जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के नाम से केजरीवाल की पैंट हर समय गीली रहती है; न्यायपालिका और न्यायाधीश पर पक्षपाती होने का आरोप लगा कर फंस गया केजरीवाल

सुभाष चन्द्र

केजरीवाल की मंशा है कि जस्टिस शर्मा पर हर फोरम पर आरोप लगा कर इतना दबाव बना दिया जाए कि वो स्वयं ही केस से अलग हो जाएं लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि आज जस्टिस शर्मा हैं तो कल को कोई और जज हो सकता है जिसकी इज़्ज़त उतारने में ये मक्कार पीछे नहीं रहेगा। प्रश्न न्यायपालिका और न्यायाधीश के सम्मान का है और दोनों पर आरोप लगा कर केजरीवाल ने खुलेआम Contempt of Court कर दिया

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जस्टिस शर्मा के खिलाफ केजरीवाल का विलाप साबित कर रहा है कि उनके निर्णय को काट सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता भी नहीं कर सके लेकिन केजरीवाल ने उन्हें ऐसा “manage” कर लिया कि 12,जुलाई 2024 को ED की गिरफ़्तारी मामले में जमानत तो दे दी लेकिन गिरफ्तारी वैध थी या नहीं, यह निर्णय नहीं कर सके और बड़ी बेंच को भेज दिया केजरीवाल ने सब कुछ ऐसा manage किया कि आज लगभग 2 साल बाद भी बेंच नहीं बनी है

आप एक बहुत गहरी बात समझिए कि दो जज गिरफ़्तारी के मामले पर (जिस पर जस्टिस शर्मा ने निर्णय दे दिया) फैसला नहीं कर सके लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ही दो जज राष्ट्रपति को आदेश दे देते हैं क्या चारों जज अपने ऊपर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़ा किए अपनी क़ाबलियत को लेकर? क्यों दो जज हाई कोर्ट के एक जज के फैसले को नहीं पलट सके और बड़ी बेंच को भेजा तो आदेश भी देते यह बेंच 3 महीने गठित कर दी जाए यह साबित करता है कि सारा मामला “Managed” और मैनेजर तो कई रहे होंगे अभिषेक सिंघवी मुख्य था

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा में केजरीवाल को “महिषासुरमर्दिनि” दिखाई दे रही है कि अगर उसने  सुनवाई की तो केस फिर खुलेगा जिसमें “manage” कर के “सभी Discharge” हो गए वह भी बिना ट्रायल के 

केजरीवाल ED के 9 समन पर हाजिर न हो कर जब हाई कोर्ट गया तब वहां से ही ED के सबूत देख कर आदेश मिल गया था गिरफ़्तारी का और 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार हुआ सिंघवी ने स्वर्ण कांता शर्मा के सामने विलाप किया कि चुनाव के समय क्यों गिरफ्तार किया गया ये अपने केजरीवाल से पूछ नवंबर,23 से 9 समन पर क्यों नहीं आया था 

अपने 8 अप्रैल, 2024 के फैसले में जस्टिस शर्मा ने साफ़ कहा था कि -

-”जांच एजेंसी के कानून के आदेश का पालन किया और रिमांड पर भेजने का मजिस्ट्रेट का आदेश भी सही था;

-ED की सामग्री से पता चलता है कि केजरीवाल ने षड़यंत्र रचा, वह पैसे के उपयोग और छिपाने में भी शामिल था;

-यह भी पता चलता है डीलरों के साथ गोवा चुनाव में आप उम्मीदवार के भी बयान हैं और पैसा गोवा भेजा गया; 

-न्यायाधीश कानून से बंधे हैं और अदालत के निर्णय राजनीतिक विचारों के बजाय कानूनी सिद्धांतों पर दिए जाते हैं और यह मामला केंद्र सरकार और केजरीवाल के बीच न होकर ED और केजरीवाल के बीच है;

-यह तय करना आरोपी का काम नहीं है कि जांच कैसे की जानी है, CM सहित किसी के लिए भी कोई विशेषाधिकार नहीं हो सकता”

अब जस्टिस शर्मा के स्पष्ट आदेशों की काट अगर सुप्रीम कोर्ट के जज नहीं निकाल सके तो यह साबित करता है वे मान रहे है कि केजरीवाल की गिरफ़्तारी वैध थी जो जस्टिस शर्मा ने कही लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने जबरन लटका दिया और वह आज भी मौज कर रहा है

जनता का 55 करोड़ रुपया वकीलों पर उड़ा कर आज हाई कोर्ट में खड़ा हो गया कि जज को हटाने का केस वो खुद लड़ेगा तुषार मेहता ने कहा अपने वकील को पहले डिस्चार्ज करो फिर केस की बहस करो बड़ा बेईमान है, कहता है आज के लिए कोई वकील नहीं होगा बस मैं रहूँगा

ममता को भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था आपके पास वकीलों की फ़ौज है, उन्हें ही उनका काम करने दीजिए 

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