सोनिया गांधी, कांग्रेस और विपक्ष क्या सुन्नी देशों में मुसलमानों और भारतीयों का नरसंहार चाहते हैं?

सुभाष चन्द्र

युद्ध अमेरिका और इज़रायल का ईरान के खिलाफ हो रहा है जिसमें मारा गया खामनेई जो कभी भारत के पक्ष में नहीं रहा भारत तो छोड़ो, उसने अपने ईरान में भी लोगों को कल्पना से परे यातनाएं दी लेकिन उसे सोनिया गांधी और समूचा विपक्ष “पीड़ित” (victim) बना कर पेश कर रहे है। वो भूल जाते हैं कि खामनेई भी नेतन्याहू और ट्रंप के साथ वही करता जो उसके साथ हुआ

और अभी भी ईरान धमकी दे रहा है कि वह इज़रायल को दुनिया के नक़्शे से मिटा देगा और नेतन्याहू की हत्या कर देगा

कांग्रेस की यहूदी और हिंदुओं से जानी दुश्मनी है आज ईरान की पहुंच अमेरिका तक नहीं है तो वह सुन्नी देशों में अमेरिका के अड्डों पर हमले कर रहा है यानी सोनिया गांधी, कांग्रेस और विपक्ष को सुन्नी मुसलमानों के नरसंहार से कोई गुरेज नहीं है इतना ही नहीं खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों का भी ईरान नरसंहार करे तो उससे भी इन लोगों को बुरा नहीं लगेगा 

UAE में 45 लाख, सऊदी अरब में 27 लाख, ओमान में 6.5 लाख और बहरीन में 3.5 लाख, कतर में 30 लाख में से 8.5 लाख, कुवैत के 50 लाख में 10 लाख भारतीय रहते हैं 

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दूसरी तरफ ईरान के साथ भारत का व्यापार केवल $1.68 बिलियन है जबकि सऊदी अरब के साथ $ 41.88 बिलियन; UAE के साथ $ 100 बिलियन; कुवैत के साथ $ 10.22 बिलियन;

क़तर के साथ $ 19 बिलियन; ओमान के साथ $ 10.61 बिलियन और बहरीन के साथ $ 1.64 बिलियन डॉलर  व्यापार है 

कांग्रेस, विपक्ष और फर्जी गांधी परिवार चाहता है ऐसे देशों से व्यापारिक संबंध तोड़ कर हम ईरान के साथ खड़े हो जाएं और लाखों भारतीयों का जीवन खतरे में डाल दें जबकि कोई मुस्लिम देश भी ईरान के साथ नहीं खड़ा है मनमोहन सिंह के समय सुपर प्राइम मिनिस्टर सोनिया गांधी के समय में भारत सरकार ने 2011-12 में अमेरिका के UNO में तीन प्रस्तावों पर ईरान के खिलाफ वोट दिया था आज सोनिया गांधी परेशान है कि मोदी ईरान के पक्ष में क्यों नहीं बोल रहे है और उसकी मौत पर कोई बयान भी क्यों नहीं दिया लेकिन वह भूल रही है है कि 2006 में सद्दाम हुसैन के और 2011 में गद्दाफी के मारे जाने पर सोनिया सरकार खामोश रही थी थी जबकि इराक और लीबिया से हमारे संबंध ख़राब भी नहीं थे वैसे भारत के विदेश सचिव ईरान दूतावास में जाकर शोक प्रकट कर आये हैं

अमेरिका और इज़रायल से बदला लेने के लिए ईरान खाड़ी देशों में किसी हद तक भी हमले कर सकता है और सुन्नी मुसलमानों और भारतीयों का नरसंहार कर सकता है लगता है वह सोनिया, कांग्रेस और विपक्ष के लिए ख़ुशी की बात होगी

आज भारत में शिया मुस्लिम तो बोल रहे हैं लेकिन ईरान के सुन्नी देशों पर हमले पर भारत के सुन्नी क्या सोच कर खामोश हैं? विपक्ष को तो बस One Point Programme है, मामला कुछ भी हो मोदी की गर्दन नापी जाए जब क़तर में 8 भारतीयों को फांसी की सजा हुई थी तब ये लोग उनकी फांसी की प्रतीक्षा कर रहे थे कि उधर फांसी हो और इधर मोदी को बदनाम कर दें लेकिन मोदी उन्हें सुरक्षित निकाल लाया और विपक्षी दलों के मंसूबों पर पानी फिर गया

सौ बात की एक बात है भारत का कोई भी शत्रु हो, वो कांग्रेस को प्रिय होता है लेकिन अब कांग्रेस को प्रतीक्षा करनी चाहिए जब पाकिस्तान भी इज़रायल के निशाने पर होगा जो अभी अफगानिस्तान और बलूचों की मार झेल रहा है अभी ईरान के लिए बहने वाले आंसू पाकिस्तान के लिए बचा कर रखो 

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