नूपुर शर्मा द्वारा इस्लामिक किताबों में लिखी बात को बोलने पर हंगामा करने वाले उपद्रवी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के द्वारा कुरान में नहीं लिखी बात को बोलने पर क्यों खामोश हैं? क्या मुस्लिम कट्टरपंथी और उनके आका पार्टी देख उपद्रव करते हैं? जो कुरान की बात खड़के ने कही क्या सच है अगर नहीं फिर कट्टरपंथियों और उनके आकाओं की चुप्पी क्या साबित करती है? क्या अब इस्लाम का सम्मान किया जा रहा?
टीवी पर परिचर्चाओं में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता खड़के पर हो रहे प्रहारों पर कुरान टिप्पणी पर पर्दा डाल दलित कार्ड खेल बचाते नज़र आया। लेकिन अगर यही बात खड़के की बजाए किसी बीजेपी नेता ने कह दी होती उपद्रवी मुस्लिम कट्टरपंथी और उनके आका चील-कौआ की तरह चीख-चिल्लाकर "सिर तन से जुदा गैंग" सडकों पर आ गए होते, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा अपमानजनक बात बोलने पर सबको सांप सूंघ गया।
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