न हॉर्मुज खुला, न बदली ईरान की सत्ता… कंफ्यूजन में ट्रंप प्रशासन; कभी वापसी की बात तो कभी युद्ध जारी रखने का दावा: अमेरिका के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?

                                                                                          प्रतिकात्मक तस्वीर (साभार- chatgpt)
अमेरिका अब ईरान युद्ध से पीछे हटने को तैयार है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान से समझौता हो या न हो, अमेरिका 2-3 सप्ताह के भीतर अपनी सैन्य कार्रवाई खत्म कर देगा और ईरान युद्ध से बाहर हो जाएगा। अब सवाल ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऐसी क्या मजबूरी आ गई जो ईरान को युद्ध में परास्त करने के जिद को छोड़कर बगैर समझौते के युद्ध खत्म करने की बात कह रहे हैं। अब होर्मुज खुलवाने और होर्मुज पर नियंत्रण की बात भी वे भूल चुके हैं।

क्या कहा राष्ट्रपति ट्रंप ने

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच डील की उम्मीद बनी हुई है। ईरान अगर बातचीत की मेज पर आता भी है तो इससे फर्क नहीं पड़ेगा। ईरान से शर्तों के साथ बातचीत करने का दम भरने वाले राष्ट्रपति ट्रंप को अब कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान से डील हो या न हो। उन्होंने यह भी कहा है कि होर्मुज खुले या न खुले, ये सिर्फ अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। दुनिया के दूसरे देश भी आगे आकर इसे खोलने की कोशिश करें।

उन्होंने कहा कि फ्रांस और दूसरे देश अगर तेल चाहते हैं तो होर्मुज स्ट्रेट होकर जा सकता है, अमेरिका का उससे कोई लेना-देना नहीं है।

हालाँकि ईरान की पार्लियामेंट ने यहाँ से गुजरने वाली जहाजों से टोल वसूलने का मन बना लिया है और एक प्रस्ताव पास किया, जिससे ईरान की मोटी कमाई होगी। ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका- इजरायल के तेल- गैस टैंकर यहाँ से नहीं गुजर सकते। ऐसे में अमेरिका के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल काम है। युद्ध से निकलने को बेताब अमेरिका इसमें फँसना नहीं चाह रहा है।

ईरान में रिजीम बदलने का दावा किया

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन हो चुका है’। उनके मुताबिक, ईरान के नए नेता पहले के नेताओं की तुलना में ‘ कम कट्टरपंथी’ और ‘ज्यादा समझदार’ हैं। उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने का दावा भी किया है।
उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब कोई एंटी एयरक्राफ्ट नहीं बची है। अब कोई मुकाबला ईरान नहीं कर पा रहा है और कोई हम पर गोली भी नहीं चला रहा है। ईरान के पास कोई सैन्य साजो सामान नहीं है। न ही नौसेना बची है और न ही सामान इसलिए समझौता की गुहार लगा रहे हैं।

कम से कम 6 महीने तक लड़ने में दिक्कत नहीं- ईरान

ईरान ने समझौते के लिए शर्ते रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को फोन कर कहा है कि उनपर भविष्य में इस तरह से हमले नहीं किए जाने की गारंटी चाहिए। ईरान पर आक्रमण तुरंत बंद हो।

दूसरी तरफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स ने मिडिल ईस्ट में काम करने वाली अमेरिकी 18 कंपनियों को तुरंत बोरिया बिस्तर समेटने की चेतावनी दी है और कहा है कि युद्ध में अमेरिका को तकनीकी मदद देने की वजह से इन कंपनियों को अब मिडिल ईस्ट छोड़ना पड़ेगा, वरना उन पर हमले होंगे।

ईरान ने कहा है कि कम से कम 6 महीने तक ईरान युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं है। उनका कहना है कि ईरान के पास अभी सैन्य साजो सामान से लेकर हर चीज का इतना स्टॉक है कि वह अगले कम से कम 6 महीने तक बगैर दिक्कत के युद्ध लड़ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट बना अमेरिका के लिए मुसीबत

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया पर दबाव बना है। दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल-गैस की आवाजाही इस मार्ग से होती है। दुनिया के इस व्यस्ततम मार्ग पर ईरान का कब्जा है। उसने अपने ‘मित्र देशों’ को इससे तेल और गैस से भरी जहाजों को सुरक्षित ले जाने की इजाजत दी है।

अमेरिका की चाह कर भी यहाँ कुछ नहीं चल रही है। पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करेगा, फिर उन्होंने नाटो देशों से इसमें मदद करने की गुहार लगाई।

ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन समेत ज्यादातर नाटो देशों ने मना कर दिया। इसके बाद अमेरिका खुद ये कह रहा है कि ईरान प्रशासन से बात कर कई देश अपना तेल-गैस होर्मुज स्ट्रेट से ले जा रहे हैं और आवाजाही चल रही है। एक तरह से अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए न तो अपनी सेना लगाना चाहता है और न ही मुसीबत मोल लेना चाहता है।

युद्ध में अमेरिका का हो रहा बेहिसाब खर्च

राष्ट्रपति ट्रंप को लगा था कि ईरान युद्ध ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा और 2-4 हफ्तों में बम गिरा कर ईरान को काबू में किया जा सकेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप पर जल्द से जल्द युद्ध खत्म करने का दबाव इसलिए भी है क्योंकि अमेरिकी खजाने पर हर दिन करोड़ों की चोट लग रही है। हर सेकेंड अमेरिका को 10 लाख रुपए खर्च करना पड़ रहा है।

सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले के लिए हर दिन अमेरिका 8455 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। 28 फरवरी से 31 मार्च तक अमेरिका के 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस खर्च को राष्ट्रपति ट्रंप अब खाड़ी देशों से वसूलने का प्लान बना रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी देश को युद्ध का खर्च उठाने के लिए कहा है।

ट्रंप के करीबी वेंस और रुबियो के बीच मतभेद

व्हाइट हाउस में ईरान युद्ध को लेकर सिरफुटव्वल है। जानकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की अपनी टीम में ही इस समय दो गुट बन गए हैं और दोनों के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है।

एक गुट उन लोगों का है जो देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति को संभालते हैं। इनका कहना है कि अगर यह युद्ध और लंबा खिंचा, तो पेट्रोल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। उन्हें डर है कि अगर आम जनता को महँगा पेट्रोल खरीदना पड़ा, तो वे ट्रंप के खिलाफ हो जाएँगे और उनका समर्थन करना बंद कर देंगे। नवंबर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनाव में इसका असर पड़ेगा। अगर परिणाम राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जाते हैं तो वह देश में काफी कमजोर हो जाएँगे।

यही वजह है कि ट्रंप के बेहद करीबी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को युद्ध को लंबा खिंचने को लेकर जमकर लताड़ लगाई है और कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को बरगलाया और उन्हें ये बताया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान है और युद्ध जल्दी ही निपट जाएगा।

व्हाइट हाउस का दूसरा गुट ईरान युद्ध को यूँ ही खत्म करने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है कि अगर अभी हमला रोक दिया गया, तो ईरान इसे अपनी जीत समझेगा और बहुत जल्द परमाणु बम बना लेगा। उन्हें डर है कि अधूरा छोड़ा गया काम आगे चलकर अमेरिकी सैनिकों के लिए और भी बड़ा खतरा बन सकता है। उनका तर्क है कि ईरान को अभी पूरी तरह कमजोर करना जरूरी है।

राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचने वाला है।

अमेरिका में बढ़ रही महँगाई और बढ़ रहा विरोध प्रदर्शन

अमेरिका में गैस और तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। इस वजह से महँगाई बढ़ गई है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह ईरान युद्ध से बाहर निकलने के बाद जल्द इस पर ध्यान देंगे। वह जल्द ही इस युद्ध से बाहर निकल जाएँगे।

अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर बड़े बड़े शहरों में प्रदर्शन का दौर जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप के कथित तानाशाही के खिलाफ ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन हो रहे हैं और ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने और गिरफ्तार करने तक की माँग की जा रही है। प्रदर्शनकारी ट्रंप की युद्ध नीति, संघीय इमीग्रेशन कानून , फ्यूल की बढ़ती कीमत और देश में बढ़ रही महँगाई को मुद्दा बनाया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रंप हम पर एक तानाशाह की तरह राज करना चाहते हैं, लेकिन यह अमेरिका है। यहाँ असली ताकत आम लोगों के हाथों में है, न कि उन लोगों के हाथों में जो खुद को राजा समझना चाहते हैं और न ही उनके अरबपति साथियों के हाथों में है। अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन DC और लॉस एंजिल्स सहित हर बड़े शहर में ट्रंप विरोधी प्रदर्शन हुए हैं।

तेल और गैस की विश्वव्यापी समस्या पैदा होने से अमेरिका पर दबाव पड़ा है। आंतरिक और बाहरी समस्याओं में राष्ट्रपति ट्रंप फँस गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा नहीं कर पाने का एकमात्र रास्ता अमेरिकी सेना का ईरान में जमीनी कार्रवाई से संभव है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही कहा था कि वह अपनी सेना को ऐसी ‘बेवकूफाना’ जमीनी लड़ाइयों में नहीं झोकना चाहते जहाँ अमेरिकी सैनिकों की जान जाए। लेकिन दूसरी तरफ, तेल की कमी की वजह से जो महँगाई बढ़ रही है, उसे रोकने के लिए उनके पास अब ऑप्शन खत्म होते जा रहे हैं।

अमेरिका ने युद्ध शुरू करने से पहले अपने 4 लक्ष्य बताए थे। ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना, ईरानी नौसेना शक्ति को पूरी तरह खत्म करना, ईरान के क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए समाप्त करना। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ये सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। अमेरिका में इसी साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने जब इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला शुरू किया था तो अमेरिका की बड़ी आबादी इस पक्ष में था कि ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न बनने से रोकना जरूरी है। लेकिन अब राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में लगातार कमी आ रही है।

अमेरिका में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और ट्रंप- वेंस की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है। राष्ट्रपति ट्रंप जल्द से जल्द ईरान युद्ध खत्म कर अपना ध्यान अमेरिका के अंदरुनी समस्याओं को खत्म करने पर लगाना चाहते हैं क्योंकि उनके लिए ये चुनाव जीतना बेहद जरूरी हैं। यह संसद में उनकी ताकत और कुर्सी बचाए रखने के लिए आवश्यक है।

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