तरुण हत्याकांड में नहीं मिली 2 मुस्लिम नाबालिगों को बेल, कोर्ट ने खारिज की याचिका


दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुई तरुण भुटोलिया की हत्या के मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने इस मामले में शामिल दो नाबालिग आरोपितों की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इनकी रिहाई से इलाके की शांति भंग हो सकती है और न्याय की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है।

कश्मीर से लेकर अब तक हुई पत्थरबाज़ी में एक बात खासतौर पर देखने को मिलती है कि बच्चे और महिलाएं आगे होती है ताकि उनको नासमझ मासूम आदि कहकर अपनी करतूत पर पर्दा डाल दिया जाए। अभी रामलीला ग्राउंड दिल्ली में अवैध निर्माण हटाने गए सरकारी कर्मचारियों पर की गयी पत्थरबाज़ी को बाहरी लोगों द्वारा क्षेत्र का माहौल बिगड़ने की बातों से गुमराह किया गया लेकिन गिरफ्तार हुए सभी स्थानीय कोई बाहरी नहीं। 

द्वारका स्थित बोर्ड ने 8 अप्रैल 2026 को अपने आदेश में कहा कि उत्तम नगर में अभी भी सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। ऐसे ‘संवेदनशील’ माहौल में आरोपितों को रिहा करना खतरनाक हो सकता है।

कोर्ट ने साफ किया कि मामले की जाँच अभी शुरुआती दौर में है, कई आरोपित फरार हैं और कुछ अहम सबूत मिलने बाकी हैं। ऐसे में बाहर आने पर आरोपित जाँच को प्रभावित कर सकते हैं।

यह दुखद घटना 4 मार्च 2026 यानी होली के दिन हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब तरुण के परिवार की एक बच्ची ने छत से गुब्बारा फेंका, जिसका पानी नीचे खड़ी एक पड़ोसी महिला पर गिर गया।

हिंदू परिवार ने तुरंत माफी भी माँगी, लेकिन मुस्लिम महिला के पक्ष ने करीब 15-20 लोगों को बुला लिया। जब हिंदू युवक तरुण बाइक से घर लौट रहा था, तब इस्लामी भीड़ ने उसे घेर लिया।

हमलावरों ने लोहे की रॉड, ईंट और पत्थरों से तरुण को बेरहमी से पीटा। परिजनों के मुताबिक, जब तरुण सड़क पर गिर गया, तब उसके सीने पर भारी पत्थर से वार किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान तरुण की मौत हो गई।

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