने पर रोक की मांग की और DMK सरकार ने मुस्लिमों का साथ देते हुए जस्टिस स्वामीनाथन के आदेश को हाई कोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी हाई कोर्ट में स्टालिन सरकार ने एक ही रोना रोया कि कार्तिगाई दीपम से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है

मद्रास हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में संतुलन बनाते हुए मुस्लिमों को सीमित अधिकार दिए, लेकिन रोजाना धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई। हाईकोर्ट ने पशु बलि को भी प्रतिबंधित किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हाईकोर्ट का आदेश संतुलित है और इसमें बदलाव की जरूरत नहीं मुस्लिम सिर्फ रमजान और बकरीद पर ही दरगाह में नमाज पढ़ सकते हैं, रोजाना नहीं दरगाह परिसर में जानवरों की कुर्बानी पर रोक बरकरार रहेगी” 

अब तक DMK सरकार और मुस्लिमों को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से कुछ उम्मीद थी लेकिन वह भी खत्म हो गई और इसलिए अब अराजकता का माहौल खड़ा करना एकमात्र रास्ता है हिंदुओं को मंदिर से दूर करने का अब हो सकता है मदुरै में दंगे कराए जाएं और DMK सरकार  हिंदुओं का दमन करेगी

यह बात हिंदू समाज के प्रत्येक वर्ग को याद रखनी चाहिए कि DMK और कांग्रेस खुलेआम सनातन धर्म को समाप्त करने का अभियान छेड़े हुए हैं और सनातन समाज में दलित, आदिवासी, OBC और सवर्ण शामिल हैं जिन्हें  DMK और कांग्रेस एक साथ मुस्लिम वोट बैंक लिए समाप्त करना चाहते हैं नाकि सनातन धर्म के किसी एक वर्ग को हिंदुओं को एक बात पता होनी चाहिए कि कर्नाटक सरकार 2013-14 to 2018-19 के दौरान लोन लेने वाले मुस्लिम किसानों का 267 करोड़ का ब्याज माफ़ कर रही है,  किसी हिंदू किसान का नहीं

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