सोनिया गांधी जो प्रधानमंत्री मोदी के ईरान पर कुछ ना बोलने पर विलाप कर रही है, उसका जवाब यह है: भारत की चुप्पी ही इस युद्ध में सबसे ऊँचा बयान है

सुभाष चन्द्र

"2011 में जब लीबिया में नाटो हमलों के बीच भागते समय मुअम्मर गद्दाफी की हत्या हुई थी, तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। उस समय भारत और लीबिया के बीच मजबूत संबंध थे वर्ष 2004 से 2007 के बीच भारत के सात मंत्रियों ने लीबिया का दौरा किया था, जिनमें तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी भी शामिल थे इसके बावजूद गद्दाफी की मृत्यु पर न तो कोई औपचारिक शोक संदेश जारी किया गया और न ही कोई तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई उस समय न तो 'नैतिक जिम्मेदारी' पर भाषण दिए गए और न ही 'सभ्यतागत संबंधों' का हवाला देकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया"

खामनेई अब नहीं रहे

अमेरिका और इजरायल ने मध्य-पूर्व की तस्वीर बदल दी

और भारत? कुछ नहीं बोला

न हमलों की निंदा,

न खामनेई के लिए शोक-संदेश,

न “हम ईरान के साथ हैं” का बयान

पूर्ण मौन

लोग पूछ रहे हैं: क्यों?

लेखक 
चर्चित YouTuber 
यह है असहज करने वाला सच

ईरान कभी भारत का मित्र नहीं था कभी भी नहीं

उसने मित्रता का अभिनय किया

मेज़ पर मुस्कुराया

चाबहार में भारत के निवेश का लाभ उठाया

दशकों तक भारत की सद्भावना को अपने हित में इस्तेमाल किया

और फिर क्या?

हर बार जब पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों ने भारतीय धरती पर भारतीयों का नरसंहार किया, ईरान मौन रहा

हर बार जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, ईरान ने ओआईसी में भारत की निंदा की

कश्मीर के मुद्दे पर?

ईरान हर बार पाकिस्तान के साथ खड़ा हुआ

हर एक बार

चालीस वर्षों तक ईरान ने इस्लामी एकजुटता को हथियार की तरह इस्तेमाल किया

और उस हथियार का निशाना अक्सर भारत ही रहा

भारत ने हर बार यह याद रखा

यह चुप्पी कूटनीति नहीं है

यह स्मृति है

वह शासन, जिसने भारत की आतंकरोधी कार्रवाई को “आक्रामकता” कहा, अब समाप्त हो चुका है

वह सर्वोच्च नेता, जिसने 1.4 अरब भारतीयों के साथ आतंकवाद के विरुद्ध कभी खुलकर साथ नहीं दिया, अब नहीं रहा

और मोदी ने एक भी कूटनीतिक आँसू नहीं बहाया

यह कोई चूक नहीं है, यह एक निर्णय है

जो मौन में सुनाया गया — किसी भी प्रेस विज्ञप्ति से अधिक मुखर

लेकिन अधिकांश विश्लेषक एक बात समझ नहीं पा रहे हैं

भारत केवल इस युद्ध को देख नहीं रहा है

भारत उस स्थिति की रूपरेखा तैयार कर रहा है जो इसके बाद बनेगी

एक कठोर सत्य है, जिसे नकारना आसान नहीं

यह लेख किसी का whatsapp पर मिला है 

खामनेई का खुद का बयान भी सुनिए -

20 अगस्त 2018 को खामेनेई का ट्विटर पर संदेश

“प्रिय हज यात्रियों,

इस्लामिक उम्माह (मुस्लिम समुदाय) के लिए,

सीरिया, इराक, फिलिस्तीन, अफ़ग़ानिस्तान, यमन, बहरीन, लीबिया, पाकिस्तान, कश्मीर और म्यांमार तथा दुनिया के अन्य हिस्सों में पीड़ित लोगों के लिए दुआ करना न भूलें

और आप अल्लाह से प्रार्थना करें कि वह अमेरिका और अन्य घमंडी शक्तियों तथा उनके समर्थकों के हाथ काट दे”

आज ईरान स्वयं इराक और बहरीन पर हमले कर रहा है

ऐसे में भारत का चुप रहना क्या गलत है?

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