राहुल गांधी और विपक्ष इज़रायल के विपक्ष की चरणों की धूल भी नहीं है; कांग्रेस के एक बार मंसूबे धरे रह गए

सुभाष चन्द्र

Strait of Hormuz बंद होने से कांग्रेस की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था कि अब तो भारत को तेल आना बंद हो जाएगा और पेट्रोल के दाम आसमान छूने लगेंगे, फिर मौका मिलेगा मोदी पर हमला करने का। एक कथित राजनीतिक विश्लेषक तो कह रहा था कि पेट्रोल की कीमत 5000 रुपए लीटर हो जाएगी सुबह एक खबर भी दी गई कि ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूस से तेल खरीद पर आपत्ति की है लेकिन कांग्रेस और विपक्ष का Bad Luck देखो, अमेरिका ने भारत और अन्य सहयोगियों के रूस से तेल खरीद पर 30 दिन के लिए रोक हटा दी है, यानी मजे से तेल खरीद सकते हैं हाय हाय अब मोदी को कैसे तोड़ेंगे!

India Today पर राजदीप सरदेसाई ने इज़रायल के विपक्ष के नेता Yair Lapid को एक इंटरव्यू में घेरने की कोशिश करते हुए सवाल किया कि क्या आप ईरान में इज़रायल की कार्रवाई का समर्थन करते हैं? राजदीप ने सोचा था शायद Lapid भी राहुल गांधी है जो नेतन्याहू पर बरस पड़ेगा लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा Lapid ने जवाब दिया अमेरिका और इज़रायल ने जो किया वह सही है और पूरा इज़रायल युद्ध में जीत चाहता है राजदीप ने फिर पूछा कि जीत का क्या मतलब है, खामनेई की मौत या ईरान में सत्ता परिवर्तन? इसका जवाब सुनकर राजदीप की हवा निकल गई Lapid ने कहा ईरान इज़रायल का अस्तित्त्व मिटाना चाहता है और हम उसके पास कोई ऐसा हथियार नहीं छोड़ सकते जो इज़रायल को खतरे में डाल दे

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इसी तरह इंडिया टुडे के ही एक अन्य पत्रकार ने पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett को उलझाने की कोशिश की उसने भी पूछा आप नेतन्याहू को ईरान के साथ युद्ध में समर्थन करते हैं? Naftali ने भी उसे टका सा जवाब दिया कि हमारे नेतन्याहू से मतभेद हैं लेकिन इज़रायल की हर पार्टी और जनता किसी भी कीमत पर ईरान पर विजय देखना चाहते हैं

ऐसा होता है विपक्ष जबकि हमारे देश में राहुल गांधी और समूचा विपक्ष हर विषय पर मोदी को गाली बकने से बाज़ नहीं आता

पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के इज़रायली संसद में भाषण से पहले जब नेतन्याहू ने भाषण शुरू किया तो Yair Lapid और उनकी पार्टी के सांसद उठ कर चले गए लेकिन जैसे मोदी ने भाषण शुरू हुआ सभी सांसद वापस आ गए हमारे मीडिया चैनल्स और ANI जैसी News Agency ने भी ढोल पीट दिया कि इज़रायल के विपक्ष ने मोदी का बहिष्कार कर दिया

जबकि संसद कार्यवाही देखने जब भी विदेशी आए भारत विरोधियों के गुलाम राहुल और INDI गठबंधन चील-कौओं की तरह चीखता दिखाई दिया। दूसरे, जनता को इस ग़लतफ़हमी से भी बाहर आना चाहिए कि मीडिया गोदी-मीडिया है। हकीकत यह है बेपेंदी मीडिया आज भी कांग्रेस और INDI गठबंधन का गुलाम है, सिर्फ अपनी TRP के चक्कर में मोदी-मोदी चिल्लाता है। वरना कांग्रेस के खिलाफ इतना बारूद है कि मीडिया अगर उछाले तो कांग्रेस तो क्या सारा INDI गठबंधन जनता में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा।       

Lapid और उसकी पार्टी ने दिल से मोदी का भाषण सुना और उन्होंने कहा कि हमारा आपसे तो कोई विरोध था ही नहीं हमने अपने स्पीकर और सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट किया था क्योंकि उन्होंने देश के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को इस सभा में नहीं बुलाया जहां आपने अपनी बात रखनी थी भारत और इज़रायल की मैत्री तो अटूट है 

भाषण समाप्त होने के बाद मोदी सभी सांसदों से मिले और सबसे पहले Lapid के साथ गर्मजोशी से गले मिले 

अमेरिकी संसद में भी जब मोदी का एक बार भाषण हुआ था, तब भी पक्ष-विपक्ष से सभी सांसद उनसे हाथ मिलाने को आतुर थे और उनमें वे भी शामिल जो मोदी के संसद में बोलने पर आपत्ति जता रहे थे

मेरा ख्याल है राहुल गांधी और विपक्ष के सभी नेता इज़रायल के विपक्ष से कभी कुछ नहीं सीख सकते इज़रायल के विपक्ष के लिए देश पहले है और भारत के विपक्ष के लिए देश की कोई कीमत नहीं है आज हर चैनल पर विपक्षी नेता ऐसे चीख रहे हैं जैसे पागल हो गए हों खामनेई के गम में और जैसे मोदी ने ही खामनेई को मारा हो

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