साभार - न्यूज 18
पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि जिस किताब को उन्होंने खुद नहीं देखा, उस पर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने साफ किया कि रक्षा मंत्रालय (MoD) की मंजूरी के बिना किताब प्रकाशित नहीं हो सकती थी और प्रकाशक ने नियमों का पालन किया है।
जनरल नरवणे ने यह भी कहा कि अगर किसी ने गैर-कानूनी तरीके से PDF या सामग्री हासिल की है, तो उस पर वह टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने आज के दौर में साइबर क्राइम और AI के खतरे का जिक्र करते हुए कहा कि बिना पुष्टि किसी भी चीज पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
पुर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने चुप्पी तोड़ी
— Rubika Liyaquat (@RubikaLiyaquat) April 24, 2026
जो क़िताब छपी ही नहीं… जिसकी कॉपी मैंने भी नहीं देखी वो किसी और के पास कैसे पहुँच सकती है?
क्या पता किसी ने हैक कर दिया हो…
राहुल गांधी उसी unpublished क़िताब को लेकर संसद पहुँचे थे। pic.twitter.com/Cq0MWACzm3
सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने राहुल गाँधी के उन आरोपों को खारिज किया, जिसमें राहुल गाँधी ने कहा गया था कि सरकार ने सेना को अकेला छोड़ा। नरवणे के मुताबिक, उस समय सरकार ने उन्हें पूरी आजादी दी थी और यह सेना पर पूरा भरोसा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस विवाद को राजनीतिक मुद्दा मानते हैं और सेना को राजनीति से दूर रखने के पक्षधर हैं।
क्या था मामला
पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने संसद में इस किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 2020 के भारत-चीन गतिरोध के दौरान सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया। इस दावे के बाद संसद में हंगामा हुआ और मामला और गर्मा गया।
हालाँकि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ कहा कि यह किताब न तो छपी है और न ही किसी भी रूप में प्रकाशित या वितरित की गई है। इसके बावजूद किताब की कॉपी सामने आने के दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए, यहाँ तक कि पुलिस जाँच भी शुरू हुई।
इस बीच जनरल नरवणे ने एक नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ भी लिखी है। इसमें उन्होंने सेना से जुड़े कई दिलचस्प और कम चर्चित किस्सों को साझा किया है, जो आम लोगों के लिए नई जानकारी लेकर आते हैं।
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