ममता बनर्जी अमित शाह को मछली, मीट खाने को कह रही है, क्या ये उसकी हताशा है?

सुभाष चन्द्र

पुरुलिया की रैली में ममता ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आ गई तो लोगों के मछली और मीट खाने पर भी रोक लगा देगी। उसने कहा कि भाजपा कहती है कि वो मछली, मीट और अंडे नहीं खा सकती और किसी धर्म को नहीं मानती और भाजपा आदिवासियों का शोषण करती है और उसके राज्यों में महिलाओं पर हमले होते हैं। भाजपा ने कब ये कहा, हमें नहीं पता और अपने राज्य में ममता पहले देखे महिलाओं की क्या हालत है। 

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भाजपा की खुद की और साथी दलों के साथ अभी 22 राज्यों में सरकार है। क्या किसी राज्य में मछली और मीट खाने पर रोक लगाई है? राहुल गांधी भी कहता था कि भाजपा लोगों को अपने पसंद का खाना नहीं खाने देती। वो कहना चाहता था कि मुस्लिमों को गौमांस नहीं खाने दिया जाता और शायद ममता गौमांस कहना भूल गई कि बंगाल के मुस्लिमों को भी वह खाने नहीं दिया जाएगा। ममता ने कहा है कि 1.2 करोड़ वोट काट दिए गए हैं बंगाल में और यही उसकी तड़प का कारण लगता है

अमित शाह ने कहा कि वह बंगाल में 15 दिन रहेंगे तो ममता ने अमित शाह को ऐसे व्यंजनों की लिस्ट भेजी जो पूर्ण रूप से nonveg हैं और सलाह दी कि वे ये व्यंजन भी खाएं जबकि उसे पता है अमित शाह शाकाहारी है। ये राज्य में आए गृहमंत्री का सरासर अपमान है। 

ममता को किसी की परवाह नहीं है, केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक को अपने ठेंगे पर रखती है। सुप्रीम कोर्ट से बार बार फटकार मिलती है लेकिन उस पर कुछ असर नहीं है क्योंकि उसको पता है सुप्रीम कोर्ट में भी तारीख लगती रहेंगी और तब तक चुनाव ख़त्म हो जाएंगे। अगर IPAC की रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट कार्रवाई कर देता तो हो सकता था कुछ असर होता। गुंडागर्दी का तांडव चलते हुए भी अगर लोग उसे फिर से सत्ता देते हैं तो वे अपनी दुर्दशा के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे और दुर्दशा होनी तय है

ममता की जीत के लिए 2 Opinion Poll में भविष्यवाणी कर दी गई है -Votevibe-CNN-News18 survey ने ममता को 184-194 सीट दी हैं और Matrix-IANS survey ने उसे 155-170 और बीजेपी को 100-115 सीट दी हैं। वैसे ज्योतिषविद भी लगे हैं और अधिकांश का कहना है कि ममता अबकी बार सत्ता में नहीं आएगी, ऐसी भविष्यवाणी पिछली बार भी की गई थी

चुनाव में ममता के रहते निष्पक्ष चुनाव होना किसी भी हाल में संभव नहीं है। चुनाव आयोग ने 2.4 लाख CRPF जवानों की मांग की है लेकिन उन्हें ऐसे लोगों को देखते ही गोली मारने के आदेश होने चाहिए जो वोटरों को घर से निकलने से रोके, जबरन TMC को वोट देने के लिए कहे और भाजपा को वोट देने पर मरने मारने की धमकी दे

बंगाल में सबसे बड़ा फैक्टर cut money है। ये ऐसा मकड़जाल है जिसमे आम आदमी फंसा हुआ है और वह खुद उसे छोड़ना नहीं चाहता क्योंकि पैसे के लेनदेन से काम हो जाता है। इस फैक्टर के चलते भी ममता को जीत की उम्मीद रहती है। इसके अलावा मुस्लिम वोट तो हैं ही उसके पाले में - हुमायूं कबीर कितना वोट काट सकता है यह तो समय ही बताएगा। अबकी ओवैसी ने उसके साथ गठबंधन कर लिया है। पिछले चुनाव में Pirzada Abbas Siddiqui की पार्टी Indian Secular Front (ISF) ने 32 सीट लड़ी लेकिन एक ही जीत पाया। वैसे अबकी सुना है वामपंथी भी चुनाव से पहले मंदिर मंदिर भटकने लगे हैं ताकि हिंदू बहक जाएं

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