इस लेख में इज़रायल के यहूदियों को मैं कुछ कहना चाहता हूं क्योंकि कल के समाचारों से पता चला कि इज़रायल में युद्ध के खिलाफ लोगों ने भारी प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नेतन्याहू को हटाने तक की मांग के लिए नारे लगाए गए। यह आक्रोश देख कर मुझे दुख हुआ।
इज़रायल की जनता के नेतन्याहू से मतभेद हो सकते हैं लेकिन यहूदी कौन एक बात याद रखनी चाहिए कि ईरान यहूदियों के लिए दूसरा हिटलर है जिसने 60 लाख यहूदियों को गैस चैंबरों में हत्या कर दी थी। लेकिन 2000 हजार साल पुरानी यहूदी कौम ने 1948 से लगातार अपने चारों तरफ बैठे इस्लामिक दुश्मनों का मुकाबला किया है। फिलिस्तीन और अन्य इस्लामिक देश इज़रायल को देश ही नहीं मानते और ईरान बार बार धमकी दे रहा है कि वह इज़रायल को दुनिया के नक़्शे से मिटा देगा। क्या इज़रायल के यहूदी अपना अस्तित्व मिटा हुआ देखना चाहते हैं?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ईरान ने इज़रायल को ख़त्म करने के लिए हमास, हिज़्बुल्ला और हूती जैसे खूंखार आतंकी पैदा किये। सीरिया के आतंकियों को भी धन और हथियार देता रहा लेकिन यह यहूदियों की इच्छाशक्ति है जिसकी वजह से ईरान सफल नहीं हो सका।
इज़रायल के यहूदियों को क्या लगता है कि अगर नेतन्याहू को हटा दिया गया और Yair Lapid या Naftali Bennett प्रधानमंत्री बन गए तो वे क्या युद्ध बंद कर देंगे? ये सोचना अपने आपको धोखा देना होगा क्योंकि जो संकट नेतन्याहू के सामने है, वह उन दोनों के सामने भी होगा क्योंकि यहूदी कौम इस्लाम की स्थायी शत्रु है जिसका खात्मा ही इस्लाम का लक्ष्य है। ईरान परमाणु हथियार इज़रायल को ख़त्म करने के लिए बनाना चाहता है। पाकिस्तान के पास तो पहले से वो हथियार हैं और वह तो इज़रायल को मान्यता भी नहीं देता। जैसा युद्ध नेतन्याहू लड़ रहे हैं वैसा ही Naftali और Lapid भी लड़ेंगे या यहूदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ने को विवश होंगे।
इसलिए मेरा इज़रायल के यहूदियों से अनुरोध है कि वे अपनी कौम के अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट रहें और नेतन्याहू के साथ खड़े रहें।

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