जिस तरह प्रियंका वाड्रा को राजनीति में लाने की जो कोशिश चल रही भटकाऊ राहुल गैंदी कांग्रेस में चल रही अपने खिलाफ माहौल को समझने की बजाए उनके जाल में फंस बहन को लाकर अपने ही पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली।
राहुल गांधी पर एक कहावत फिट बैठती है -”करमहीन खेती करै, बैल मरै या सूखा परै”। हर काम जोर षोर से शुरू करता है लेकिन ख़ाक हो जाता है। हाल का नरवणे की किताब का प्रकरण यही साबित करता है जो अब लाज बचाना मुश्किल हो रहा है।
कुछ दिन पहले रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि “हमें बांग्लादेशी हिंदुओं से क्या लेना देना है। पहले हमें अपने देश की बात करनी चाहिए, बांग्लादेश की नहीं। उसने एक दूसरे बयान में कहा था “पूरे देश की यह मांग है कि प्रियंका गांधी आएं और नेतृत्व करें”। अब पता नहीं उसने यह “पूरे देश की मांग” कैसे समझ लिया। लगता है अपनी मांग को ही पूरे देश की मांग समझ लिया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
लगता है प्रियंका वाड्रा अपने मन की बात अपने पति और अन्य चाटुकारों से आगे कर रही है लेकिन वैसे सब राहुल के साथ दिखाई दे रहे हैं। यह अंदर ही अंदर एक ज्वालामुखी धधकता दिखाई दे रहा है राहुल गांधी को और इस वजह से वह ऐसी वो हरकत कर रहा है जिससे वह Limelight में दिखाई देता रहे चाहे उसके काम मूर्खता भरे ही क्यों न हों। वह ऐसा सब प्रियंका वाड्रा को पीछे धकेलने के लिए कर रहा है और उसे जता रहा है कि उसके होते हुए प्रियंका कांग्रेस का नेतृत्व नहीं कर सकती।
वैसे तो कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी की कार्यशैली को धता बता कर पार्टी से अलग होते रहे हैं लेकिन फिर भी उसे कुछ परवाह नहीं है। वह अपने साथ पार्टी की 5 पनौतियां साथ लेकर चल रहा है और वो हैं के सी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और रणदीप सुरजेवाला। इनके अलावा अमेरिका में बैठा है सैम पित्रोदा। राहुल को लगता है ये सब मिलकर उसको बचाते रहेंगे जबकि कांग्रेस में राहुल और प्रियंका के बीच एक War of Supremacy चल रही है। प्रियंका अनिश्चित समय के लिए राहुल के पीछे पीछे नहीं चलना चाहती और यही डर अंदर ही अंदर राहुल को सता रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने कांग्रेस छोड़ दी और कुछ दिन पहले उन्होंने एक बयान में कहा था “राहुल गांधी एक डरपोक नेता हैं। फिर उन्होंने डरपोक के लिए कहा एक Insecure नेता हैं। उन्होंने कहा -” राहुल गांधी जैसा insecure politician मेरी नज़र में आज तक नहीं हुआ। हर मजबूत कांग्रेसी से उसे डर लगता है।
उसकी सोच है कि मोदी जी से जब लोग नाराज़ होंगे, तो वो मेरी तरफ आएंगे क्योंकि देश में अन्य नेता सब एक एक राज्य के नेता हैं।
राहुल गांधी को कोई नेता उनके खिलाफ बोलता हुआ पसंद नहीं है। वो खुद लोकसभा में आरोप लगाता है कि उसे बोलने नहीं दिया जाता जबकि वह हर अनाप शनाप बात बोलता है लेकिन अपनी पार्टी में किसी को बोलने की इज़ाज़त नहीं देता। कांग्रेस में कोई लोकतंत्र नहीं चाहिए राहुल गांधी को और शायद इसलिए ही प्रियंका वाड्रा खुल कर सामने नहीं आ रही लेकिन राहुल गांधी यह अच्छी तरह जानता है कि मौका मिलते ही प्रियंका उसका पत्ता साफ़ कर सकती है।
कोई बड़ी बात नहीं कांग्रेस के भीतर ही राहुल गांधी को संसद में उत्पात करने के लिए उकसाया जा रहा हो जिससे उससे छुटकारा मिल सके और प्रियंका को स्थापित किया जा सके। अगर उसके खिलाफ निशिकांत दुबे का Sabstantive Motion पास हो गया तो उसकी लुटिया डूबी ही डूबी।

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