जनरल नरवणे राहुल के बयान पर आपकी टिप्पणी काफी नहीं है; उसे कोर्ट ले जाएं

सुभाष चन्द्र

राहुल गाँधी LoP नहीं Leader of Propaganda जिसे राहुल की हरकतें खुद ही साबित कर रही हैं, फिर भी जनता इसके मकरजाल में फंस कांग्रेस को वोट देती है उससे महामूर्ख दुनिया में कहीं मिलने वाला नहीं। ये भारत विरोधी विदेशियों के हाथ की कठपुतली है। जब भी विदेश से आता है कोई न कोई प्रोपेगंडा कर संसद को बाधित करता है।  

राहुल गांधी ने जनरल नरवणे का नाम लेकर मुद्दा उछाला था जिस पर एक सप्ताह बाद वे और पेंगुइन बाहर निकले थे और कहा था कि किताब अभी नहीं छपी है वह भी तब, जब दिल्ली पुलिस ने FIR पर कार्रवाई शुरू कर दी थी लेकिन किताब छपी या नहीं छपी, इसमें भी झोल था सबसे बड़ी बात तो यह थी कि वह पुस्तक राहुल गांधी के पास कैसे पहुंची अगर छपी ही नहीं

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चर्चित YouTuber 
अब 15 दिन के बाद जनरल नरवणे ने जो बयान दिया है उसे बताया जा रहा है जैसे उन्होंने बहुत बड़ा तीर मार दिया है
 उन्होंने कहा है कि -

“चीन को एक इंच भी जमीन नहीं दी गई है; हम अज्ञात स्रोतों के हवाले से छपे लेखों पर भरोसा नहीं कर सकते; जब स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, तब हम इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा कर सकते हैं”

जनरल नरवणे के सम्मान के विरुद्ध कुछ नहीं कहना चाहिए लेकिन वे केवल इतना बयान देकर पतली गली से नहीं निकल सकते राहुल गांधी ने उनके नाम का सहारा लेकर ना केवल मोदी सरकार पर आरोप लगाया बल्कि खुद नरवणे पर भी कीचड़ उछाली और उन पर सवाल उठाते हुए चीन को भूमि सौपने का आरोप लगाया जैसे उसके लिए जनरल नरवणे ही जिम्मेदार थे

आपने कहा कि अज्ञात स्रोतों के हवाले से छपे लेखों पर भरोसा नहीं कर सकते और राहुल गांधी के लिए कहा कि कोई भी कुछ भी बोल सकता है लेकिन आपको यह बताना चाहिए कि जो उस लेख में छपा वो गलत है क्या और जो राहुल गांधी किताब से पढ़ कर बोल रहा था, वह क्या गलत था आपका इस बारे में स्पष्टीकरण ना आना आप पर संदेह पैदा करता है

अगर गलत था तो जनरल नरवणे को राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का केस दायर करना चाहिए जैसे कि लक्ष्मी पुरी ने साकेत गोखले के खिलाफ किया था और उसे घुटनों पर ला दिया था जनरल नरवणे साहेब, राहुल गांधी “कोई भी नहीं है” वो लोकसभा में LoP है और वह आपके खिलाफ मर्यादा तोड़ कर बात नहीं कर सकता वह पहले ही सेना के अपमान और चीन द्वारा 2000 किलोमीटर भूमि हड़पने के आरोप के लिए सुप्रीम कोर्ट से फटकार खाए हुए है और अभी केस सुप्रीम कोर्ट में है ट्रायल की अनुमति के लिए जनरल नरवणे अगर उसे कोर्ट में घसीटते हैं तो कोर्ट उनकी बात की अनदेखी नहीं करेगा राहुल से पूछिए कि 38 हजार वर्गकिलोमीटर भूमि चीन के कब्जे में कैसे है?

दिल्ली पुलिस जैसे जांच कर रही है वैसे तो उसे पूरा करने में कई वर्ष लग जाएंगे वह जांच कर रही है अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में लीक के digital और financial footprints तलाशने में वहां लीक बाद में तलाश हो सकते हैं पहले पेंगुइन और राहुल के पास पुस्तक कैसे पहुंची उसकी जांच होनी चाहिए सौ बात की एक बात है कि पुस्तक की manuscript केवल नरवणे के पास हो सकती थी या रक्षा मंत्रालय में जब तक रक्षा मंत्रालय से अनुमति नहीं मिलती, वह manuscript पेंगुइन के पास कैसे पहुंच सकती थी और उसके लिए शक की सुई नरवणे साहेब की तरफ मुड़ती है

पेंगुइन ने कहा कि किताब Officially प्रकाशित नहीं हुई है जिसका मतलब यह भी निकलता है कि किताब छपी तो है लेकिन कंपनी ने आधिकारिक तौर पर प्रकाशित नहीं की है और इसका मतलब यह भी निकलता है कि किताब की प्रतियां चोरी छुपे प्रकाशन कार्यालय से बाहर गई है क्योंकि कंपनी ने खुद कहा है कि “They are pursuing legal remedies against the unauthorized distribution”. इससे साफ है कंपनी मान रही है कि किताब उसकी अनुमति के बिना बाहर निकली है

दरअसल पुलिस की तीन टीमों को पेंगुइन, राहुल गांधी और नरवणे साहेब से अलग अलग एक साथ पूछताछ करनी चाहिए और सभी के जवाबों को फिर से स्पष्टीकरण लेने चाहिए जब तक ठोस परिणाम न सामने आ जाए

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