मदारी बन राहुल गाँधी ने अब तक जितने भी बेसिर पैर के मुद्दे उठाए हैं लगभग सभी में मात खाई है, जिसका फायदा बीजेपी को हुआ। INDI गठबंधन जिस तरह राहुल के बधुआ मजदूर बन साथ दे रहा है अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। राहुल, सोनिया और प्रियंका ने तो कांग्रेस का जनाजा निकालने की कसम खाई हुई है। राहुल जब भी विदेशों में बैठे अपने आकाओं से मिलकर वापस आता है, कोई न कोई झुनझुना लेकर सबको गुमराह कर कांग्रेस का बेड़ागर्क कर रहा है। INDI गठबंधन गैंग बिना अक्ल के राहुल के पीछे नाचना शुरू कर देता है।
ईंट का जवाब पत्थर से देने का समय आ गया है। मोदी सरकार को चाहिए की कांग्रेस के समय मोहम्मद यूनुस(Trade Fair Authority के तत्कालीन चेयरमैन) आदि परिवार के विरुद्ध प्रकाशित किताबों से बैन हटा देना चाहिए ताकि जनता ही नहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पता चले नेहरू-गाँधी परिवार में कितना गंद है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
प्रश्न यह उठता है कि राहुल गांधी के पास पुस्तक कहां से आई जिसे वह लोकसभा और उसके बाहर लहरा कर दिखा रहा था। मुझे नहीं पता इस बात में कितनी सच्चाई है लेकिन एक यूट्यूब चैनल “Alternate Media” पर गायत्री देवी को इंटरव्यू में शिवम् चौधरी ने कहा कि जनरल नरवणे ने वह पोस्टल राहुल गांधी को पढ़ने को दी थी लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वो उसे लोकसभा में खोल कर पढ़ देगा।
अगर यह सच है तो जनरल नरवणे प्रथम अपराधी की श्रेणी में आते हैं लेकिन एक तथ्य यह भी है कि जो पुस्तक उन्होंने राहुल को दी, वह किसने छापी जिसे छपने की अनुमति अभी तक रक्षा मंत्रालय ने नहीं दी। एक किताब राहुल को देने का मतलब है उनके पास केवल प्रति तो नहीं होगी इसलिए जाहिर है किसी ने तो पुस्तक छाप दी बिना सरकार की अनुमति के।
गूगल सर्च पर एक जगह साफ़ बताया गया है कि “The Publisher of former Indian Army Chief General Manoj Mukund Narvane’s memoir, ‘Four Stars of Destiny,’ is Penguin Random House India” - Publication delays due to security reviews by the Ministry of Defence.
गूगल सर्च में ही दूसरी जगह अन्य जानकारी में कहा गया कि “Penguin Random House India confirmed they have not published the book and that it remains under review, stating that no copies —in print or digital form—were released by them”.
गूगल सर्च में तीसरी जगह जानकारी देता है कि “Penguin Random House, the publishers, stated that the book has not been released, published, or distributed by them”.
इसका मतलब यह भी निकलता है कि पेंगुइन ने पुस्तक छाप तो दी है लेकिन release, publish, या distribute नहीं की गई है।
मामला साफ है पुस्तक कहीं न कहीं से तो राहुल गांधी के पास पहुंची है। जनरल नरवणे से, Penguin Publishers से या फिर रक्षा मंत्रालय में ही किसी ने खेल किया जिसने पुस्तक की Manuscript को गोपनीय नहीं रखा।
दिल्ली पुलिस को फुर्ती दिखानी चाहिए और सबसे पहले प्रकाशन के मालिक को गिरफ्तार करना चाहिए और उसका स्टॉक चेक करके देखना चाहिए कि छापी हुई पुस्तकों में से कितनी गायब हैं। राहुल गांधी को भी गिरफ्तार कर पूछना चाहिए कि उसे किताब किसने दी और जनरल नरवणे को भी Interrogate करना चाहिए कि उनकी बातें राहुल गांधी तक कैसे पहुंची।
जनरल नरवणे को कानूनी प्रक्रिया से छूट नहीं है और उन पर कोर्ट मार्शल भी हो सकता है। कभी कभी मुझे शंका होती है कि इस फसाद के पीछे कहीं जनरल नरवणे ही तो नहीं हैं। जनरल नरवणे 30 अप्रैल 2022 को रिटायर हुए और उसके 6 महीने बाद 28 सितंबर, 2022 को जनरल अनिल चौहान को CDS बनाया गया। हो सकता है जनरल नरवणे के दिल में CDS न बनाए जाने का मलाल हो जिसकी वजह से उन्होंने ही यह रायता फैलाया हो जिसके लिए राहुल गांधी उत्तम व्यक्ति को चुना उन्होंने।
इन सब पर Official Secrets Act (OSA), 1923 में केस दर्ज होना चाहिए जिसके अनुसार any person, including military personnel, who compromises national security, shares classified information, or engages in spying can face up to 14 years in prison.
राष्ट्रीय सुरक्षा के इस विषय को इतनी गंभीरता से लेना चाहिए कि कोई भी दोषी हो, उसे छोड़ना नहीं चाहिए। अभी गौरव गोगोई और उसकी पत्नी के पाकिस्तान से रिश्ते भी कटघरे में हैं।

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