केंद्र सरकार की लापरवाही से राहुल गांधी 26 साल से कथित रूप से ब्रिटिश नागरिक होकर संसद में बैठा है; इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे स्थायी रूप से बैठने का प्रबंध कर दिया

सुभाष चन्द्र

कितने वर्षों से राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता का मामला लटका हुआ है और हद तो तब हो गई थी जब मार्च में लखनऊ के MP/MLA कोर्ट ने 27 घंटे की सुनवाई के बाद विग्नेश शिशिर की याचिका यह कह कर खारिज कर दी कि वह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। क्या मज़ाक बना दिया था कानून का जब अधिकार क्षेत्र में नहीं था तो 27 घंटे सुनवाई क्यों की? कोर्ट की ऐसी ही दोगली नीतियों के चलते गाँधी परिवार ऐश कर रहा है। जितनी FIR राहुल के खिलाफ है आज तक किसी भी LoP तो क्या सांसद के खिलाफ नहीं। किसी पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं। एक अदालत सजा देती है तो दूसरी जमानत देकर इसे कुछ भी बोलने का मौका दे देती हैं। क्या यही है हमारी न्यायप्रणाली? यह अदालतों द्वारा न्याय का खुला अपमान किया जा रहा है।  

ज्वलंत सवाल यह है कि अगर किसी आम नागरिक ने दोहरी नागरिकता ली होती क्या पुलिस, कोर्ट और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते? नहीं उस पर कानूनी कार्यवाही कर जेल में डाल दिया होता, लेकिन मुद्दा चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होने वाले होने की वजह से खामोश बैठे हैं। यही हाल सोनिया गाँधी का भी था जिसने कई वर्षों बाद भारतीय नागरिकता ली। इतना ही सोनिया ने तो कई चुनावों में गलत affadavit दिया। कभी कॉलेज गयी नहीं बता दिया कि फलां कॉलेज से डिग्री ली। जब डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी से शिकायत दर्ज की और सोनिया से जवाब मांगने पर बोली typing mistake हो गयी और मामला ठंठे बस्ते में डाल दिया गया परन्तु अगर यही गलती किसी अन्य सांसद ने की होती तो क्या चुनाव आयोग भी चुप्पी साधे रहता।      

अप्रैल 17 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी कहा है कि ट्रायल कोर्ट को देखना चाहिए था कि आरोपों से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है या नहीं लेकिन ऐसा नहीं किया गया

फिर ऐसे जज पर क्या कार्रवाई नहीं की जानी जाए? इतना गंभीर मामला और इस तरह लापरवाही से उड़ा दिया -क्या कोई सांठगांठ थी राहुल गांधी के साथ?

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अब याचिकाकर्ता शिशिर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की और हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज़ जमा करने को कहा गृह मंत्रालय ने सारे दस्तावेज़ 6 अप्रैल, को कोर्ट में पेश किए लेकिन उसके पहले ही साफ़ कर दिया कि वे गोपनीय दस्तावेज़ हैं और बंद कमरे में दिए जाएंगे 

कल हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता छिपाने के मामले में केस दर्ज करने के आदेश दिए कोर्ट ने कहा - प्रथमद्रष्टया यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) बनता है, इसलिए जांच जरूरी है और केस दर्ज होने के बाद राज्य सरकार चाहे तो केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंप सकती है

हाई कोर्ट के फैसले से राहुल गांधी का अभी कई वर्षों तक सांसद बने रहना तय हो गया (अगर चुनाव हार न जाए) केंद्र सरकार ने जब सारे दस्तावेज़ आपके सामने रख दिए और उन्हें देख ही तो कोर्ट को लगा होगा कि राहुल गांधी की नागरिकता तो ब्रिटिश है और तब ही तो कहा कि यह  प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध है मतलब सरकार के गोपनीय दस्तावेज़ों में राहुल के ब्रिटिश नागरिक होने के सबूत रहे होंगे तो फिर हाई कोर्ट को स्वयं ही उसे ब्रिटिश नागरिक घोषित कर देना चाहिए था लेकिन आदेश दिए जांच के

CBI जांच में क्या होगा? वही होगा जो अन्य मामलों में हो रहा है 8-8 या 10-10 साल से हो रहा है;

-CBI समन करेगी, जाएगा नहीं या कोर्ट में चुनौती देगा, लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक;

-अगर जांच पूरी भी हो गई तो चार्जशीट दायर होगी - उसे रद्द कराने के लिए फिर सभी कोर्ट्स में जाएगा;

-ट्रायल कोर्ट ने अगर समन जारी कर दिए तो उन्हें भी चुनौती देगा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जहाँ 3- 4 साल निकल जाएंगे याद होगा सेना के अपमान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन पर स्टे लगाया हुआ है और अभी 5 महीने की तारीख तय की हुई है 22 अप्रैल लेकिन उस दिन भी सुनवाई नहीं होगी क्योंकि बेंच के एक जज शबरीमला की सुनवाई में बैठे हैं जिसकी अंतिम सुनवाई 22 अप्रैल को होनी हैं;

-अगर अंत में सजा भी हो गई तो हाई कोर्ट से स्टे कराने के लिए अपील करेगा वहां से बात नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट तो है ही, जहाँ कोई गवई जैसा कांग्रेस परिवार के प्रति समर्पित जज सजा पर रोक लगा देगा और शायद रंजन गोगोई की तरह कह दे कि अगर ब्रिटिश कंपनी की फाइल में लिखा है तो साबित नहीं होता वो ब्रिटिश नागरिक है

कहने का तात्पर्य यह है सरकार के दस्तावेज़ों के आधार पर ही हाई कोर्ट को राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता पर निर्णय दे देना चाहिए था क्योंकि सारे तथ्य सरकार ने कोर्ट के सामने रख दिए थे अब CBI जांच को बीच में डाल कर केस को लंबा खींच दिया जिससे राहुल गांधी मौज लेता रहेगा 

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