योगी बच्ची संग (बाएँ), प्रोपेगेंडाई क्वीन आरफा (दाएँ), (साभार : PTI & crickettimes)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एक 5 साल की बच्ची यशस्विनी के बीच की मासूम बातचीत ने सोशल मीडिया पर ‘लिबरल ब्रिगेड’ के पेट में दर्द कर दिया है। जहाँ एक ओर सीएम योगी ने उस बच्ची को खिलौने के रूप में छोटा सा बुलडोजर वापस कर पढ़ाई पर ध्यान देने की प्रेरणा दी, वहीं दूसरी ओर आरफा खानुम जैसी प्रोपेगेंडाई पत्रकार और उनके वामपंथी समर्थकों ने इसे ‘हिंदू कट्टरपंथ’ का नाम दे दिया। यह उस दोहरे मापदंड का पर्दाफाश करती है जो खिलौने में तो ‘आतंकवाद’ देख लेता है, लेकिन वास्तविक घृणा और अश्लीलता पर आँखें मूँद लेता है।
बुलडोजर से ‘शिक्षा’ की सीख: जब योगी ने नन्ही यशस्विनी को चॉकलेट और संस्कार दिए
गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर से एक बेहद भावुक और प्रेरक Video सामने आया। कानपुर की 5 साल की बच्ची यशस्विनी अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुँची थी। वह अपने साथ उपहार स्वरूप एक छोटा सा ‘खिलौना बुलडोजर’ लेकर आई थी। मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से बच्ची का स्वागत किया, उसे चॉकलेट दी और खिलौना हाथ में लिया। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई… सीएम योगी ने वह बुलडोजर बच्ची को वापस लौटाते हुए बड़े प्रेम से कहा, “इसे अपने पास रखो, इससे खेलो और खूब मन लगाकर पढ़ाई करो।”
Cute moment Chocolate ke badle bulldozer deal acchi lagi Yogi ji ko 😂🙏 pic.twitter.com/1Tg77mPgq2
— Direct Wire (@TheDirectWire) March 27, 2026
मुख्यमंत्री का यह संदेश साफ था। कानून व्यवस्था के प्रतीक बुलडोजर को खिलौने के तौर पर स्वीकारना अलग बात है, लेकिन एक बच्चे के लिए उसका भविष्य उसकी ‘शिक्षा’ में है। योगी जी ने उस बच्ची को कट्टरपंथी बनाने के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक बनने और पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया। यह Video देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने मुख्यमंत्री के इस सहज और अभिभावक वाले रूप की जमकर तारीफ की।
आरफा खानुम का जहरीला एजेंडा: खिलौने में खोज लिया ‘हिंदू आतंकवाद’
लेकिन जहाँ दुनिया को इस Video में मासूमियत और सकारात्मकता दिखी, वहीं आरफा खानुम और उनके वामपंथी सहयोगियों को इसमें ‘खतरा’ नजर आया। आरफा ने इस Video को शेयर करते हुए लिखा, “इस तरह वे हिंदू बच्चों की पूरी पीढ़ी को कट्टरपंथी बना रहे हैं। वह भी मासूम छोटी लड़कियों को। हृदयविदारक और अत्यंत खतरनाक।”
This is how they are radicalizing a whole generation of Hindu kids. And that too innocent little girls.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) March 27, 2026
Heartbreaking and extremely dangerous. https://t.co/RUJwtcShLE
आरफा के इस जहर के बाद उनके वामपंथी समर्थकों ने भी सुर में सुर मिलाया। यासिर कलाम ने लिखा, “वे बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे हैं और उन्हें भविष्य के लिए हिंदू आतंकवादी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, यह इस सरकार की नीति है। अद्भुत।”
वहीं, जावेद भट ने उपहास करते हुए लिखा, “सनातनियों का बहुत कम उम्र से ब्रेनवॉश हो रहा है।”
एक अन्य हैंडलर फरहान खान ने तो माता-पिता पर ही निशाना साधते हुए कहा, “इन बच्चों को क्या हो गया है, माता-पिता को शर्म आनी चाहिए है।”
इन टिप्पणियों से साफ है कि एक मासूम खिलौना और मुख्यमंत्री की ‘पढ़ने’ की सलाह इन लोगों के लिए ‘आतंकवाद’ है, जबकि असली कट्टरपंथ में इनको ‘शांति’ दिखती है।
जब कट्टरपंथ की असली तस्वीर पर प्रोपेगेंडाई क्वीन आरफा आँख मूँद लेती हैं
ऑर्गेनाइजर की एक रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है कि कैसे कट्टरपंथ की असली जड़ों को छोटी उम्र से ही सीजा जाता है। रिपोर्ट बताती है कि कैसे छोटे बच्चों को ‘हम बनाम वे’ और ‘काफिर बनाम मोमिन’ के चश्मे से दुनिया देखना सिखाया जाता है। उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षा से दूर रखकर मदरसों में ऐसी जिहादी सोच वाली शिक्षा दी जाती है जो उनके दिमाग को केवल मजहबी दायरे तक सीमित कर देती है।
यही कारण है कि जब वे बड़े होते हैं, तो वे एक अच्छे नागरिक बनने बजाय एक कट्टरपंथी सोच के साथ विकसित होते हैं। इनका पहला प्रेम देश नहीं बल्कि मजहब होता है। यह वही मानसिकता है जो स्पेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों में भी ‘पत्थरबाजी’ और अस्थिरता का कारण बन रही है।
आरफ़ा खानुम की ‘चुनिंदा’ चुप्पी और मासूमियत की आड़ में कट्टरपंथ का जहर
सोशल मीडिया पर वायरल हुए ये दो Video सोचने को मजबूर कर देते हैं कि इस उम्र में इस तरह की सोच और बोली कैसे पैदा हो सकती है। और तथाकथित लिबरल पत्रकारों, विशेषकर आरफा खानुम शेरवानी के दोहरे मापदंडों की पोल खोलते हैं। जब एक मुस्लिम बच्चा हाथ में खिलौने की जगह नफरत की भाषा और सीने में चक्कू घोंपने की बात करता है, जब वह अपने देश के प्रधानमंत्री से ज्यादा दूसरे मुल्क के मजहबी नेता खामेनेई के लिए आँसू बहाता है, तो यह स्पष्ट है कि इन मुस्लिम बच्चों के दिमाग में बचपन से ही ‘राष्ट्रवाद’ के बजाय ‘मजहबी कट्टरपंथ’ का जहर घोल दिया जाता है।
Is the peace you are referring to? pic.twitter.com/C0m9D7WfH5
— Sougat Chakraborty (@sougat18) March 27, 2026
आरफा खानुम, जो अक्सर मानवाधिकारों और लोकतंत्र की दुहाई देकर सरकार को कोसने का कोई मौका नहीं छोड़तीं, इन Video पर अपनी आँखें मूंद लेती हैं। उनकी ‘निष्पक्ष’ पत्रकारिता को तब लकवा मार जाता है जब मुस्लिम बच्चे सरेआम योगी आदित्यनाथ को धमकी देते हैं और राम मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने या पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं। यह चुप्पी न केवल खतरनाक है, बल्कि उन ताकतों को शह देती है जो भारत की अगली पीढ़ी को मुख्यधारा से काटकर नफरत की भट्टी में झोंक रही हैं। सवाल यह है कि क्या आरफ़ा खानुम में इतनी हिम्मत है कि वे इस ‘कट्टरपंथी परवरिश’ पर सवाल उठा सकें।
“योगी बाबा जाएंगे, तब हम बताएँगे, हमारा पहले वाला दौर लौट आएगा, राम मंदिर गिराकर मस्जिद बनाएंगे”
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) March 28, 2026
बच्चे मन के सच्चे 😎 pic.twitter.com/h2zOp8FAZx
बरेली का शर्मनाक सच: गाँधी प्रतिमा के साथ अश्लीलता और आरफा का ‘चुनिंदा मौन’
Brigadier Rudra Pratap Singh was visionary but still not visionary enough to imagine this
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) March 24, 2026
Gandhi ji would be so sad to see this 😢 pic.twitter.com/PA3tGzyKzF
आरफा खानुम, अपनी कुंठा का इलाज कराइए
आरफा खानुम की पत्रकारिता नहीं, बल्कि यह ‘एजेंडा’ की दुकान है। सीएम योगी ने उस बच्ची को पढ़ाई की प्रेरणा दी, जो राष्ट्र निर्माण का काम है। लेकिन आरफा को इसमें ‘आतंक’ नजर आया क्योंकि खानुम की अपनी सोच घटिया, कुंठित और नफरत से भरी हुई है। जब मुस्लिम बच्चे देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ जहर उगलते हैं, भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं, मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने की बात करते हैं, गाँधी जी की मूर्ति का अपमान करते हैं या हाथ में पत्थर उठाते हैं, तब खानुम का ‘हृदयविदारक’ दर्द कहीं गायब हो जाता है, तब मुँह से ना तो एक शब्द निकलता है और ना ही पोस्ट की जाती है।
आरफा जैसे लोग ही समाज के असली दुश्मन हैं, जो एक तरफ तो हिंदू प्रतीकों को गाली देते हैं और दूसरी तरफ अपनी कौम की बुराइयों को ‘अल्पसंख्यक अधिकार’ के नाम पर छुपाते हैं। योगी जी ने बच्ची को ‘किताब’ पकड़ने को कहा, जो खानुम को चुभ गया। असल में आरफा खानुम जैसे वामपंथियों को डर है कि अगर बच्चे पढ़-लिख गए तो इन जैसों की नफरत की दुकान बंद हो जाएगी। आपकी ये जमात है, जो एक मासूम खिलौने पर तो चिल्लाती है, लेकिन असली जिहाद और अश्लीलता पर मुँह में दही जमाकर बैठ जाती है।
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