किशोरों के अपराध समाज के लिए सबसे गंभीर समस्या; 400 रुपए के लिए 3 नाबालिगों ने हत्या की और चौथे ने वीडियो बनाया

सुभाष चन्द्र

अब समय आ गया है कि Juvenile Justice Act को पूरी तरह ख़तम कर देना चाहिए और नाबालिगों को बालिग की तरह अपराधी माना जाना चाहिए इसे पोक्सो एक्ट से कंफ्यूज करने की जरूरत नहीं है जो नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण रोकने के लिए है और पोक्सो एक्ट में भी अदालतों को किसी तरह की नरमी नहीं दिखानी चाहिए

आज सुबह खबर पढ़ कर मैं दंग रह गया जिसके अनुसार दिल्ली के मुस्तफाबाद में (muslim dominated area) 3 नाबालिग लड़कों ने मोहम्मद कैफ (25) की चाकुओं से हत्या कर दी और उनका चौथा साथी हत्या का वीडियो बनाता रहा मुस्तफाबाद में 30% मुस्लिम हैं और वहां कुछ localities में 90% तक मुस्लिम रहते हैं। अभी एक वीडियो रिपोर्ट सुन रहा था जिसमें वहां के कुछ लोग बता रहे थे कि पिछले 6 महीने में 3 हत्याएं पहले भी हो चुकी हैं कैफ की हत्या करने वालों का किसी रिपोर्ट में कहीं नाम नहीं बताया गया है कैफ से इन चारों लड़कों ने 400 रुपए लेने थे और रुपए न मिलने की वजह से उसकी हत्या कर दी

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आज के एक अख़बार के अनुसार ऐसी हत्याएं दिल्ली में कई जगह हुई हैं :- 

-10 फरवरी को ख्याला में 2 नाबालिगों ने मामूली विवाद पर एक किशोर की चाकू घोंप कर हत्या कर दी;

-23 फरवरी मंगोलपुरी में सिगरेट मांगने पर हुए विवाद में नाबालिगों के एक गुट ने 17 साल के लड़के की हत्या कर दी;

-5 मार्च को उत्तम नगर में तरुण (26) की एक नाबालिग ने अन्य लोगों के साथ मिलकर (मुस्लिम महिला पर रंग पड़ने की वजह से) हत्या कर दी;

-24 मार्च को नेहरू विहार में 3 नाबालिगों ने घर में घुस कर हत्या कर दी

इसके अलावा भी आए दिन नाबालिगों के अपराधों की खबरें आती रहती है जिसमें यौन अपराध (बलात्कार) भी शामिल हैं बड़े घरों के नाबालिग तो अक्सर सड़कों पर तेज कार चला कर लोगों को कुचलते हुए देखे गए हैं लेकिन कुछ दिन बाद सब जमानत पर छूट जाते हैं और मुकदमेबाजी चलती रहती जिस पर शीघ्र निर्णय करना तो अदालतों की परंपरा ही नहीं है 

यह नहीं माना जा सकता कि यह अपराध नाबालिग नासमझी में कर रहे हैं उन्हें पूरा ज्ञान है कि हमारे किसी भी अपराध की सजा बस 3 साल सुधार गृह की कथित जेल होगी और जमानत तो पहले ही मिल जाएगी सुधार गृह की जगह सीधा जेल में रख कर अगर पत्थर तोड़ने के काम या अन्य कुछ ऐसे काम जिनसे कुछ tourchar हो, लिए जाएं तो कुछ तो भय होगा 

आज का नाबालिग मानसिक तौर पर पूरी तरह बालिगों की तरह सक्षम है उसे sex crime कैसे करना है, उसका पूरा ज्ञान है 16 साल की आयु तो छोड़िए, 10-12 साल के किशोर भी अपराध करने में पूरी तरह सक्षम हैं दंगो में या हिंदू त्योहारों की शोभा यात्राओं पर पत्थरबाजी करने वाले आधे से ज्यादा नाबालिग दिखाई देते हैं वंदे भारत या अन्य नई ट्रेनों पर पत्थर मारने वाले या रेल पटरियों पर पत्थर रखने वाले और ट्रैक्स की फिश प्लेट्स निकालने वाले बहुत नाबालिग दिखाई देते हैं जो भयंकर ट्रेन दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं

इसलिए अब Juvenile Justice एक्ट को पूरी तरह ख़त्म करने की जरूरत है वैसे juvenile कोर्ट को शक्तियां हैं वह 16-18 वर्ष के नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाए लेकिन वह बहुत प्रभावशाली नहीं है और इसलिए एक्ट ही ख़त्म होना चाहिए अगर समाज में सुधार लाना है

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