दिमाग से पैदल हो चुका राहुल गांधी मोदी को बार बार “डरपोक” कहता है। कांग्रेस की महिलाओं को मोदी के साथ अश्लील कृत्य करने को भेजता है और कहता है मोदी डर कर नहीं आए। राहुल का लगातार विलाप देख कर कुछ अन्य लोग भी मोदी को डरपोक कहने लगे हैं जबकि न राहुल अपने गिरेबान में देखता है और न लोग उसकी हरकतें याद रखते हैं कि राहुल कितनी उच्च कोटि का कैसा “डरपोक” है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
-आए दिन बक बक करता था RSS ने गांधी जी की हत्या की। संघ के स्वयंसेवक ने मानहानि का केस दायर कर दिया तो डर के मारे RSS का नाम लेना भूल गया;
-मोदी सरनेम वालों को चोर कहने पर सजा हुई तो बीआर गवई ने बचा लिए लेकिन डर के मारे अब मोदी सरनेम वालो को चोर कहना भूल गया;
-अमित शाह को हत्यारा बोला, एक केस लगा है कोर्ट में और डर के मारे 8 साल से फिर शाह को हत्यारा नहीं बोला;
-राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के अवमानना का मामला चला। डर के मारे कोर्ट से माफ़ी मांग ली;
-चौकीदार चोर है के नारे पर सुप्रीम कोर्ट से डर कर माफ़ी मांगी;
-चीन ने हमारे जवानों की पिटाई की और 2000 किलोमीटर भूमि हड़प ली। डर कर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया; और सुप्रीम कोर्ट ने फटकार मारी;
-10 दिन तक नरवणे की किताब पर हंगामा किया लेकिन जैसे ही प्रकाशक पेंगुइन और नरवणे ने X पर कहा कि किताब छपी ही नहीं है तो डर के मारे अगले दिन लोकसभा में आया और नरवणे की किताब भूल ही गया।
अब रोना शुरू किया है कि अमेरिका से मोदी डर गया। भारत माता को बेच दिया। ये तो पूछता था की भाजपा वाले “भारत माता” के जय बोलते हैं, लेकिन भारत माता कौन है, क्या है? आज इसे भारत माता कैसे समझ आ गई।
राहुल गांधी बिना दिमाग लगाए कुछ भी बोलता है। लोकसभा में उसके बयानों में से घोर आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से निकाल दिया। कुछ मुख्य शब्द थे -
-देश बिक चुका है;
-बिकाऊ है;
- बिका हुआ;
- एपस्टीन;
- अनिल अंबानी;
- प्रधानमंत्री ने 1.5 अरब लोगों का भविष्य बेच दिया;
- देश को बेचते हुए शर्म नहीं आई -
बीजेपी ने यह भयंकर भूल की है। सदन की कार्यवाही से इन शब्दों को निकालने की बजाए राहुल से सबूत मांगने थे नहीं देने पर सख्त कार्यवाही करनी थी, क्योकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। यही वजह है कि कुछ का कुछ बोलता रहता है।
राहुल गांधी को पता है कि अमेरिका 4 साल से मोदी को रूस से तेल न खरीदने के लिए दबाव बना रहा था लेकिन मोदी नहीं माना और रूस से तेल खरीदता रहा। अगर मोदी डरा होता तो तेल नहीं खरीदता लेकिन फिर भी राहुल की सुई एक जगह अटक गई है कि मोदी डर गया।
राहुल गांधी और उसकी बहन पिछले 40 साल में श्रीनगर घूमने नहीं जा सके डर की वहज से लेकिन जिस मोदी को डरने वाला कहता है राहुल गांधी, वो 1990 के कश्मीर में कत्लेआम के 2 साल बाद श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहरा कर आया था।
सोनिया की रिमोट कंट्रोल की सरकार 26/11 के मुंबई पर पाकिस्तानी हमले का जवाब देने में डर गई थी लेकिन मोदी ने 3 बार पाकिस्तान को घर में घुस कर मारा और राहुल गांधी तुम उस मोदी को डरपोक कहते हो, शर्म नहीं आती।
तुकबंदी करता है राहुल “नरेंद्र सरेंडर” पर भूल जाता है कि नेहरू ने चीन और पाकिस्तान के सामने सरेंडर किया, इंदिरा गांधी ने शिमला में किया और खुद राहुल ने 2008 में और ढ़ोकलाम/ गलवान में चीन को सरेंडर किया।
नरेंद्र मोदी डरपोक नहीं है इसलिए ही फ्रांस के राफेल खरीदे, अमेरिका के F - 35 नहीं, अमेरिका ने रोका लेकिन रूस से S-400 खरीदा अमेरिका की MIM - 104 पैट्रियट नहीं। जिस मोदी ने ट्रंप के फ़ोन तक नहीं उठाए ट्रेड डील में अपने किसानों की रक्षा के लिए, उसके लिए राहुल कह रहा है कि मोदी डर गया। ऐसी बातें कोई पागल ही कर सकता है।

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