बिना छपी किताब से सरकार को बदनाम करने की साजिश करने वाले राहुल गाँधी को निशिकांत दुबे की छपी हुई किताबों से क्यों दिक्कत? (साभार: SansadTV)
लोकसभा में बहस होनी थी महामहिम राष्ट्रपति के भाषण और बजट पर, लेकिन LoP राहुल गाँधी ने उन मुद्दों पर न बोलकर लोकतंत्र को तार-तार कर दिया। राहुल जब भी विदेश जाकर अपने आकाओं से मिलकर आते कोई न कोई बिनसिर पैर के विवाद खड़ा कर माहौल ख़राब करते हैं। फरवरी 4 को जिस तरह प्रधानमंत्री की कुर्सी को महिला सांसदों द्वारा घेरा गया लोकतंत्र के लिए कलंक है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में होते और कोई अप्रिय घटना हो गयी होती कौन जिम्मेदार होता?
पिछले चार दिनों से संसद में राहुल गाँधी और उनके कांग्रेसी नेता बवाल मचाए हुए हैं। मुद्दा है चीन का। राहुल गाँधी संसद के भीतर एक ऐसी किताब के अंशों का हवाला दे रहे हैं, जो अभी तक छपी ही नहीं है। उसी किताब के आधार पर सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि चीन के मुद्दे पर सच्चाई छुपाई जा रही है।
लेकिन बुधवार (04 फरवरी 2027) को तस्वीर अचानक बदल गई। बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने राहुल गाँधी की पूरी हवाबाजी महज एक मिनट में धराशायी कर दी। उन्होंने सदन में पहले से छपी हुई किताब के कुछ अंश पढ़कर सुनाए। इसके बाद न सिर्फ राहुल गाँधी, बल्कि कांग्रेस के बाकी नेता भी सन्न रह गए।
बिना छपी किताब और AI वीडियो के सहारे सरकार को बदनाम करने की कोशिश
"जो उचित समझो, वो करो" pic.twitter.com/Ua1tZ59Ikn
— Congress (@INCIndia) February 4, 2026
कांग्रेस की साजिश, निशिकांत दुबे ने की धराशायी
निशिकांत दुबे हाथ में छपी हुई किताबें लेकर आए और कहा कि अगर बिना छपी किताब के पन्ने लहराकर तीन दिन तक संसद ठप की जा सकती है, तो फिर उन किताबों पर भी चर्चा होनी चाहिए जो छप चुकी है और जिनमें कांग्रेस और नेहरू के कारनामें दर्ज हैं। उन्होंने ‘नेहरू: ए बायोग्राफी’, ‘एडविना एंड नेहरू’ और दूसरी पुस्तकों के अंश पढ़ते हुए नेहरू पर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और निजी जीवन की अय्याशियों की पोल खोली।
बिना छपी किताब पर राहुल गांधी जी आपने पिछले 3 दिनों से संसद को बंधक बनाकर रखा है । कुछ छपी किताब पर भी सदन में बहस हो जाए । गांधी/ नेहरू परिवार का इतिहास झूठ,मक्कारी,अय्याशी,भ्रष्टाचारी और देश तोड़ने वालों का है. pic.twitter.com/eKqMqPc7Hu
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) February 4, 2026
निशिकांत दुबे ने कहा कि देश को गुमराह करने की कांग्रेस की आदत पुरानी है और आज वही पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी झूठे नैरेटिव के सहारे प्रधानमंत्री और सरकार को बदनाम करने में लगी है। निशिकांत दुबे का हमाल यही नहीं रुका। उन्होंने राहुल गाँधी से सीधा सवाल किया क्या कांग्रेस इन किताबों को भी फर्जी बताएगी या फिर सच सामने आने पर चुप्पी साध लेगी?
इस पर कांग्रेस बौखला गई। प्रियंका गाँधी ने दुबे के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संसद में इस तरह कि किताबें पढ़ना नियमों के खिलाफ है और बीजेपी जानबूझकर नेहरू का नाम उछालकर ध्यान भटकाना चाहती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे निजी हमला बताया और हंगामा शुरू कर दिया।
कांग्रेस का असली चेहरा
इससे पता चलता है कि कांग्रेस अब हर उस हद तक जाने को तैयार दिख रही है, जहाँ से सरकार और प्रधानमंत्री को नीचा दिखाया जा सके। पहले संसद में बिना छपी किताब के पन्ने लहराए गए, फिर उसी झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए कांग्रेस ने AI वीडिया बनाकर चलाया। सवाल साफ है, जिस किताब का अस्तित्व ही सार्वजनिक तौर पर नहीं है, उसके सहारे कांग्रेस ने सरकार और प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की पूरी कोशिश की। यह सोची-समझी साजिश नजर आती है।
लेकिन जैसे ही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में छपी हुई किताबों का जिक्र कर दिया, कांग्रेस घबरा गई। जिन किताबों को कोई नकार नहीं सकता, जिनका रिकॉर्ड मौजूद है, जिनके लेखक और पन्ने सबके सामने हैं। उन्हीं से कांग्रेस को सबसे ज्यादा डर लगने लगा। साफ है, जो पार्टी अप्रकाशित किताब और AI वीडियो के सहारे झूठ गढ़ सकती है, वही पार्टी सच सामने आते ही बौखला जाती है। यही कांग्रेस का असली चेहरा है।
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