अर्थव्यवस्था की शानदार रफ्तार, प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.4 प्रतिशत बढ़कर 19 लाख करोड़ रुपये के पार; बढ़ती महंगाई की मार झेलता वेतनभोगी

जब से देश में आयकर लागू हुआ है वेतनभोगी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है व्यापारी वर्ग के पास टैक्स से बचने के हज़ार रास्ते है वेतनभोगी के पास नहीं। फिर भी बढ़ती महंगाई की जितनी मार वेतनभोगी पर पड़ती है किसी दूसरे पर नहीं। सरकार वेतनभोगियों पर पड़ रही मार से कब राहत दिलाएगी?  
देश की अर्थव्यवस्था के लिए टैक्स के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक सेहत न केवल सुधर रही है, बल्कि रिकॉर्ड भी बना रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में सरकार की डायरेक्ट टैक्स से होने वाली कमाई 19 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 10 फरवरी तक देश का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 9.4 प्रतिशत बढ़कर 19.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी समय के मुकाबले यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय बाजार और व्यापार जगत में काफी हलचल और मजबूती है। टैक्स राजस्व में आई यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब वित्त वर्ष अपने अंतिम चरण में है। इससे सरकार का राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी और विकास कार्यों के लिए सरकार के पास पर्याप्त फंड मौजूद रहेगा। इस रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू टैक्स रिफंड का भी है। इस अवधि के दौरान सरकार द्वारा दिया जाने वाला टैक्स रिफंड 18.82 प्रतिशत घटकर 3.34 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इसका मतलब है कि टैक्स फाइलिंग और प्रोसेसिंग अब पहले से अधिक सटीक और सुव्यवस्थित हो रही है।

जनवरी में GST कलेक्‍शन 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये पर
टैक्स कलेक्शन के मामले में सरकार को बड़ा फायदा हुआ है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन जनवरी, 2026 में 6.2 प्रतिशत बढ़ गया है। इस साल जनवरी में सकल जीएसटी वसूली 1,93,384 करोड़ रुपये रही है। यह पिछले साल जनवरी के 1,82,094 करोड़ रुपये के मुकाबले 6.2 प्रतिशत ज्यादा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक कुल जीएसटी कलेक्‍शन 18.43 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 17.01 लाख करोड़ रुपये से 8.3 प्रतिशत ज्‍यादा है। इस महीने जीएसटी राजस्व में सीजीएसटी 35,488 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 43,553 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 91,678 करोड़ रुपये और उपकर 5768 करोड़ रुपये रहे हैं। इस दौरान 22,665 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए।

कर संग्रह में उछाल मजबूत आर्थिक विकास का संकेत
भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार वृद्धि देश के बढ़ते आधार और बेहतर अनुपालन उपायों को दर्शाता है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष कर संग्रह में यह उछाल कॉर्पोरेट आय में वृद्धि, रोजगार और आय के बढ़ते स्तर को रेखांकित करता है। कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर संग्रह दोनों में मजबूत वृद्धि बताता है कि भारत का आर्थिक सुधार महत्वपूर्ण गति प्राप्त कर रहा है। भारत की आर्थिक मजबूती विकास को भी गति देने में कारगर साबित होगी। आखिरकार इसका लाभ टैक्सपेयर को ही मिलेगा।

जनवरी में तेज रफ्तार के साथ 58.5 पर पहुंचा सर्विस सेक्टर PMI
अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर यह है कि सर्विस सेक्टर ने जनवरी महीने में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जनवरी में बढ़कर 58.5 पर पहुंच गया। यह दो महीने का उच्चतम स्तर है। पीएमआई का 50 से अधिक रहना गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे का आंकड़ा सुस्ती का संकेत है। PMI के इस बढ़ते आंकड़े से साफ है कि सर्विस सेक्टर में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। नए बिजनेस में बढ़ोतरी हुई है और कंपनियों ने टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाया है, जिससे कुल ग्रोथ को सपोर्ट मिला है। HSBC के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि जनवरी में पीएमआई का 58.5 पर पहुंचना सेक्टर में जारी तेजी को दर्शाता है।नए ऑर्डरों की लगातार आमद से आउटपुट में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इस ग्रोथ में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से आई अंतरराष्ट्रीय मांग की अहम भूमिका रही है। विदेशी बाजारों से मिले ऑर्डर्स ने सर्विस सेक्टर को और मजबूती दी है। भंडारी के मुताबिक, एफिशिएंसी में सुधार, बेहतर मार्केटिंग रणनीतियों और नए ग्राहकों के जुड़ने से कारोबारी भरोसा भी बढ़ा है। बिजनेस कॉन्फिडेंस तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

रिकॉर्ड 709.413 अरब डॉलर पर विदेशी मुद्रा भंडार
देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.053 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 709.413 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। यह भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू इस अवधि में 2.367 अरब डॉलर बढ़कर 562.885 अरब डॉलर हो गई। वहीं, गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई और यह 5.635 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 123.088 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.737 अरब डॉलर हो गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की रिजर्व पोजिशन 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.703 अरब डॉलर हो गई।

इसके पहले 16 जनवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 14.167 बिलियन डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ 701.360 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार सरकार की आर्थिक नीतियों, बेहतर पूंजी प्रवाह, निर्यात में सुधार और आरबीआई की प्रभावी मुद्रा प्रबंधन रणनीति का परिणाम है। मजबूत रिजर्व से न केवल रुपये को स्थिरता मिलती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में भी देश की क्षमता बढ़ती है। बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना मोदी सरकार के आर्थिक प्रबंधन की एक और बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

इसके पहले देश का मुद्रा भंडार 27 सितंबर 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान 12.59 अरब डॉलर उछलकर 700 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। विदेशी मुद्रा भंडार ने 4 जून, 2021 को 6.842 अरब डॉलर बढ़कर 600 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार किया था। इसके पहले विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था। मोदी राज में विदेशी मुद्रा भंडार दो गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। मोदी राज में देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और इसी वजह से ये भंडार भी बढ़ता जा रहा है, जो हमारे देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करता है। जब देश के पास इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो हमारा पैसा भी मजबूत रहता है और व्यापार और निवेश के लिए अच्छा माहौल बनता है।

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