राहुल गाँधी के भाषण से झलकता है कि राहुल गाँधी देश विरोधी मानसिकता से ग्रसित हो चुके हैं।सभी जानते ही है कि जब महिला आरक्षण बिल पर एक ऐतिहासिक फैसला सरकार लेने वाली थी जिसके लिए पूरा देश इंतजार कर रहा है 35 सालों से जिसमें उम्मीद यह जताई जा रही थी कि विपक्ष भी इस फैसले में साथ देगा। ड्रामा खेलने में नाही सत्ता पक्ष पीछे है और नाही विपक्ष। अगर सत्ता को महिलाओं को आरक्षण देना है तो वर्तमान संख्या में क्यों नहीं देता? क्यों सीटें बढ़ाई जा रही है। जनता की समस्याओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कर्मचारी को कुछ वर्ष नौकरी करने बाद पेंशन मिलती है लेकिन इन सफेदपोश लुटेरों को शपथ लेते ही, क्यों? जब ये जनसेवक के नाम पर वोट मांगते हैं फिर पेंशन क्यों? जिस दिन समस्त सांसद इस खुली लूट के लिए एकजुट होकर बंद करवा देंगे देश को हर महीने करोड़ों की बचत होगी। और जब सांसदों की संख्या बढ़ेगी उनको मिलने वाली पेंशन का भी बोझ बढ़ेगा। BPL के नाम पर फ्री में राशन दिया जा रहा है क्यों? फ्री में राशन लेने वालों की आर्थिक स्थिति की जाँच की? जनता को मुफ्त रेवड़ियां बांट मुर्ख बनाया जा रहा है। फ्री में राशन जरूरतमंद को मिले हर किसी को नहीं। जबकि कई स्वयंसेवी संस्थाएं रोज गरीबों में भोजन वितरण करती हैं।
जनता को उन पार्टियों को भी चुनाव में धूल चटानी होगी जो बढ़ने वाली सीटों को सिर्फ मुस्लिमों के लिए आरक्षित किये जाने पर सरकार का समर्थन करने को तैयार है। महिला महिला ही होती है। जो दर्शाता है विपक्ष की मंदबुद्धि और मुस्लिम तुष्टिकरण सोंच। जनता को विपक्ष और सत्ता की इस लूट से सावधान होना पड़ेगा। वरना आने वाली पीढ़ियां तुमको कोसेंगी। याद करो 543 से पहले संसद में कितनी सीटें थीं, सीटें बढ़ने से क्या फर्क पड़ा जनता की समस्याएं ज्यों की त्यों है। पुरुष सांसद को तो दो शब्द बोल सकते हो महिला को बोलना बहुत भारी पड़ेगा। इस मकड़जाल से दूर रहने में ही समझदारी है। ऑफिसों के कर्मचारियों की संख्या कम हो रही हैं लेकिन संसद में सीटें बढ़ाना क्या दोगलापन नहीं?
आजादी से लेकर आजतक भारत में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद मिलाकर करीब 15 हजार से 17000 हजार सांसद देश में बने है
जो लगातार जीतते आए है उनको हर बार की जीत की पेंशन मिलती आ रही है कोई 5 बार सांसद रहा तो उसको 5 बार की पेंशन , वर्तमान ने अगर सांसद है तो उसकी अलग से सैलरी भत्ते फंड यात्राएं दैनिक भत्ते फोन मेडिकल सुविधा सब मिल रही है
आप देखिए देश की जनता का दिया टैक्स कहा जा रहा है कैसे हमारे पैसे से नेता लोग मौज ले रहे है इतने में भी काम नहीं चलता इनका तो कमीशन खाते है घोटाले करते है
अब इनकी संख्या मोदी जी 850 कर रहे है विपक्ष विरोध करे या ना करे , लेकिन जनता को खुलकर विरोध करना चाहिए
क्योंकि इन 850 VIP लोगों का खर्चा हमको उठाना होगा ,वो भी 8 से 10 हजार की नौकरी 12 - 12 घंटे करके ,
बेसिक सैलरी 1 लाख रुपया
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हजार रुपया
ऑफिस खर्च भत्ता 60 हजार रुपया
दैनिक भत्ता 2000 हजार दिन का
फर्स्ट क्लास AC ट्रेन पूरी तरह फ्री साथ में एक और व्यक्ति भी
34 फ्री फ्लाइट ट्रिप/साल
परिवार के साथ भी उपयोग कर सकते
सड़क पर चलेंगे तो 16 रुपया प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलेगा
दिल्ली में फ्री सरकारी बंगला/फ्लैट
बिजली-पानी भी काफी हद तक मुफ्त
3 लैंडलाइन + 1 मोबाइल
1.5 लाख कॉल/साल मुफ्त
इंटरनेट भी उपलब्ध
पूरे परिवार का सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज मुफ्त
25000 हजार रुपया पेंशन
2000 हजार एक्स्ट्रा
Y+ सिक्योरिटी
बिना गारंटी के मोटा लोन
अगर राजनीति सेवा है तो फिर इतनी सैलरी , भत्ते , फंड , यात्राएं , दैनिक भत्ते , मेडिकल सुविधा , Y+ सिक्योरिटी क्यों ?
ये तो एक सबसे बड़ी नौकरी की तरह हो गई है जिसके लिए कोई पढ़ाई लिखाई की जरूरत नहीं है ना ही कोई एग्जाम और टेस्ट देना , चाहे कितने भी अपराधिक मुकदमे लगे हुए हो
कोई दिक्कत नहीं किसी भी प्रकार की , जितने अधिक मुकदमे उतना ही बड़ा नेता
इनकी संख्या अब 850 होगी तो कांग्रेस और बीजेपी का कुछ जाना वाला नहीं है इनकी तो मौज होगी उल्टा , पहले बेटे और नातियों को राजनीति में सेट करते आए थे
अब नातिन और बेटियों को भी राजनीति में सेट करने का बढ़िया जुगाड बना दिया है , इनके खर्च जनता को अपनी खून पसीने की कमाई से चुकाने होंगे
तो सबसे बड़ा विरोध तो जनता को ही करना चाहिए ना ?
सिर्फ महिला उत्थान की बात विपक्षी पार्टियों के लिए सिर्फ चुनाव में छेड़े जाना वाला शिगूफा मात्र है यह सिद्ध हो गया है क्योंकि सिर्फ अपने लालच ओर सत्ता सुख के लिए राजनीति करने वाले नेताओं ने इस बिल को बहुमत देने के बजाए गिरा दिया। जिसका पेश होने से पहले ही मोदी सरकार को मालूम था कि बिल के समर्थन में बहुमत नहीं हो सकता। जिसका चुनावों में लाभ उठाया जाएगा। और मुर्ख जनता विशेषकर महिला समाज इस जाल में फंस जाएगा। क्योकि देश की जनता अपने आपको लुटवाने में ही खुश होती है। जनता नहीं समझ रही कि सांसदों की संख्या बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर हर महीने करोड़ों का बोझ पड़ेगा जो महंगाई के रूप में हमसे ही वसूला जायेगा फिर चिल्लाएंगे हाय महंगाई, और ये नेता ऐश करेंगे।
अवलोकन करें:-
देश के महिलाओं के प्रति अपमान विपक्षी पार्टियों द्वारा किया गया है, लेकिन इससे भी ज्यादा शर्मनाक और चिंताजनक बात थी देश के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी द्वारा अपने भाषण में किए गए बातों का जिक्र जिन्हें सुनकर हर देशवासी को एक बात समझ आ गई है कि राहुल गांधी की सोच देश के लिए खतरा बनती जा रही है। आखिर राहुल इतनी भड़काऊ बयानबाज़ी करता है सरकार क्यों हाथ में चूड़ियां पहनकर बैठी रहती है। सिर्फ FIR या मुकदमा दर्ज करना ही हल नहीं है कार्यवाही जरुरी है। अन्यथा किसी नागरिक द्वारा प्रधानमंत्री की विरुद्ध टिप्पणी करने पर कार्यवाही बंद हो। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में जब महाराष्ट्र में ठाकरे के शिवसैनिक उत्तरी भारतीयों के विरुद्ध उपद्रव कर रहे थे तब चंद्रशेखर ने उस बालासाहेब पर हंटर चलाया जिनसे सब डरते थे। महाराष्ट्र में उनकी तूती बोलती थी।
राहुल गांधी द्वारा अपने भाषण मैं जिन मुद्दों के खिलाफ बोले वो हैं–
देश में नोटबंदी
पुलवामा हमला
बालाकोट एयर स्ट्राइक
ऑपरेशन सिंदूर
राहुल गांधी के द्वारा इन सभी देश के सम्मान की बात को झूठ लगता है और उन्हें लगता है कि यह सब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाया गया मुद्दा है।
लेकिन आपको ताज्जुब होगा कि जो सोच राहुल गांधी रखते है वहीं सोच पाकिस्तान, चीन, विदेश में बैठे भारत विरोधी संगठन,ओर हमारे देश में छुपे हुए देश के गद्दार भी यही सोचते है।
बल्कि यह साफ तौर पर सिद्ध हो चुका है कि भारत में नोटबंदी आवश्यक थी वरना ना जाने कितना जाली नोट हमारे देश में आ जाता जिससे हमारी देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डूब जाती,
पूरे देश ने देखा था कि किस तरह पाकिस्तान और वहां बैठे दहशतगर्दों ने हमारे देश में पुलवामा, से लेकर पहलगाम जैसी बुजदिल घटना को अंजाम दिया जिसके बदले में हमारी सेना ने अपना सर्वोच्च पराक्रम दिखा कर पाकिस्तान को उसके घर मैं घुसकर मार कर आए।
लेकिन कितने शर्मनाक बात है कि हमारे देश का एक ऐसा नेता जो कहता है कि मेरे परिवार ने देश के बलिदान दिया जिसके परिवार ने देश पर सालों राज किया आज वही परिवार का अबोध बुद्धि वाला देश विरोधी मानसिकता से बीमार नेता उसी पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहा है और हमारे देश की सेना का अपमान कर रहा है।
शर्म आती है कि हमारे देश के संविधान और लोकतंत्र ने ऐसे नेता को खुला घूमने और इस तरह की भाषा का प्रयोग करने की छूट दे रखी है। इसमें सबसे कसूरवार हमारी अदालतें हैं जो जमानत देकर इस Leader of Propaganda को ऑक्सीजन देने का काम कर देती हैं।
हमारे देश को बर्बाद करने ओर देश के बर्बादी के सपने देखने वालों की असली जगह जेल की काल कोठरी है ना कि देश की जनता के पैसे से आरामदायक जीवन जीने वाले बंगले।
चाणक्य की बात राहुल गांधी की बहन कर रही थी तो प्रियंका वाड्रा को भी यह भी ध्यान होना चाहिए कि चाणक्य ने ही कहा कि विदेशी महिला से जन्मा बालक कभी राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता।
लेकिन अब कहने की या बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि राहुल गांधी खुद ही बता रहे है कि वो देश विरोधी है....!
राहुल गांधी की विदेशी नागरिकता केस नौ दिन चले अढ़ाई कोस ही साबित हो रहा था लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब गृह मंत्रालय को भी पार्टी बनाया और राहुल की नागरिकता संबंधित सभी दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया तो इस केस में अचानक से तेजी आ गई।
गृह मंत्रालय ने कड़ी सुरक्षा में 6 अप्रैल की सुनवाई में 4 हजार पन्नो के दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिए। जो यह भी साबित करता है कि सरकार को मालूम था कि राहुल के पास दोहरी नागरिकता है और ब्रिटिश नागरिकता में नाम Rahul Vinci है। मानों या न मानों केंद्र सरकार भी परिवार पर मेहरबान रही है। सोनिया गाँधी की धांधली तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में आयी थी। जिसे सोनिया ने टाइपिंग मिस्टेक बताने पर ठंठे बस्ते में डाल दिया, क्यों? कोर्ट में केस कर चुनाव रद्द करवाना था। जैसे राजनारायण ने इंदिरा गाँधी के चुनाव को रद्द करवाया था। लेकिन तानाशाह इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी लगा कम्युनिस्टों को छोड़ समूचे विपक्ष को जेल में ढूंस दिया था।
यहां से कोर्ट निर्णायक स्थिति में पहुंचा और सुनवाई में राहुल के ऊपर FIR दर्ज करने का आदेश सुना दिया, अब सुनने में आया है कि जज विद्यार्थी ने अपने आपको केस से पीछे कर लिया है। अगर दोहरी नागरिकता का मुकदमा राहुल की बजाए किसी सामान्य नागरिक के विरुद्ध होता तो क्या जज विद्यार्थी अपने आपको अलग करते? अगर इस खबर में सच्चाई है तो मुख्य न्यायाधीश को ऐसे जज को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। ऐसे जज सिर्फ आम नागरिकों पर कानून का चाबुक चला जज कहलवाना पसंद करते हैं।
अब उत्तरप्रदेश की पुलिस को करना क्या है? केवल इतना कि कोर्ट को बताना है कि हमने गृहमंत्रालय के सभी दस्तावेज चेक कर लिए वो सभी सही व प्रामाणिक हैं.....
इस विषय पर राहुल & गैंग की चुप्पी देखिए, कोई एक शब्द बोलने को तैयार नहीं।
गृह मंत्रालय ने कड़ी सुरक्षा में 6 अप्रैल की सुनवाई में 4 हजार पन्नो के दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिए। जो यह भी साबित करता है कि सरकार को मालूम था कि राहुल के पास दोहरी नागरिकता है और ब्रिटिश नागरिकता में नाम Rahul Vinci है। मानों या न मानों केंद्र सरकार भी परिवार पर मेहरबान रही है। सोनिया गाँधी की धांधली तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में आयी थी। जिसे सोनिया ने टाइपिंग मिस्टेक बताने पर ठंठे बस्ते में डाल दिया, क्यों? कोर्ट में केस कर चुनाव रद्द करवाना था। जैसे राजनारायण ने इंदिरा गाँधी के चुनाव को रद्द करवाया था। लेकिन तानाशाह इंदिरा गाँधी ने देश में इमरजेंसी लगा कम्युनिस्टों को छोड़ समूचे विपक्ष को जेल में ढूंस दिया था।
यहां से कोर्ट निर्णायक स्थिति में पहुंचा और सुनवाई में राहुल के ऊपर FIR दर्ज करने का आदेश सुना दिया, अब सुनने में आया है कि जज विद्यार्थी ने अपने आपको केस से पीछे कर लिया है। अगर दोहरी नागरिकता का मुकदमा राहुल की बजाए किसी सामान्य नागरिक के विरुद्ध होता तो क्या जज विद्यार्थी अपने आपको अलग करते? अगर इस खबर में सच्चाई है तो मुख्य न्यायाधीश को ऐसे जज को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। ऐसे जज सिर्फ आम नागरिकों पर कानून का चाबुक चला जज कहलवाना पसंद करते हैं।
अब उत्तरप्रदेश की पुलिस को करना क्या है? केवल इतना कि कोर्ट को बताना है कि हमने गृहमंत्रालय के सभी दस्तावेज चेक कर लिए वो सभी सही व प्रामाणिक हैं.....
इस विषय पर राहुल & गैंग की चुप्पी देखिए, कोई एक शब्द बोलने को तैयार नहीं।

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