देश में Ex-Muslim की बढ़ती जनसँख्या का श्रेय जाता है अनवर शेख को। जो खोमैनी सलमान रुश्दी के खिलाफ फतवा देने की हिम्मत तो कर सकता था लेकिन अनवर के खिलाफ एक भी लब्ज बोलने की बोलने की हिम्मत नहीं। अब आजकल अली सीना की Understanding Mohammad and muslim बहुत चर्चा में है जिसका विरोध करने की किसी भी सुरमा भोपाली बने फिर रहे कट्टरपंथी की हिम्मत नहीं। वास्तव में Ex-muslim सामने आने शुरू हुए नूपुर शर्मा विवाद से।
Ex-muslim यूटूबर सलीम वास्तिक पर दो भाइयों ज़ीशान और गुलफाम ने घर में घुसकर बार बार चाकुओं से हमला कर हत्या की कोशिश की और वो अभी तक जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं लेकिन दोनों हमलावरों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। उनके पिता का कहना है और कुछ और लोग भी कह रहे थे कि उन्हें पकड़ कर अदालत में मुकदमा चला कर सजा दिलानी चाहिए थी। होली का रंग पसंद नहीं आया तो 26 साल के तरुण की हत्या कर दी गई। ये क्या तमाशा हो गया। कितने साल में उसके परिवार को न्याय मिलेगा। किसी मामले में तो चीफ जस्टिस आगे बढ़ कर देखें क्या हो रहा है या जब 20 बरस बाद उनकी अदालत में केस आएगा तब ही देखेंगे।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अदालत के कामकाज की कहानी ही अलग है। कल डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की 2002 में हत्या के 24 साल पुराने केस में हाई कोर्ट ने यह कह कर बरी कर दिया कि राम रहीम के खिलाफ रामचंद्र की हत्या के पीछे किसी Conspiracy के सबूत नहीं मिले जबकि बाकी 3 अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। 3 की सजा ठीक और एक की गलत अपने आप में एक बड़ा झोल साबित करता है। 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। रामचंद्र के भाई ने कहा है वो सुप्रीम कोर्ट जायेंगे। वहां पहले से टाइम तय करके चलो 5 साल तो लग ही जाएंगे, यानी निर्णय होने में 30 साल।
राम रहीम के मैनेजर की भी 2002 में ही हत्या हुई थी और 2021 में उसे भी उम्रकैद हुई थी लेकिन मई 2024 में हाई कोर्ट ने उसके लिए भी राम रहीम को बरी कर दिया था। दो साध्वियों के साथ यौन अपराध के मामले में रंजीत सिंह की हत्या हुई थी और रामचंद्र छत्रपति की भी हत्या उसी प्रकरण में हुई थी क्योंकि वह उस केस की रिपोर्टिंग कर रहे थे। दोनों साध्वियों से यौन अपराध के लिए 2017 में सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को 20 वर्ष की सजा सुनाई थी।
हत्या के दोनों मामलों में बरी होने का इशारा यह भी है कि साध्वियों पर किये यौन अपराध के लिए भी शायद वह भविष्य में बरी हो जायेगा। अभी शायद वह 8 साल जेल में रह चुका है क्योंकि उसे बार बार परोल पर छोड़ दिया जाता है।
ऐसे अनेक मामले हैं जहां न्याय होता ही नहीं है। आरुषि हत्याकांड भी किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंचा था। आज लोग तुरंत न्याय की चाहत रहने लगे हैं जो न्यायपालिका पर से विश्वास ख़त्म होना साबित कर रहा है। ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कोई भी त्वतरित न्याय देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाना चाहते। यही अदालतों में भ्रष्टाचार साबित करता है।

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