बंगाल में प्रथम चरण के चुनाव में रिकॉर्ड 92.88 % छुटपुट घटनाओं को छोड़ कर शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग (खासकर ज्ञानेश कुमार जी), सुरक्षा बल और केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बधाई के पात्र हैं।
वास्तव में तत्कालीन चुनाव आयुक्त TN Seshan ने जो गति चुनाव आयोग को दी उसे वर्तमान आयुक्त ने कहीं आगे बढ़ा दिया। शेषन से ज्यादा विरोध ज्ञानेश का हुआ। लेकिन अपनी सीमाओं में रहते हर काम को बखूबी निभा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने जिस तरह SIR का काम संभाला और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आयोग को पूरा समर्थन मिला उसने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है चुनाव में। आयोग ने केंद्र सरकार से जितने भी सुरक्षा बल मांगे शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए वे उसे मिले।
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CAPF की 2500 कंपनियां तैनात की गई और एक कंपनी में 100 से 110 सुरक्षाकर्मी होते हैं, मतलब कुल मिलाकर 2.5 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। शायद इसलिए ही 92.88% रिकॉर्ड मतदान हुआ जो पिछले चुनाव के 82.30% से 10% ज्यादा है। इसका श्रेय आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुरक्षाबलों, मोदी सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट को भी जाता है।
सुरक्षाबलों की वजह से मतदाता भयमुक्त होकर मतदान कर सके।
अभी दूसरे चरण का चुनाव होना शेष है लेकिन पिछले चुनावों से तुलना की जाए तो हम देखते हैं ममता को 2016 के मुकाबले 2021 में मात्र 3.11% वोट ज्यादा मिले थे (यानी 48.02%) और सीट बढ़ी थी केवल 4। दूसरी तरफ भाजपा को 2016 के मुकाबले 2021 में 28% वोट ज्यादा मिले थे (यानी 38.15%) लेकिन सीट बढ़ी थी 74 (3 से 77 हो गई)।
2011 में 84.33% मतदान भी रिकॉर्ड था और ममता CPM को हटा कर सत्ता में आई थी। अब रिकॉर्ड मतदान के बाद भाजपा भी ममता को सत्ता से हटा कर सत्ता में आ सकती है।
अगर दूसरे चरण में भी यही स्थिति रहती है और भाजपा के वोट 38% से 6-7% भी बढ़ गए तो सत्ता की चाबी उसके हाथ में होगी। एक फैक्टर और नज़र आया है कि हुमायूँ कबीर का जिस तरह टकराव हुआ है TMC के साथ, उसे देख कर लगता है मुस्लिम वोट निश्चित रूप से बंटा है, जबकि हिंदू वोट एकजुट हुआ है। SIR में 91 लाख वोट कटने से ममता का वोट गिरना तय है लेकिन कितना गिरेगा यह समय ही बताएगा।
चुनाव आयोग के काम में कोलकाता हाई कोर्ट की तरफ से वोटिंग के एक दिन पहले अड़ंगा लगाया गया जब कोर्ट ने आयोग द्वारा चुनाव में गड़बड़ी फ़ैलाने वाले 800 संदिघ्द लोगो के लिए आदेश पर रोक लगा दी और सुनवाई की तारीख 30 जून तक के लिए उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी। उससे क्या फर्क पड़ना था जब भारी सुरक्षाबल तैनात हैं। 30 जून का क्या मतलब है जब चुनाव 29 अप्रैल को संपन्न हो जाना है।
कुल मिलाकर अनुमान यही लगाया जा सकता है बंगाल से ममता की विदाई तय है।

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