एक लाइन का प्रचार: “कांग्रेस और विपक्ष ने महिला आरक्षण रोक दिया”; 2029 तक सभी चुनावों में विपक्ष को धूल चटा देगा

सुभाष चन्द्र

यह बात राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने नारी शक्ति वंदन बिल के गिरने के बाद खुद कही कि हमने “महिला आरक्षण” रोक दिया। साथ में जो भी स्पष्टीकरण दिया, वो किसी काम का नहीं है, बस मुख्य बिंदु यह है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण रोका जिसमें अन्य विपक्षी दलों ने भी साथ दिया।

किसी को इस बात से मतलब नहीं है कि कांग्रेस ने परिसीमन से साथ जोड़ने के कारण यह बिल रोका, सत्य तो यह याद रहेगा महिलाओं को कि उनके अधिकार पर कांग्रेस और विपक्ष ने डाका डाला।

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं की सीटों में 33% आरक्षण देने का बिल लोकसभा ने 19 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया था और राज्यसभा में यह 21 सितंबर को सर्वसम्मति से पारित हुआ। राष्ट्रपति ने इसे 28 सितंबर को साइन किया। जो बिल विपक्ष की सहमति से पारित हुआ उसके अनुसार यह बिलकुल साफ़ था कि “यह महिला आरक्षण पहले परिसीमन के बाद लागू होगा जिस पर 2026 तक रोक लगी हुई थी।

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ऐसे में कांग्रेस और विपक्षी दलों का यह विलाप कि अब महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ क्यों जोड़ा गया, संसद की अवमानना है और ऐसा करके समूचा विपक्ष 2023 के अपने ही समर्थन से पारित बिल के प्रावधानों से मुकर गया। 

अब विपक्ष कुछ भी कहता रहे लेकिन सच तो जनता के सामने खुद विपक्ष ने रख दिया कि हमने महिला आरक्षण रोक दिया।

राहुल गांधी ने कहा सरकार वर्तमान 543 की संख्या पर ही 33% महिला आरक्षण तत्काल लागू करे, कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी। 

लोकसभा में 543 की संख्या कब तय हुई थी, उसका इल्म नहीं है राहुल गांधी को। यह संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय हुई थी। परिसीमन को पहले 1976 में और फिर 2001 में 25 - 25 वर्ष के लिए रोक दिया गया था और यह अवधि अब 2026 में समाप्त हुई जिसके बाद पहला परिसीमन होना है। 

क्या राहुल गांधी चाहता है आरक्षण 1971 की 543 सीटों पर दिया जाए जब भारत की जनसंख्या 54 करोड़ 79 लाख थी जो अब बढ़ कर 140 करोड़ के पार है। ये आज की जनता को कैसे बराबरी का अधिकार दे सकता है। और फिर 543 में 33% महिलाओं के सीट का मतलब है 180 सीट महिलाओं की हो जाएंगी। राहुल गांधी के खाली दिमाग ने इसका ख्याल नहीं किया कि ऐसा करने से कहीं उसकी रायबरेली की सीट भी महिला कोटे में न चली जाए।

लोकसभा की सीटें जनसंख्या के आधार पर ही तय होनी चाहिए। आज देश में 127 सीट हैं जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं। सीटों में वोटरों का संतुलन किस कदर बिगड़ा हुआ है उसका अनुमान इस बात से लगता है कि सबसे ज्यादा वोटर किस सीट पर हैं और सबसे कम किस सीट पर।

सबसे अधिक वोटर वाली सीट -

-मल्काजगिरी (तेलंगाना) - 37.80 लाख;

-बेंगलुरु उत्तर (कर्नाटक) - 32.15 लाख;

-गाजियाबाद (उ प्र) - 29.48 लाख;

-गौतमबुद्ध नगर (उ प्र) - 26.81 लाख; और 

पश्चिमी दिल्ली - 25.92 लाख 

ये उन 127 सीटों में शामिल हैं जहां वोटर 20 लाख से ज्यादा हैं। 

सबसे कम वोटर वाली सीट -

-लक्षद्वीप - 58 हजार;

-दमन और दीव - 1.34 लाख;

-लद्दाख - 1.90 लाख;

-दादरा नगर हवेली - 2.83 लाख; और 

अंडमान निकोबार -  3.15 लाख 

सीटों में वोटरों का ऐसा अनुपात किसी दृष्टि से उचित नहीं है और इसके लिए परिसीमन जरूरी है लेकिन विपक्ष ने आंखे और दिमाग बंद कर लिए क्योंकि महिला आरक्षण रोकना था।  

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