अमेरिका की एक सभा में एक मुस्लिम छात्रा को पैनल सदस्य ने अल्पसंख्यकों के बारे में उत्तर दिया; “मुस्लिमों की शांतिप्रिय Majority; कथित शांतिप्रिय जिहादी मुस्लिमों की Minority के सामने चुप रहती है”

प्रतीकात्मक 
सुभाष चन्द्र

“सलाम अलैकुम, मेरा नाम सबा अहमद है और मैं एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में कानून की छात्रा हूं मैं आपसे यहां कुछ सामान्य सवाल पूछने आई हूँ

मैं जानती हूँ इस्लाम और सभी मुस्लिमों की बुरी छवि प्रस्तुत की जाति है, लेकिन दुनिया में 180 करोड़ मुस्लिम है। अमेरिका में ही 80 लाख से ज्यादा मुस्लिम हैं, लेकिन देख रही हूँ कि उन्हें यहाँ बिल्कुल भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया लेकिन मेरा प्रश्न है कि आप एक विचारधारा को हथियारों के बल पर कैसे समाप्त कर सकेंगे? जिसे आप ‘जिहादी विचारधारा’ कहते हैं, वह एक सोच है, आप उससे बिना विचार-विमर्श किए कैसे जीत सकते हैं?”

इसका उत्तर पैनल की सदस्य ने देते हुए कहा:

“बहुत अच्छा सवाल, मुझे ख़ुशी है तुमने इसे पूछा और हमें इसका उत्तर देने का अवसर दिया-

कितनी विचित्र बात है कि हम तो यहाँ बेनग़ाज़ी (ईराक़) में हमारे सैनिकों के मारे जाने पर चर्चा प्रारंभ करने के लिए एकत्र हुए हैं और यहाँ एक भी व्यक्ति ने यह नहीं कहा कि हम मुस्लिमों या इस्लाम के खिलाफ हैं

लेखक 
चर्चित YouTuber 
हम यहाँ चर्चा करने आये हैं कि कैसे 4 अमेरिकियों की नृशंस हत्या की गई और हमारी सरकार क्या कर रही है हम यहाँ मुस्लिमों की आलोचना के लिए नहीं आए थे, ये तुम हो जिसने ‘अधिकतर मुस्लिमों का सवाल उठाया है’ और सवाल उठा ही दिया है तुमने तो मैं भी इसका उत्तर विस्तार से देने जा रही हूँ

आज दुनिया में 120 करोड़ मुस्लिम हैं, सच है कि उनमें से सब कट्टर नहीं हैं, अधिकतर मुस्लिम शांतिप्रिय ही हैं  कुल मुस्लिम जनसंख्या का मात्र 15 से 20 प्रतिशत ही कट्टर जिहादी हैं, और यह मेरा नहीं विश्व की सभी प्रतिष्ठित जांच एजेंसियों का निष्कर्ष है इसका अर्थ यह हुआ कि मुस्लिम जनसंख्या में 75 प्रतिशत मुस्लिम शांतिप्रिय लोग हैं लेकिन कुल 15-20% का मतलब  हुआ 18 से 30 करोड़ विषैले जिहादी, जिनके सर पर पश्चिमी सभ्यता के विनाश का अँधा जूनून सवार है

यह जनसंख्या लगभग अमेरिका की कुल जनसंख्या के बराबर है, तो हमें उन 15 से 20 प्रतिशत कट्टर जिहादियों के बारे में में विचलित क्यों होना चाहिए? 

क्योंकि यही हिंसक कट्टर लोग हत्या करते हैं, लोगों के सर काटते हैं तुम मानव इतिहास का कोई भी पन्ना उठा कर देख लो, सत्य है अधिकतर जर्मन शांतिप्रिय लोग थे, फिर भी हिंसक कट्टर नाज़ियों के कारण 6 करोड़ मनुष्य मारे गए नाजियों के यातना शिविरों में 1.4 करोड़ लोग मार डाले गए, जिनमें 60 लाख यहूदी थे अधिकतर शांतिप्रिय लोग क्या कर पाए? कुछ भी नहीं!

उसी तरह अधिकतर रूसी शांतिप्रिय लोग थे, लेकिन कट्टर वामपंथी रूसियों ने बर्बरतापूर्वक 2 करोड़ लोग मार डाले अधिकतर शांतिप्रिय लोग क्या कर पाए? कुछ भी नहीं!

चीनियों को देखो, अधिकतर चीनी शांतिप्रिय लोग थे, लेकिन नरपिशाच वामपंथी चीनियों ने 7 करोड़ लोग मौत के घाट उतार डाले। अधिकतर शांतिप्रिय लोग क्या कर पाए ? कुछ भी नहीं!

ठीक उसी तरह, द्वितीय विश्व युद्ध से पहले अधिकतर जापानी शांतिप्रिय लोग थे। लेकिन कट्टर जापानी सैनिकों की बंदूकों की नुकीली संगीनों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में 1.2 करोड़ लोगों के जिस्म काट डाले अधिकतर शांतिप्रिय लोग क्या कर पाए? कुछ भी नहीं!

11 सितंबर 2001 को अमेरिका में 23 लाख अरब मुस्लिम मौजूद थे जिनमें से अधिकतर शांतिप्रिय ही थे सिर्फ 19 विषैले जिहादियों ने हवाई जहाजों का अपहरण कर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हमला किया और 3000 अमेरिकियों को मौत के घाट उतार कर अमेरिका को उसके घुटनों पर ला दिया अधिकतर शांतिप्रिय लोग क्या कर पाए? कुछ भी नहीं!

तो उन ‘अधिकतर शांतिप्रिय’ मुस्लिमों की चर्चा छिड़ी है तो मुझे ख़ुशी है कि आज तुम यहाँ हो लेकिन तुम्हारे अलावा और कितने ‘अधिकतर शांतिप्रिय’ मुस्लिम यहाँ मौजूद हैं? और क्योंकि तुम यहाँ मौजूद इकलौती मुस्लिम प्रतिनिधि हो, तुमने सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया बजाय चर्चा करने के कि हमारी सरकार इस मामले में … मेरा अनुमान है कि तुम एक अमेरिकी नागरिक हो ना? तुम एक अमेरिकी नागरिक हो तो अमेरिकी नागरिक के रूप में इस बात पर चर्चा करने की बजाय कि हमारे 4 सैनिक ईराक़ में क्यों मारे गए और सरकार इस बारे में क्या कर रही है, तुम यहाँ खड़ी होकर ‘अधिकतर शांतिप्रिय मुस्लिमों’ की वकालत कर रही हो?

काश तुम ऐसे 10 ‘शांतिप्रिय मुस्लिम’ अपने साथ लेकर आती और सरकार को जिम्मेदार बनाने पर चर्चा करती समय आ चुका है कि हम आत्मघाती और मनोरोगी ‘धर्मनिरपेक्षता’ तथा ‘आदर्शवाद’ को उठाएं और उसी कचरे के डब्बे में फेंक दें जिसके यह लायक है!!

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