नक्सलियों का अंत करने के लिए मोदी, अमित शाह की इच्छा शक्ति को नमन और सभी सुरक्षाबलों को धन्यवाद और साधुवाद

सुभाष चन्द्र

अमित शाह ने लगातार यह प्रण किया था कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा और कल उन्होंने संसद में घोषणा कर दी कि देश माओवाद से मुक्त हो गया। एक आतंक पिछले 60 साल से चला आ रहा था लेकिन अधिकतम समय सत्ता में रही कांग्रेस वो नहीं कर सकी जिसकी आवश्यकता थी जो अब मोदी सरकार ने की यह केवल मोदी सरकार की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है। 

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याद कीजिए 6 अप्रैल, 2010 को जब दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने 76 CRPF के जवानों की निर्मम हत्या की थी और JNU के छात्रों ने जिनमें प्रमुख था कन्हैया कुमार जश्न मनाया था आज वो कन्हैया कुमार कांग्रेस की NSUI का अध्यक्ष है याद कीजिए 25 मई, 2013 को जब छत्तीसगढ़ के बस्तर में कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ला के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया और 11 जून को उनकी मौत हो गई कांग्रेस कुछ नहीं कर सकी

अमित शाह ने याद दिलाया कि 172 जवानों को मारने वाले खूंखार माओवादी हिडमा के मारे जाने पर उसके समर्थन में इंडिया गेट पर प्रदर्शन हुआ जिसमें नारे लगे कि “तुम कितने हिड़मा मारोगे, हर घर से हिड़मा निकलेंगे राहुल गांधी ने वह वीडियो पोस्ट किया और ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच साझा किया कभी हर घर से अफजल निकाला जाता था कभी हिड़मा और हाल ही में खामनेई भी हर घर से निकालने की बात कही गई है कांग्रेस, CPI और CPM हमेशा माओवादियों के साथ खड़ी हुई कांग्रेस का हर नेता ही हिड़मा ही लगता है

बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुए इस नक्सली आतंक ने 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान ली और पिछले 12 वर्ष में 10 हजार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया अमित शाह ने याद दिलाया कि मनमोहन सिंह ने भी माना था कि कश्मीर और पूर्वोत्तर से भी बड़ी चुनौती माओवाद है लेकिन कांग्रेस ने उसके खात्मे के लिए कुछ नहीं किया

जब जब भी माओवादी हिंसा होती थी टीवी चैनल्स पंचायत लगाते थे और कथित बुद्धिजीवी माओवादियों की गरीबी का रोना रोते थे गरीब थे लेकिन आधुनिक हथियारों से लोगों की हत्या करते थे CPI और CPM से अलग चीन ने नक्सली खड़े किये और आज एक यूट्यूब चैनल पर डॉ मनीष कुमार ने सही कहा कि माओवाद का खत्म होना असल में चीन की हार है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी जड़ ख़त्म नहीं हुई है 

माओवाद की जड़ ख़त्म करने के लिए अर्बन नक्सलों पर प्रहार करना होगा जिन्हे कभी चंद्रचूड़ ने बचा लिया था और कहा था “"Dissent is the safety valve of democracy. If you don't allow safety valve, pressure cooker will burst," मतलब अर्बन नक्सल की आवाज़ को उन्होंने Dissent कहा जिसे बढ़ने देना चाहिए

आज कई न्यूज़ पोर्टल हैं जो कथित तौर पर अर्बन नक्सलों के समर्थन में खड़े रहते हैं The Wire, Caravan, The Print, Scroll.In और The Quint जैसो पर साम दाम दंड भेद की नीति से प्रहार करना जरूरी है

अमित शाह का सुरक्षा बलों की प्रशंसा करना सराहनीय है सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया देश से माओवाद के कलंक को मिटाने में वे सभी सुरक्षाबल साधुवाद के पात्र हैं 

जय हिंद! भारत माता की जय!

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