ममता राज का हिंदू विरोध फिर उजागर, ‘जिहादियों’ ने भगवान राम की मूर्ति का सिर काटा, TMC नेता बोले- राम केवल उत्तर भारत के देवता


पश्चिम बंगाल सरकार का हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर एक्सपोज हो गया है। रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व से ठीक पहले पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना ने स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत किया है। किसी भी धर्म, प्रतीक या आस्था से जुड़ी वस्तु पर हमला केवल एक स्थानीय घटना नहीं होती, बल्कि उसका प्रभाव व्यापक सामाजिक मनोविज्ञान पर पड़ता है। बेहद चिंताजनक पहलू यह भी है कि ममता राज का हिंदू विरोधी चेहरा पहली बार उजागर नहीं हुआ है। इससे पहले भी मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ममता बनर्जी और तृणमूल सरकार कई बार हिंदू आस्था पर हमला कर चुकी हैं। यहां तक कि उन्हें जय श्रीराम के नारे तक पर आपत्ति रही है और अब उनके ही नेता और पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम को सिर्फ उत्तर भारत का भगवान घोषित कर दिया है। एक तो पहले ही भगवान राम की मूर्ति का सिर काटने के कृत्य से हिंदू जनमानस आहत है, उस पर सिन्हा की टिप्पणी ने आग में घी का काम किया है। ऐसी घटनाएं और बयानबाजी न केवल धार्मिक संवेदनशीलता को झकझोरती हैं, बल्कि समाज में अविश्वास और तनाव की स्थिति भी पैदा करती हैं। इसलिए इस घटना को केवल एक आपराधिक कृत्य मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा।

रामनवमी के उत्सव से पहले नंदीग्राम में श्रीराम की मूर्ति का सिर काटा
पश्चिम बंगाल में हिंदू आस्था पर हमले का एक और मामला सामने आया है। राम नवमी के लिए तैयार की जा रही भगवान राम की एक मूर्ति के सिर को ‘जिहादी’ काटकर ले गए। यह घटना नंदीग्राम के ब्लॉक-2 के वेटुरिया बस स्टैंड की है जहाँ प्रभु श्री राम की मूर्ति लगभग तैयार हो चुकी थी। लेकिन इससे पहले ही मूर्ति का सिर काटकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, काम खत्म होने के बाद मूर्ति को वहीं बस स्टैंड पर छोड़ दिया गया था। जब अगली सुबह कारीगर लौटे तो उन्होंने देखा कि मूर्ति का सिर गायब है। कई लोगों ने इस घटना को सनातन हिंदू आस्था पर हमला बताया है। यह घटना उस समय हुई जब रामनवमी के उत्सव की तैयारियां अपने अंतिम चरण में थीं, जिससे स्वाभाविक रूप से लोगों में आक्रोश और असंतोष बढ़ा। विपक्षी नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सरकार पर सवाल उठाए, वहीं प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया। ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है कि दोषियों की शीघ्र पहचान हो और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, लेकिन ममता सरकार इस पर भी परदा डालने में लगी है।

राज्य में हिंदू मंदिरों और मूर्तियों पर हमले अब आम बात- सुवेंदु
नंदीग्राम के विधायक और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राज्य में हिंदू मंदिरों और मूर्तियों पर हमले अब आम हो गए हैं। इसके लिए उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार की ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ और प्रशासन की ‘शर्मनाक निष्क्रियता’ को जिम्मेदार ठहराया। घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई, जिसमें राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक ही है। असली मुद्दा यह है कि क्या राज्य की कानून-व्यवस्था ऐसी घटनाओं को रोकने और उनके बाद प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम भी है या नहीं।

राम केवल उत्तर भारतीयों के देवता, हम काली के भक्त – सिन्हा
नंदीग्राम में प्रभु श्रीराम की मूर्ति का सिर काटने की घटना इसलिए और चिंताजनक हो गई है, क्योंकि टीएमसी सरकार इसकी परवाह करने की बजाए प्रभु श्रीराम का अपना भगवान ही नहीं मानती। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने जहां इसकी कड़ी निंदा की है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता औरे पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा के बयान ने आग में घी का काम किया है। सिन्हा ने अपने विवादित बयान में कहा है कि रामचंद्र तो केवल उत्तर भारत के देवता हैं। सिन्हा ने उल्टे भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में रामचंद्र नहीं चलेगा। बंगाल के लोग तो मां काली के भक्त हैं। भाजपा नेताओं ने सिन्हा की बयान की आलोचना करते हुए इसे भगवान श्रीराम का अपमान बताया है। ऐसे में हर स्तर पर मुख्यमंत्री, सरकार और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि आस्था का सम्मान बना रहे और कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो।

ममता का राज हिंदू विरोधी घटनाओं के लिए रहा है कुख्यात
पश्चिम बंगाल में समय-समय पर धार्मिक स्थलों या प्रतीकों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों में मंदिरों में तोड़फोड़, मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने या धार्मिक जुलूसों के दौरान तनाव जैसी घटनाओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन घटनाओं की प्रकृति और कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द के लिए चुनौती बनती हैं। इसलिए इनका समाधान केवल राजनीतिक विमर्श से नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई से ही संभव है। लेकिन ममता सरकार ने अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते इनमें लापहवाही ही दिखाई है। किसी भी राज्य सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनके धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना होती है। चाहे घटना किसी भी धर्म से जुड़ी हो, प्रशासन को निष्पक्षता और तत्परता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। दोषियों की पहचान, गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है, ताकि यह संदेश जाए कि ऐसी घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुत्व विरोध की राजनीति की हदें पार कीं

पश्चिम बंगाल पिछले डेढ़ दशक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुत्व विरोध की राजनीति का गवाह रहा है। तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए खुलकर खजाना खोला है और इसमें राज्य की माली हालत की भी चिंता नहीं की है। अल्पसंख्यकों की राजनीति के लिए ममता सरकार ने सारी सीमाएं ही लांघ ली है और आंखें बंद कर इन पर पैसा लुटाया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी एक तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2010-11 में राज्य का जो अल्पसंख्यक बजट मात्र 472 करोड़ था, वह आज 5,600 करोड़ को पार कर चुका है। अल्पसंख्यक युवाओं का वोट बैंक पक्का करने के लिए करोड़ों रुपये का ऋण दिया गया है। खास बात यह कि तृणमूल सरकार ने इनसे ऋण वापसी पर कोई फोकस नहीं किया है। इतना ही नहीं इमामों और मुअज्जिनों के लिए मासिक मानदेय में भी कई गुना की वृद्धि की गई है। दूसरी ओर प्रभु श्रीराम के नाम से लेकर हिंदुत्व और सनातन विरोध के कई उदाहरण ममता बनर्जी के हैं। इससे यह शीशे की तरह साफ है कि तृणमूल सरकार ने अल्पसंख्यकों और घुसपैठियों को खूब पाला-पोसा है।

राम नाम मास्क बांटने पर बीजेपी नेता गिरफ्तार
राम नवमी के लिए तैयार की जा रही भगवान राम की एक मूर्ति के सिर को ‘जिहादी’ काटकर ले गए। यह घटना नंदीग्राम के ब्लॉक-2 के वेटुरिया बस स्टैंड की है जहाँ प्रभु श्री राम की मूर्ति लगभग तैयार हो चुकी थी। लेकिन इससे पहले ही मूर्ति का सिर काटकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, काम खत्म होने के बाद मूर्ति को वहीं बस स्टैंड पर छोड़ दिया गया था। जब अगली सुबह कारीगर लौटे तो उन्होंने देखा कि मूर्ति का सिर गायब है। कई लोगों ने इस घटना को सनातन हिंदू आस्था पर हमला बताया है।

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