जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की आत्मा मर गई या किसी ने खरीद लिया; हाई कोर्ट का जज बिना सोचे आदेश कैसे दे सकता है?

सुभाष चन्द्र 

कल मैंने अपने लेख में विस्तार से लिखा था कि जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी को सरकार और विग्नेश शिशिर के दस्तावेज़ देख कर लगा था कि प्रथम दृष्टया राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है तो FIR दर्ज करने और CBI जांच के आदेश देने की क्या जरूरत थी? खुद ही निर्णय दे देना चाहिए था कि वह ब्रिटिश नागरिक है। फिर उस आदेश को राहुल गांधी चुनौती देता फिरता

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लेकिन जस्टिस विद्यार्थी ने अपना आदेश रायबरेली की ट्रायल कोर्ट और जिला अधिकारी तक पहुँचने और अपने हस्ताक्षर करने से पहले ही रोक दिए और राहुल गांधी को नोटिस जारी कर 20 अप्रैल की सुनवाई तय कर दी  क्या राहुल गांधी इतना शरीफ आदमी है कि वो एक दिन में आपके नोटिस का जवाब दे देगा? 

कल हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश में कोर्ट ने कहा है कि-

”शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याची समेत केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से पूछा गया था कि क्या इस मामले में विपक्षी संख्या एक(राहुल गांधी) को नोटिस जारी किए जाने की आवश्यकता है अधिवक्ताओं ने बताया कि नोटिस जारी किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, तत्पश्चात खुली अदालत में FIR का विस्तृत आदेश पारित कर दिया गया कोर्ट ने कहा कि बिना राहुल को नोटिस जारी किए मामले को निर्णीत करना उचित नहीं है”

कैसे न्यायाधीश है आप सुभाष विद्यार्थी जी जो याची, केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं का कहना मान कर आपने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं समझी? अपना दिमाग लगाए बिना आदेश पारित कर दिया और इसका मतलब यही निकलता है कि आप उन अधिवक्ताओं की बात से सहमत थे कि नोटिस की जरूरत नहीं है 

अब राहुल गांधी को नोटिस जारी करने का दूसरा आदेश देने के लिए क्या आपकी आत्मा मर गई या किसी ने आपके पहले आदेश के बाद “डोज़” दे दी जो अपना ही आदेश रोक दिया? शिशिर ने आपके पास लखनऊ के MPMLA कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी जहाँ राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिला था लेकिन एक सुनवाई में उसके चेलों ने हंगामा खड़ा कर दिया था और शायद उसी दबाव में जज ने 27 घंटे की सुनवाई के बाद कह दिया कि यह मामला मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है 

ऐसा ही प्रकरण जस्टिस सुभाष विद्यार्थी आप क्या अपनी अदालत में भी देखना चाहते हैं? राहुल गांधी कल तो किसी हालत में जवाब नहीं देगा और कम से कम एक महीना का समय मांगेगा अब समय कितना देना है ये पहले से सोच कर रखें या क्या उसके लिए भी किसी के निर्देश आएंगे, लेकिन एक बात याद रखिए, आप याची और केंद्र सरकार के गोपनीय दस्तावेज़ों से मान चुके हैं कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता थी

अवलोकन करें:-

केंद्र सरकार की लापरवाही से राहुल गांधी 26 साल से कथित रूप से ब्रिटिश नागरिक होकर संसद में बैठा ह
केंद्र सरकार की लापरवाही से राहुल गांधी 26 साल से कथित रूप से ब्रिटिश नागरिक होकर संसद में बैठा ह
 

इसलिए कल अगर राहुल गांधी जवाब नहीं देता तो उसे सीधा “कारण बताओ नोटिस दीजिए कि सभी दस्तावेज़ों के मद्देनज़र कोर्ट ने पाया है कि आप ब्रिटिश नागरिक थे और आपने भारतीय नागरिकता भी नहीं छोड़ी थी, इसलिए क्यों न आपकी भारत की नागरिकता रद्द कर दी जाए”

अगर आप ऐसा नहीं करते तो माना जाएगा कि आपने कांग्रेस के दबाव में कार्य किया और आप राहुल गांधी को आरोप मुक्त करना चाहते हैं

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