लोकसभा बाधित और संवैधानिक संस्थाओं को आरोपित कर सुरमाभोपाली बन रहे राहुल गाँधी को नहीं मालूम की वह कांग्रेस के लिए बहादुरशाह ज़फर बन चुके हैं। अभी पांच राज्यों में हुए चुनावों के परिणाम भी आने शेष हैं। लेकिन exit poll भी कांग्रेस का डिब्बा गुल ही दिखा रहा है। असलियत तो मई 4 को सामने आएगी। बरहाल गुजरात ने राहुल की कांग्रेस और केजरीवाल की पार्टी को जो उनकी जगह होनी चाहिए पहुंचा दिया है।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एकतरफा जीत हासिल की है। खास बात यह है कि कुल 15 महानगरपालिकाओं में हुए चुनाव में भाजपा ने सिर्फ जीत ही नहीं बल्कि भारी बहुमत से विजय दर्ज की है। अब स्थिति ऐसी बन गई है कि इन 15 में से 10 महानगरपालिकाओं में आधिकारिक विपक्ष भी नहीं रहेगा।
आमतौर पर महानगरपालिकाओं की सामान्य सभा के संचालन के लिए अपने नियम होते हैं लेकिन सामान्य नियमों के अनुसार विपक्ष में बैठने के लिए कुल सीटों का कम से कम 10 प्रतिशत होना जरूरी होता है। फिलहाल स्थिति यह है कि केवल 5 महानगरपालिकाओं में ही कांग्रेस के पास 10% से अधिक सीटें हैं। इनमें अहमदाबाद, आनंद, भावनगर, गांधीधाम और वापी शामिल हैं।
ગુજરાતની તમામ 15 મહાનગરપાલિકાઓમાં ભાજપનો ભગવો લહેરાયો...
— ઑપઇન્ડિયા (@OpIndia_G) April 28, 2026
1. અમદાવાદ મહાનગરપાલિકા
અહીં ભાજપે ગત ચૂંટણી કરતા 1 સીટ વધુ એટલે કે 160 બેઠકો પર ભવ્ય જીત મેળવી છે... pic.twitter.com/jERkxP73zm
अहमदाबाद में कांग्रेस ने 192 में से 32 सीटें जीती हैं। आनंद में 52 में से 8, भावनगर में 52 में से 8, गांधीधाम में 52 में से 11 और वापी में 52 में से 11 सीटें कांग्रेस को मिली हैं। वहीं, BJP को अहमदाबाद में 160, आनंद में 43, भावनगर में 44, गांधीधाम में 41 और वापी में 37 सीटें मिली हैं।
10 नगर निगमों में कांग्रेस के पास 10% से कम सीट
इसके अलावा सूरत, वडोदरा, राजकोट, नडियाद, सुरेंद्रनगर, पोरबंदर, मोरबी, नवसारी, मेहसाणा और जामनगर महानगरपालिकाओं में कांग्रेस 10% सीटें भी हासिल नहीं कर पाई है। मोरबी और पोरबंदर में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली और BJP ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। सूरत, सुरेंद्रनगर और नडियाद में कॉन्ग्रेस को सिर्फ 1-1 सीट मिली है। नवसारी और जामनगर में कांग्रेस को 2-2 सीटें मिली हैं।
राजकोट में विपक्ष का दर्जा पाने के लिए जरूरी 8 सीटों के मुकाबले कांग्रेस के पास 7 सीटें हैं, जबकि मेहसाणा में 6 की जरूरत के मुकाबले कांग्रेस को 5 सीटें मिली हैं। इन सभी जगहों पर आम आदमी पार्टी (AAP) का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा और इसलिए संयुक्त विपक्ष बनने की भी कोई संभावना नहीं दिखती। AAP को सूरत में 4 और जामनगर में 2 यानी कुल 6 सीटें ही मिली हैं। सूरत में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सीटें मिलाकर भी विपक्ष के लिए जरूरी 10% आँकड़ा पूरा नहीं होता, जहाँ 120 में से भाजपा के पास 115 सीटें हैं।
हालाँकि यह नियमों की बात है। कई बार नियमों से अलग जाकर सत्तारूढ़ दल कांग्रेस को विपक्ष का पद दे देता है। पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जब सिर्फ एक सीट होने के बावजूद कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद दिया गया है।
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