सुप्रीम कोर्ट का राहुल गांधी को “दामाद” बनाना वजह है उसकी उद्दंत्ता की; कानून से ऊपर रख दिया कोर्ट ने राहुल गांधी को जो अब पूरा देश भुगत रहा है; कांग्रेसी जस्टिस बीआर गवई जिम्मेदार हैं राहुल की अराजकता के लिए

सुभाष चन्द्र

मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट और उसके कुछ जज देश में अराजकता फ़ैलाने में राहुल गांधी की मदद कर रहे हैं जैसे वे भी नरेंद्र मोदी के साथ कोई खेल खेल रहे है। 

सबसे पहले तो खुद को कांग्रेस परिवार का कहने वाले जस्टिस बीआर गवई ने 4 अगस्त, 2023 को ट्रायल कोर्ट एवं हाई कोर्ट के फैसलों को दरकिनार करते हुए राहुल गांधी की मोदी सरनेम केस में सजा पर रोक लगा कर उसके अपराध को माफ़ कर दिया वह केस अभी तक चल रहा है जिसे गवई ऐसा उलझा गए कि फैसला होना ही मुश्किल हो गया सजा को 2 साल गलत बता गए जो सभी ट्रायल कोर्ट्स को इशारा था कि कोई भी उसे मानहानि के मामले में 2 साल की  सजा न दे 

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उसके बाद अगस्त 4, 2025  को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मसीह की पीठ के सामने राहुल गांधी का सेना को अपमानित करने वाले बयान का मामला आया जिसमें उसने दावा किया था कि सेना के जवानों की चीनी सेना ने पिटाई की और भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर भूमि चीन ने कब्जे में ले ली इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने फटकार लगाते हुए कहा था कि “अगर आप एक सच्चे भारतीय हो तो ऐसी बात न कहते” राहुल गांधी पर लखनऊ ट्रायल कोर्ट में चल रहे सेना की मानहानि के केस में जारी किए गए Summon और सुनवाई  स्टे करते हुए बेंच ने राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी कर दिया

प्रियंका वाड्रा ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट के जज यह तय नहीं कर सकते कि कौन सच्चा भारतीय हैउसका भाई सेना का सम्मान करता है और कभी उसके खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे

उससे भी बड़ा सेना का अपमान अब राहुल गांधी ने कर दिया

लेकिन प्रियंका वाड्रा के जजों पर उंगली उठाने का परिणाम देखिए गवई तब चीफ जस्टिस हो गए और उन्होंने दीपांकर दत्ता और और मसीह को ही बेंच से हटा दिया यानी Bench Fixing कर दी और Justices MM Sundresh and Satish Chandra Sharma की बेंच बना दी

उनकी बेंच के पास केस पहले स्थगित हुआ 20 नवंबर के लिए और फिर सुनवाई हुई 4 दिसंबर 2025 को जिस दिन दोनों महान जजों की बेंच ने केस को 22 अप्रैल, 2026 यानी 5 महीने बाद के लिए स्थगित कर दिया और स्टे को कायम रखा सेना का अपमान तो लगता है सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए जैसे कोई खेल हो गया मैं उसे सरासर जजों की मक्कारी कहूंगा जो ऐसे संगीन मामले की सुनवाई 5 महीने के टाल दी 

वीर सावरकर के अपमान के मामले में भी उन्हीं दोनों जजों की (दीपांकर दत्ता और मसीह) बेंच ने सुनवाई में राहुल गांधी को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपको स्वतंत्रता सेनानियों पर सोच समझ कर बोलना चाहिए Yours Faithfully, Yours Obediently जैसे शब्द यह साबित नहीं करते कि लिखने वाला सामने वाले का गुलाम है 

सावरकर मामले में भी सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 25 जुलाई 2025 को ट्रायल कोर्ट के स्टे के 4 अप्रैल 2025 के आदेश को आगे बढ़ा दिया लेकिन उसके बाद केस का क्या हुआ, उसकी कोई रिपोर्ट नहीं है हो सकता है वह बेंच भी बदल दी गई हो और नई बेंच बनी ही न हो क्योंकि केस 7 महीने से बंद है

सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी के हर मामले में ट्रायल कोर्ट के समन पर रोक लगा कर ट्रायल ही नहीं होने दे रहा रोक हटने के बाद ट्रायल कोर्ट में केस ख़त्म होने में भी वर्षों लग जाएंगे

28 जनवरी को लखनऊ MP/MLA कोर्ट के जज ने राहुल की ब्रिटिश नागरिकता मामले में 8 दिन सुनवाई के बाद मामले को बंद करते हुए कहा कि नागरिकता तय करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है जबकि शिकायतकर्ता ने तो केवल राहुल पर FIR दर्ज करने के आदेश देने के लिए कहा था नागरिकता तय करने के लिए नहीं

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