चीफ जस्टिस साहब, रात 2 बजे तक जागने के मौके पहले भी आए थे, लेकिन जजों पर हमला हुआ तब ही नींद उड़ी

सुभाष चन्द्र

आखिर चीफ जस्टिस सूर्यकांत को सख्त क्यों होना पड़ा, उसकी असली वजह यह है कि ऊंट अब पहाड़ के नीचे आया है। जब अपने सिर पर डंडा पड़ता है तभी सच्चाई सामने आती है। ठीक वही हाल ममता ने सुप्रीम कोर्ट को दिखा दिया। नेताओं के लिए लचीला रुख अदालतों पर ही भारी पड़ रहा है। अभी ममता ने आईना दिखाया है बाकी नेताओं की लम्बी लिस्ट है। आगे-आगे देखिए होता है क्या!    

बंगाल के मालदा में 7 जजों पर भीड़ ने बंधक बना कर हमला किया उन 7 में से 3 तो महिला जज थी और ममता बनर्जी ने सफाई दे दी कि उसको तो इस घटना का पता ही नहीं था और राज्य का Law & Order तो वैसे भी अब उसके हाथ में नहीं है (मतलब वह अब चुनाव आयोग के हाथ में है) अगर वह ममता सरकार के हाथ में नहीं है तो कपिल सिब्बल और अन्य वकील कैसे सुप्रीम कोर्ट में उसकी सरकार की तरफ से खड़े थे। चीफ जस्टिस को आदेश देना चाहिए कि उन वकीलों की फीस राज्य सरकार की तरफ से न दी जाए

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच से सुनवाई की चीफ जस्टिस ने कहा This was not a routine incident. It was ex facie a calculated well- planned and deliberate move to demoralise the judicial officers and impact the ongoing process of adjudication of objections”. उन्होंने यह भी कहा कि वो रात 2 बजे तक मामले की monitoring कर रहे थे और he had never seen such a “politically polarised state like west Bengal. बेंच ने कहा the incident is a “complete failure of administration” and a direct challenge to authority.

सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों को virtually कोर्ट में पेश होने को कहा -

Chief Secretary of West Bengal

Director General of Police (DGP) of West Bengal

District Magistrate (DM) of Malda

Superintendent of Police (SSP/SP) of Malda

इन लोगों से सीधा सवाल पूछा जाना चाहिए कि आपने किसके कहने पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या चुनाव आयोग ने रोका या ममता ने रोका? उनसे सवाल जरूर होने चाहिए, कहीं ऐसा न हो, बस बुला के बिठा लिया और जिरह वकीलों से होती रहे चंद्रचूड़ ने मणिपुर के DGP को बुला कर ऐसा ही किया था पूरा दिन वह कोर्ट में बैठे रहे किसी जज ने एक सवाल नहीं पूछा

चीफ जस्टिस का कहना कि इस घटना ने सीधा “authority” को चुनौती दी है लेकिन सच तो यह है कि ममता अपने आपको राज्य में supreme authority मानती है जो सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर है 

चीफ जस्टिस साहब ममता राज में लोगों पर खासकर हिंदुओं पर अनेक घोर अत्याचार हुए हैं जिनके लिए भी आपको रात रात भर जाग कर monitoring करनी चाहिए थी लेकिन वह आपने केवल तब किया जब judicial officers पर हमले हुए एक बड़ा सीधा सा सिद्धांत (कानून) है कि सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालना और उसे काम करने से रोकना अपराध है वह अपराध ममता ने IPAC की ED की रेड में किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट उस मामले को भी अभी तक लिए बैठा है जबकि ममता ने माना वह वहां गई लेकिन पार्टी अध्यक्ष के नाते लेकिन कोई भी हो वह ED के काम में रुकवाट नहीं डाल सकता उस पर तो निर्णय दिया होता

बहुत लोगों का कहना है केंद्र को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए केंद्र को ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन अब ठीक चुनाव से पहले किया नहीं जा सकता पहले किया जाता तब यही सुप्रीम कोर्ट जो आज उबल रहा है सवाल उठाता कि जिस सरकार के पास करीब तीन चौथाई बहुमत है आपने उसे कैसे गिरा दिया और फिर जनता भी ममता को “पीड़ित” मानकर फिर उसे वोट देती

इतना ही नहीं जब 2 मई, 2021 को चुनाव नतीजे आए तो उसी दिन से हिंदुओं पर हमले शुरू हो गए और 80 हजार लोगों को घर से बेघर होना पड़ा उसके लिए भी PIL दायर हुई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया उस दिन जो भी चीफ जस्टिस था उसे नींद नहीं आनी चाहिए थी

एक बात तो निश्चित है इस महीने के चुनाव में ममता अगर जीत गई तो 2021 की तरह फिर हिंदुओं पर हमले होंगे और उसके लिए यह नहीं देखा जाएगा कि कौन दलित है, आदिवासी है, OBC है या सवर्ण है

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