ममता का आचरण कोई नई बात नहीं है लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर राजनीति करने के आरोप से घटिया बात नहीं हो सकती

सुभाष चन्द्र

पिछले 12 साल से विपक्षी दलों के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री मोदी का उनके राज्यों के दौरों पर  बहिष्कार करके उनका अपमान करते रहे हैं लेकिन इस बार ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बहिष्कार करके मर्यादा की सभी सीमाएं तोड़ दी राष्ट्रपति मुर्म सिलीगुड़ी में विश्व आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने गई थी लेकिन न तो उनके स्वागत के लिए ममता बनर्जी गई और न उनका  कोई मंत्री गया इससे बड़ा घोर अपमान राष्ट्रपति का हो नहीं सकता जो स्वयं के आदिवासी महिला है। 

विश्व आदिवासी सम्मेलन के आयोजन में भी क्या राजनीति हो सकती है जिससे ममता बनर्जी घबरा गई उन्होंने कहा कि “माननीय राष्ट्रपति महोदया हम आपका आदर करते हैं, लेकिन चुनाव के दौरान भाजपा के इशारे पर राजनीति न करें” ममता संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को भी भाजपा का एजेंट बताती है और अब देश के सर्वोच्च पद पर बैठी राष्ट्रपति को भी भाजपा का एजेंट बता दिया प्रधानमंत्री ने सही कहा है कि ममता के अहंकार ने आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान किया है ममता का राष्ट्रपति के प्रति आदर किसी ढकोसले से कम नहीं है

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अपने स्वभाव से शालीन और शांत रहने वाली द्रौपदी मुर्मू जी को भी कल कहना पड़ गया कि ममता मुझे बंगाल में आना ही नहीं देना चाहती और सम्मेलन में आदिवासियों को आने से रोका गया 

ममता हो या विपक्ष के अन्य मुख्यमंत्री हों, वे अक्सर प्रधानमंत्री के राज्य के दौरों में उनका बहिष्कार करते हैं 8 से 10 मुख्यमंत्री तो ऐसे हैं जो नियमित रूप से नीति आयोग की बैठकों  बहिष्कार करते हैं जबकि आयोग ही उनके राज्यों की वित्तीय समस्याओं को हल करने के लिए धन उपलब्ध करता है कुछ और किस्से हैं प्रधानमंत्री के बहिष्कार के

-तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 5-6 बार मोदी की state visit पर प्रोटोकॉल के अनुसार उनका स्वागत नहीं किया; आज क्या हुआ, मिट्टी में मिल गया;

-ममता बनर्जी ने खुद प्रधानमंत्री के बंगाल दौरों पर उनके अगुवाई करने की जरूरत नहीं समझी;

-6 अप्रैल, 2025 को तमिलनाडु के CM स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी के रामेश्वरम में पमबम ब्रिज के उद्घाटन में गायब रहे और ऊटी जाने का बहाना बना दिया;

-27 अप्रैल, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना जैसे गंभीर विषय पर मीटिंग में भी केरल के मुख्यमंत्री विजयन गायब रहे याद रहे सबसे ज्यादा मौतें केरल में हुई थी और मुख्यमंत्री ने मुस्लिमों के समारोहों पर कोई नहीं लगाई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट के मोदी विरोधी जजों ने स्वीकृति दी थी

-मई 2023 में बंगाल, दिल्ली, पंजाब, तेलंगाना, केरल और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की Governing Council का बहिष्कार किया;

-जुलाई, 2024 में 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग का बहिष्कार किया

इस आचरण का कारण एकमात्र है और वह है नरेंद्र मोदी से “नफरत” लेकिन जब इनके राज्यों को पैसे की जरूरत पड़ती है तो नाक रगड़ने आते दिल्ली में मोदी के दरबार में  फिर भी वह उनके साथ भेदभाव नहीं करता 

बंगाल में 2011 की जनगणना के अनुसार 53 लाख से ज्यादा आदिवासियों की आबादी है क्या इसके लिए कोई सम्मेलन भी नहीं हो सकता? ममता की दुश्मनी मोदी से है लेकिन राष्ट्रपति को तो उसे नहीं घसीटना चाहिए था अब TMC और ममता का दिया बंगाल में बुझना ही चाहिए लेकिन एक फैक्टर है जो ममता को सत्ता में रख सकता है और वह है “cut money” लोग जिसके आदि हो चुके हैं और उन्हें यह डर रहता कि भाजपा सरकार आने पर उनका यह धंधा बंद हो जाएगा और पिछले चुनाव में उसे 48% वोट मिले

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